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Noida News: बिना चीरा लगाए खत्म हो गई स्तन की गांठ
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संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान।
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लखनऊ। स्तन में पड़ी गांठ निकलवाने के लिए अब सर्जरी ही एकमात्र विकल्प नहीं है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) तकनीक से बिना चीरा लगाए यह खत्म की जा सकती है। संजय गांधी पीजीआई में 21 वर्षीय युवती के स्तन में हुई गांठ इसी तकनीक से निकाली गई। इस सफल प्रक्रिया को जर्नल ऑफ क्लीनिकल इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के ताजा अंक में स्थान मिला है।
पीजीआई में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की डॉ. अस्मिता, डॉ. अविनाश डी. गौतम, प्रो. अर्चना गुप्ता और इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सबरत्नम मयिलवगनन ने यह प्रक्रिया की। डॉक्टरों ने बताया कि युवती को बाएं स्तन में बिना दर्द के पानी आने की समस्या हुई। इसके बाद उसे बेचैनी महसूस होने लगी। जांच करने पर स्तन में पांच गुणा चार सेंटीमीटर आकार की गांठ निकली। चिकित्सीय भाषा में इसे स्यूडोएंजियोमैटस स्ट्रोमल हाइपरप्लासिया (पीएएसएच) कहा जाता है। यह गांठ अंदर की मांसपेशियों से चिपकी नहीं थी। युवती को गांठ निकलवाने के लिए सामान्य सर्जरी के साथ ही आरएफए का विकल्प दिया गया। युवती ने सामान्य सर्जरी में स्तन पर निशान पड़ने की आशंका के कारण आरएफए का चयन किया।
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नहीं रहता है जलने या कटने का निशान
आरएफए तकनीक में मशीन से कुछ सुइयां जुड़ी होती हैं, जिन्हें रेडियोफ्रीक्वेंसी के माध्यम से गर्म किया जाता है। इस मामले में युवती को पीठ के बल लिटाकर सुइयां गांठ वाले स्थान में चुभोई गईं। इससे पहले उसे एनेस्थीसिया दी गई। अल्ट्रासाउंड के माध्यम से देखा कि सुइयां शरीर में कहां जा रही हैं। गांठ तक पहुंचने के बाद रेडियोफ्रीक्वेंसी के माध्यम से सुइयां गर्म की गईं। इसके चलते गांठ के केंद्र का तापमान 65 से 95 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। उच्चतम तापमान पर पहुंचते ही मशीन अपने आप बंद हो जाती है। आरएफए से कुछ समय तक सूजन और दर्द रहा, जिसे दवाओं के माध्यम से खत्म किया गया। जिस स्थान पर प्रक्रिया की गई, वहां की त्वचा पर जलने या चोट लगने का कोई निशान नहीं रहा। प्रक्रिया के तुरंत बाद गांठ का आकार कुछ बड़ा हुआ दिखाई दिया, जो उसके नष्ट होने का संकेत होता है। कुछ समय के बाद सूजन और गांठ दोनों गायब हो गए।
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6,600 रुपये है फीस
आरएफए तकनीक से इलाज कराने में खर्च भी कम आता है। मशीन के माध्यम से प्रक्रिया कराने की फीस सिर्फ 6,600 रुपये है। अस्पताल में भर्ती और दवाओं का खर्च अतिरिक्त होता है। स्तन पर किसी प्रकार का निशान न पड़ने से यह तकनीक ज्यादा कारगर है। हालांकि, बहुत बड़ी गांठ के मामले में आरएफए तकनीक उतनी प्रभावी नहीं होती है।
पीजीआई में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की डॉ. अस्मिता, डॉ. अविनाश डी. गौतम, प्रो. अर्चना गुप्ता और इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के सबरत्नम मयिलवगनन ने यह प्रक्रिया की। डॉक्टरों ने बताया कि युवती को बाएं स्तन में बिना दर्द के पानी आने की समस्या हुई। इसके बाद उसे बेचैनी महसूस होने लगी। जांच करने पर स्तन में पांच गुणा चार सेंटीमीटर आकार की गांठ निकली। चिकित्सीय भाषा में इसे स्यूडोएंजियोमैटस स्ट्रोमल हाइपरप्लासिया (पीएएसएच) कहा जाता है। यह गांठ अंदर की मांसपेशियों से चिपकी नहीं थी। युवती को गांठ निकलवाने के लिए सामान्य सर्जरी के साथ ही आरएफए का विकल्प दिया गया। युवती ने सामान्य सर्जरी में स्तन पर निशान पड़ने की आशंका के कारण आरएफए का चयन किया।
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नहीं रहता है जलने या कटने का निशान
आरएफए तकनीक में मशीन से कुछ सुइयां जुड़ी होती हैं, जिन्हें रेडियोफ्रीक्वेंसी के माध्यम से गर्म किया जाता है। इस मामले में युवती को पीठ के बल लिटाकर सुइयां गांठ वाले स्थान में चुभोई गईं। इससे पहले उसे एनेस्थीसिया दी गई। अल्ट्रासाउंड के माध्यम से देखा कि सुइयां शरीर में कहां जा रही हैं। गांठ तक पहुंचने के बाद रेडियोफ्रीक्वेंसी के माध्यम से सुइयां गर्म की गईं। इसके चलते गांठ के केंद्र का तापमान 65 से 95 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। उच्चतम तापमान पर पहुंचते ही मशीन अपने आप बंद हो जाती है। आरएफए से कुछ समय तक सूजन और दर्द रहा, जिसे दवाओं के माध्यम से खत्म किया गया। जिस स्थान पर प्रक्रिया की गई, वहां की त्वचा पर जलने या चोट लगने का कोई निशान नहीं रहा। प्रक्रिया के तुरंत बाद गांठ का आकार कुछ बड़ा हुआ दिखाई दिया, जो उसके नष्ट होने का संकेत होता है। कुछ समय के बाद सूजन और गांठ दोनों गायब हो गए।
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6,600 रुपये है फीस
आरएफए तकनीक से इलाज कराने में खर्च भी कम आता है। मशीन के माध्यम से प्रक्रिया कराने की फीस सिर्फ 6,600 रुपये है। अस्पताल में भर्ती और दवाओं का खर्च अतिरिक्त होता है। स्तन पर किसी प्रकार का निशान न पड़ने से यह तकनीक ज्यादा कारगर है। हालांकि, बहुत बड़ी गांठ के मामले में आरएफए तकनीक उतनी प्रभावी नहीं होती है।