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Noida News: बिल्डरों को बताना होगा जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम
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-यूपी रेरा ने अपनी वेबसाइट पर सभी संशोधनों की जानकारी अपडेट की
-एक साल में बदले 12 नियम, बिल्डरों की मनमानी पर शिकंजा
-1000 रुपये शुल्क लगेगा परिवार के किसी सदस्य को फ्लैट ट्रांसफर करने में
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण(यूपी रेरा) ने एक साल में 12 नियमों को बदल दिया, ताकि बिल्डरों की मनमानी पर शिकंजा कसा जा सके। सभी बदलाव की जानकारी रेरा ने अपनी वेबसाइट पर अपडेट कर दी है, ताकि खरीदारों व बिल्डरों को उसकी जानकारी हो सके। रेरा के अफसरों का कहना है कि अब हर प्रोजेक्ट में बिल्डरों को बताना होगा कि उनमें कौन-कौन जिम्मेदार पदाधिकारी हैं।
बिल्डर को अब प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। ग्राहक से संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर और एक संपर्क या टोल-फ्री नंबर भी देना होगा। उन्हें नियमित अंतराल पर रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल भी अपडेट करनी होगी। इसके अलावा बिल्डर को चार ई-मेल का प्रयोग करना होगा। इनमें से एक प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, दूसरी प्रशासनिक काम, तीसरी ग्राहक शिकायतों और चौथी आवंटियों व रियल एस्टेट एजेंट से संपर्क के लिए होंगे। प्रोजेक्ट का नाम वही रखना होगा, जो स्वीकृत नक्शा में है।
अपंजीकृत प्रोजेक्ट की भी कर सकते शिकायत
अफसरों ने बताया कि अगर कोई प्रोजेक्ट पंजीकृत नहीं है तो भी खरीदार यूपी रेरा में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। अगर परिवार के किसी सदस्य को फ्लैट ट्रांसफर करना है तो केवल 1,000 रुपये और परिवार के बाहर के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने पर अधिकतम 25,000 शुल्क देना होगा। अफसरों ने बताया कि बिल्डर व एजेंट को विज्ञापन में प्रोजेक्ट पंजीकरण, वेबसाइट, क्यूआर कोड, लांच की तारीख और कलेक्शन अकाउंट की जानकारी देना जरूरी है। अफसरों ने बताया कि पंजीकरण कब वापस किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसी दूसरे प्रमोटर को दी जा सकती है, यह स्पष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आईएफएमएस की रकम प्रोजेक्ट के क्षेत्रफल और रखरखाव की जरूरत के हिसाब से तय होगी और रियल एस्टेट एजेंटों का प्रशिक्षण भी जरूरी कर दिया गया है।
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-एक साल में बदले 12 नियम, बिल्डरों की मनमानी पर शिकंजा
-1000 रुपये शुल्क लगेगा परिवार के किसी सदस्य को फ्लैट ट्रांसफर करने में
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण(यूपी रेरा) ने एक साल में 12 नियमों को बदल दिया, ताकि बिल्डरों की मनमानी पर शिकंजा कसा जा सके। सभी बदलाव की जानकारी रेरा ने अपनी वेबसाइट पर अपडेट कर दी है, ताकि खरीदारों व बिल्डरों को उसकी जानकारी हो सके। रेरा के अफसरों का कहना है कि अब हर प्रोजेक्ट में बिल्डरों को बताना होगा कि उनमें कौन-कौन जिम्मेदार पदाधिकारी हैं।
बिल्डर को अब प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट की जानकारी देनी होगी। ग्राहक से संपर्क के लिए कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर और एक संपर्क या टोल-फ्री नंबर भी देना होगा। उन्हें नियमित अंतराल पर रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रोफाइल भी अपडेट करनी होगी। इसके अलावा बिल्डर को चार ई-मेल का प्रयोग करना होगा। इनमें से एक प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, दूसरी प्रशासनिक काम, तीसरी ग्राहक शिकायतों और चौथी आवंटियों व रियल एस्टेट एजेंट से संपर्क के लिए होंगे। प्रोजेक्ट का नाम वही रखना होगा, जो स्वीकृत नक्शा में है।
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अपंजीकृत प्रोजेक्ट की भी कर सकते शिकायत
अफसरों ने बताया कि अगर कोई प्रोजेक्ट पंजीकृत नहीं है तो भी खरीदार यूपी रेरा में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। अगर परिवार के किसी सदस्य को फ्लैट ट्रांसफर करना है तो केवल 1,000 रुपये और परिवार के बाहर के व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने पर अधिकतम 25,000 शुल्क देना होगा। अफसरों ने बताया कि बिल्डर व एजेंट को विज्ञापन में प्रोजेक्ट पंजीकरण, वेबसाइट, क्यूआर कोड, लांच की तारीख और कलेक्शन अकाउंट की जानकारी देना जरूरी है। अफसरों ने बताया कि पंजीकरण कब वापस किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी किसी दूसरे प्रमोटर को दी जा सकती है, यह स्पष्ट कर दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि आईएफएमएस की रकम प्रोजेक्ट के क्षेत्रफल और रखरखाव की जरूरत के हिसाब से तय होगी और रियल एस्टेट एजेंटों का प्रशिक्षण भी जरूरी कर दिया गया है।
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