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वर्ष 2050 तक देश में तेजी से बढ़ेंगे मस्तिष्क आघात के मामले

Thu, 28 Oct 2021 10:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 10:03 PM IST
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Cases of brain stroke will increase rapidly in the country by the year 2050
मेट्रो अस्पताल में आयोजित प्रेसवार्ता में जानकारी देते चिकित्सक।
नोएडा। भारत में हर 20 सेकेंड में एक व्यक्ति स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) से प्रभावित हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वर्ष 2050 तक दुनिया भर में स्ट्रोक के 80 फीसदी मामले भारत जैसे निम्न व मध्यम आय वाले जैसे देशों से सामने आएंगे। हर साल देश में करीब 19 लाख लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं। इनमें से करीब 19 से 21 हजार ही विंडो पीरियड में अस्पताल पहुंच पाते हैं, जो कुल स्ट्रोक के मरीजों का महज एक प्रतिशत है।
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हर साल 29 अक्तूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसे साधारण भाषा में मस्तिष्क आघात भी कहा जाता है। मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह रुकने पर इससे जान को खतरा हो सकता है। स्ट्रोक दिवस के मौके पर सेक्टर-11 स्थित मेट्रो अस्पताल में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. सोनिया लाल गुप्ता ने बताया कि मस्तिष्क की रक्तवाहिकाओं में ब्लॉकेज की कई वजह होती हैं। दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलने से उत्तकों में पोषक तत्वों की कमी से स्ट्रोक का खतरा होता है। ब्रेन स्ट्रोक के ज्यादातर पीड़ितों की आयु कम होती है।
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सीनियर कंसलटेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कपिल के सिंघल ने बताया कि स्ट्रोक किसी भी उम्र में हो सकता है। तंबाकू उत्पादों का सेवन, हृदय या फेफड़ों की बीमारियों की वजह के अलावा अत्यधिक शराब पीने वालों को भी स्ट्रोक का खतरा होता है। कंसलटेंट न्यूरो स्पाइन सर्जन डॉ. आकाश मिश्रा के मुताबिक, व्यायाम नहीं करने के कारण वजन बढ़ने लगता है। इससे अन्य बीमारियां भी दस्तक देती हैं, जो स्ट्रोक को सीधा न्यौता है। व्यायाम करने से हृदय गति बढ़ती है, पसीना आता है और वजन घटता है। स्ट्रोक के कई लक्षण हैं, इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही समय पर इलाज कराना चाहिए।
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युवाओं में तेजी बढ़ रहा खतरा
फेलिक्स अस्पताल के डॉ. सौम्य मित्तल ने बताया कि हृदय रोग व कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के बाद स्ट्रोक के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। स्ट्रोक दो तरह के हो सकते हैं। पहला इस्केमिक यानी मस्तिष्क में रक्त ले जाने वाली वाहिका खून के थक्के से अवरुद्ध होती है। दूसरा, हेमोरेजिक यानी जब मस्तिष्क में कमजोर रक्तवाहिकाओं की दीवारों के कारण खून बहने लगता है। आमतौर पर 55 से 65 वर्ष की उम्र के लोग इसका शिकार होते थे, लेकिन खराब जीवनशैली कारण युवा भी तेजी से इसके मरीज बन रहे हैं। ब्रेन स्ट्रोक विश्वभर में मृत्यु और अक्षमता का एक बहुत बड़ा कारण है।
4.5 घंटे के अंदर उपचार जरूरी
फोर्टिस अस्पताल नोएडा के न्यूरोलॉजी विभाग की निदेशक डॉ. ज्योति बाला शर्मा ने बताया कि स्ट्रोक के प्रति जागरूकता की जरूरत है। स्ट्रोक आने पर समय नष्ट होने का मतलब है मस्तिष्क नष्ट होना। स्ट्रोक का मतलब मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें तत्काल इलाज की जरूरत होती है। देश में स्ट्रोक मौत का दूसरा और विकलांगता अग्रणी कारण है। स्ट्रोक से पीड़ित के लिए शुरुआती 4.5 घंटे बड़े अहम होते हैं। इस दौरान सही उपचार और दवाओं की मदद से जीवन बचाया जा सकता है।
लक्षण : कमजोरी, लकवा पड़ना, शरीर सुन्न होना, चलने-फिरने में व बोलने में परेशानी होना, सिर में तेज दर्द, आंखों में असामान्य धुंधलापन, शरीर के एक तरफ कमजोरी।

बचाव : तनाव से दूर रहें, रक्तचाप नियंत्रित रखें, योग और ध्यान करते रहें, हृदय रोगी नियमित जांच कराएं, धूम्रपान और मदिरापान से दूर रहे, वसायुक्त आहार अधिक मात्रा में न खाएं।
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