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दोनों बेटे यूक्रेन में फंसे, पूरा परिवार परेशान
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पुन्हाना। रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण फंसे मेवात के करीब 70-80 बच्चों के परिजन अपने लाडलों की सुरक्षा को लेकर खासे परेशान हैं। मांडीखेड़ा के सरकारी स्कूल के अध्यापक के दो बेटे यूक्रेन में पढ़ने गए थे। युद्ध की आशंका में उन्होंने दोनों बेटों के टिकट के लिए दो भैंसें बेचकर पैसा जमा किया। वह बच्चों को वापस लाने की तैयारी में थे, इसी बीच एयर इंडिया ने किराया बढ़ा दिया। जिससे अभिभावक परेशान हो गए। किराया बढ़ने पर परिवारवालों ने एयर इंडिया पर नाराजगी जताई। इसी बीच धमाके होने से हवाई सेवाएं रद्द हो गईं। अब दोनों बेटे यूक्रेन में फंसे हैं और परिजन यहां उनकी सकुशल वापसी की दुआएं कर रहे हैं।
नूंह जिला के गांव मांडीखेड़ा निवासी उसमान ने बताया कि वह सरकारी स्कूल में अध्यापक है। उसके पांच बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटे यूक्रेन की उजहोर्ट नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा मोहसिन आजम का एमबीबीएस में पांचवां साल है। छोटे बेटे मोइन खान का पहला साल है। उनके बच्चे यूक्रेन की राजधानी से करीब 1100 किलोमीटर दूर यूनिवर्सिटी में पढ़ते है। वहां अभी शांति है, लेकिन पूरा परिवार परेशान है।
मां असगरी ने बताया कि उसके दोनों बेटे यूक्रेन में है। जब तक दोनों वापस नहीं आ जाते उन्हें नींद नहीं आएगी। वह हर समय दुका करती हैं कि उनके बेटों के साथ-साथ अन्य सभी बेटे-बेटियां सकुशल घर आ जाएं। बहन नजमा का कहना है कि उसके दो ही भाई हैं। पूरा परिवार उनकी जल्द वापसी की दुआ कर रहा है। गांव के लोग भी मास्टर उसमान के बच्चों के लिए परेशान हैं।
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वहीं पुन्हाना खंड के गांव मढ़ियाकी गांव के दो बच्चे वाजिद, मोहिन, सलंबा गांव के मोहम्मद अरबाज और बिछोर गांव का छात्र भी एक सहित नूंह जिला के करीब 70-80 बच्चे यूक्रेन में फंसें है।
24 फरवरी को लौटना था, धमाकों ने रोका
नूंह के नई गांव के मोहम्मद इरशाद पिछले चार साल से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। गत 24 फरवरी को भारत आने का फ्लाइट का टिकट था। उसी दौरान एयरपोर्ट पर ब्लास्टिंग की वजह से हवाई अड्डा बंद हो गया था। अचानक हवाई जहाज की उड़ान बंद हो गई और वह फंस गए। मदद के लिए भारतीय एंबेसी गए थे। उन्हें एलएसी के नजदीक प्राइवेट स्कूल में रखा गया है। जिसमें मेवात के 10 बच्चे मौजूद हैं। कुछ बच्चे मेट्रो बेसमेंट तो कुछ कॉलेज में फंसे हुए हैं।
नहीं उठ रहा हेल्मलाइन नंबर
सरकार ने मदद के लिए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी जारी की थी, लेकिन अभी तक लोगों को उससे कोई मदद नहीं मिली है। इतना नहीं सरकार ने मदद के लिए जो व्हाट्सएप नंबर दिया था, उसको कोई उठाने को तैयार नहीं है। जिससे सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। परिवार के लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विदेश मंत्री से अपने बच्चों को वतन लाने की मांग की है।
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नूंह जिला के गांव मांडीखेड़ा निवासी उसमान ने बताया कि वह सरकारी स्कूल में अध्यापक है। उसके पांच बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटे यूक्रेन की उजहोर्ट नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा मोहसिन आजम का एमबीबीएस में पांचवां साल है। छोटे बेटे मोइन खान का पहला साल है। उनके बच्चे यूक्रेन की राजधानी से करीब 1100 किलोमीटर दूर यूनिवर्सिटी में पढ़ते है। वहां अभी शांति है, लेकिन पूरा परिवार परेशान है।
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मां असगरी ने बताया कि उसके दोनों बेटे यूक्रेन में है। जब तक दोनों वापस नहीं आ जाते उन्हें नींद नहीं आएगी। वह हर समय दुका करती हैं कि उनके बेटों के साथ-साथ अन्य सभी बेटे-बेटियां सकुशल घर आ जाएं। बहन नजमा का कहना है कि उसके दो ही भाई हैं। पूरा परिवार उनकी जल्द वापसी की दुआ कर रहा है। गांव के लोग भी मास्टर उसमान के बच्चों के लिए परेशान हैं।
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वहीं पुन्हाना खंड के गांव मढ़ियाकी गांव के दो बच्चे वाजिद, मोहिन, सलंबा गांव के मोहम्मद अरबाज और बिछोर गांव का छात्र भी एक सहित नूंह जिला के करीब 70-80 बच्चे यूक्रेन में फंसें है।
24 फरवरी को लौटना था, धमाकों ने रोका
नूंह के नई गांव के मोहम्मद इरशाद पिछले चार साल से यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। गत 24 फरवरी को भारत आने का फ्लाइट का टिकट था। उसी दौरान एयरपोर्ट पर ब्लास्टिंग की वजह से हवाई अड्डा बंद हो गया था। अचानक हवाई जहाज की उड़ान बंद हो गई और वह फंस गए। मदद के लिए भारतीय एंबेसी गए थे। उन्हें एलएसी के नजदीक प्राइवेट स्कूल में रखा गया है। जिसमें मेवात के 10 बच्चे मौजूद हैं। कुछ बच्चे मेट्रो बेसमेंट तो कुछ कॉलेज में फंसे हुए हैं।
नहीं उठ रहा हेल्मलाइन नंबर
सरकार ने मदद के लिए मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी जारी की थी, लेकिन अभी तक लोगों को उससे कोई मदद नहीं मिली है। इतना नहीं सरकार ने मदद के लिए जो व्हाट्सएप नंबर दिया था, उसको कोई उठाने को तैयार नहीं है। जिससे सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। परिवार के लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, विदेश मंत्री से अपने बच्चों को वतन लाने की मांग की है।