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Noida News: इमारतों के निर्माण में नियम दरकिनार, रास्ते संकरे, आपात सेवाओं का पहुंचना भी मुश्किल

Mon, 01 Jun 2026 09:42 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 09:42 PM IST
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Building regulations are ignored, roads are narrow, and access to emergency services is difficult.
फोटो---
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अमर उजाला पड़ताल :
10 बाय 10 के कमरे में रह रहे दो से तीन युवा, कोई कर रहा यूपीएससी की तैयारी, कोई चला रहा घर का खर्च
-बिना मानक, सुरक्षा को ताक पर बने भवनों में हुआ हादसा तो आपात सेवाएं सकरे रास्ते से नहीं कर सकेंगी बचाव

ऋषभ कौशल
नोएडा। दिल्ली के सैदुल्लाजाब में शनिवार रात ढही सात मंजिला इमारत में दबकर हुई छह लोगों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। इसी तरह की इमारतें अग्निशमन और सुरक्षा के मानकों को ताख पर रखकर तेजी से बढ़ती जा रहीं हैं। यहां अगर दिल्ली जैसी घटना हुई तो रास्ते इतने संकरे हैं कि राहत बचाव कार्य भी नहीं पहुंच सकेगा।

बता दें, शहर प्रदेश की आर्थिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा अपने सपने संजोने आते हैं और मजबूरी में 10 बाय 10 के कमरे में अपना गुजारा करते हैं। दिल्ली में हुई इमारत गिरने की घटना ने शहर में धड़ल्ले से बन रहे पीजी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। जब अमर उजाला ने ऐसे स्थानों की पड़ताल की तो सामने आया कि शहर के 81 गांवों में छोटी-छोटी गलियों से लेकर नुक्कड़ तक बहुमंजिला पीजी बनते जा रहे हैं। यहां सुरक्षा का एक भी मानक फॉलो नहीं होता। अगर यहां आगजनी या दीवार गिरने जैसी घटनाएं हो जाएं तो रास्ते इतने संकरे हैं कि सुरक्षा बचाव गाड़ियां नहीं जा सकतीं।
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मुख्य रास्ते की 5 मीटर रोड अंदर आते-आते पांच मीटर में सिमट गई
पड़ताल के दौरान सामने आया कि सेक्टर-62 नवादा इलाके में जैसे ही प्रवेश करते हैं तो प्रवेश का रास्ता करीब 20 मीटर तक चौड़ा है। जहां बड़ी ही आसानी से दो चार पहिया वाहन गुजर सकते हैं, लेकिन वही रास्ता सिर्फ 50 मीटर अंदर आते ही पांच मीटर में सिमट जाता है। उन संकरे रास्तों में लाइन से बहुमंजिला पीजी खुले हैं, जहां आगजनी या अन्य कोई घटना हुई तो आपात सेवाएं भी नहीं पहुंच पाएंगी।
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बहुमंजिला इमारतों में
अग्निशमन सुरक्षा के मानक नहीं

सेक्टर-58 स्थित बिशनपुरा इलाके में जब पड़ताल की गई तो सामने आया कि सकरें रास्ते के अलावा बनीं कईबहुमंजिला इमारतों में अग्निशमन के उपकरण ही नहीं हैं। यही हाल सेक्टर 66 ममूरा, सेक्टर 51 होशियारपुर, सेक्टर 128 बख्तावरपुर, शाहपुर, हाजीपुर समेत अन्य इलाकों में देखने को मिला।
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पीजी में युवा रहते हैं। यही अपील है कि इमारत में अग्निशमन सुरक्षा के कड़े इंतजाम हों। निवासियों को आगजनी से बचने के तरीके भी सिखाए, सभी बिल्डिंग में वाटर टैंक हों ताकि खुद भी सुरक्षा कर सकें -विशेष त्यागी, अध्यक्ष, पेइंग गेस्ट हाउस ऑनर्स एसोसिएशन
हमसे जुड़े पीजी संचालकों की बैठक होती है। जहां सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन होता है, वहां कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। किसी की जान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। -अंकुर बंसल, संस्थापक, उप्र एकॉमोडेशन
बिजनेस एसोसिएशन


अब डर सताने लगा है कि जिस तरह हम अपने अन्य एक और साथी के साथ रहते हैं, आगजनी हुई तो कैसे खुद को बचाएंगे, पीजी में कई युवा रहते हैं। सभी की जान को हरदम खतरा बना रहता है। -सागर शर्मा, नौकरी पेशा सेक्टर 62


दिल्ली की घटना के बाद हमें भी चिंता सताने लगी है लेकिन मजबूरी है कि ऐसी ही स्थिति में रहना पड़ेगा, क्योंकि बढ़ती महंगाई के आगे पॉकेट खर्च सीमित है। -प्रिंस, छात्र, हाजीपुर निवासी


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