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बीआरडी : मरीज को हाथों से उठाकर ओपीडी में ले गए तीमारदार
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मरीज को हाथों में लेकर दौड़ते रहे तीमारदार
- मेडिकल प्रशासन का दावा- स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर्याप्त, लोग नहीं उठा पा रहे सुविधा
- इमरजेंसी की तरफ बने काउंटर से आधार कार्ड जमाकर ले सकते हैं सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को मरीज को हाथों से उठाकर तीमारदार ओपीडी में जाते दिखे तो लोग चौंक उठे। सबने बीआरडी प्रशासन को सुविधा उपलब्ध न कराने पर खूब कोसा। हालांकि बीआरडी प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर मौजूद है।
बृहस्पतिवार दोपहर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं की पोल खोलता हुआ दृश्य दिखा। भटहट के डुमरी बॉसस्थान के रहने वाले 65 वर्षीय छांगुर को तेज सांस की तकलीफ के कारण परिजन, डॉक्टर को दिखाने के लिए पहुंचे थे। छांगुर चलने में सक्षम नहीं थे। परिजनों ने बताया कि ओपीडी में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की तलाश की गई लेकिन नहीं मिला। इसके बाद छांगुर को हाथों से उठाकर ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के लिए ले गए। छांगुर के बेटे राजकुमार ने बताया गया कि सुविधा कहां से मिलेगी, इसकी जानकारी के अभाव में वह ओपीडी में काफी देर स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की तलाश करते रहे। डॉक्टर को दिखाने की जल्दी थी इसलिए हाथों से उठाकर पिता को ले गए।
इस संबंध में बीआरडी प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर है। इमरजेंसी की तरफ काउंटर बनाया गया है और एक स्टाफ की तैनाती की गई है। परिजनों को काउंटर की जानकारी नहीं रही होगी। अगर किसी स्टाफ से पूछ लेते तो वह उन्हें बता देता। हालांकि मामले को दिखवाया जाएगा।
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- इमरजेंसी की तरफ बने काउंटर से आधार कार्ड जमाकर ले सकते हैं सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार को मरीज को हाथों से उठाकर तीमारदार ओपीडी में जाते दिखे तो लोग चौंक उठे। सबने बीआरडी प्रशासन को सुविधा उपलब्ध न कराने पर खूब कोसा। हालांकि बीआरडी प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर मौजूद है।
बृहस्पतिवार दोपहर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं की पोल खोलता हुआ दृश्य दिखा। भटहट के डुमरी बॉसस्थान के रहने वाले 65 वर्षीय छांगुर को तेज सांस की तकलीफ के कारण परिजन, डॉक्टर को दिखाने के लिए पहुंचे थे। छांगुर चलने में सक्षम नहीं थे। परिजनों ने बताया कि ओपीडी में स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की तलाश की गई लेकिन नहीं मिला। इसके बाद छांगुर को हाथों से उठाकर ओपीडी में डॉक्टरों को दिखाने के लिए ले गए। छांगुर के बेटे राजकुमार ने बताया गया कि सुविधा कहां से मिलेगी, इसकी जानकारी के अभाव में वह ओपीडी में काफी देर स्ट्रेचर-व्हीलचेयर की तलाश करते रहे। डॉक्टर को दिखाने की जल्दी थी इसलिए हाथों से उठाकर पिता को ले गए।
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इस संबंध में बीआरडी प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर है। इमरजेंसी की तरफ काउंटर बनाया गया है और एक स्टाफ की तैनाती की गई है। परिजनों को काउंटर की जानकारी नहीं रही होगी। अगर किसी स्टाफ से पूछ लेते तो वह उन्हें बता देता। हालांकि मामले को दिखवाया जाएगा।
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