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मकान का रुपया ठगा, डीपीएस में से निकाल सरकारी स्कूल में भर्ती कराये बच्चे

Wed, 26 Feb 2020 01:33 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2020 01:33 AM IST
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Bike Boat Fraud : dream of house broken, children admitted in goverment school from DPS
मकान का सपना टूटा, बच्चे डीपीएस से सरकारी स्कूल पहुंचे
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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े में रुपया फंसाने वाले निवेशक एक के बाद एक अपना दर्द बयां कर रहे हैं। जेवर निवासी राजकुमार अप्रैल 2018 में फौज से सेवानिवृत्त हुए थे। नौकरी के बाद मिले रुपयों से उन्होंने मकान बनाने का ख्वाब देखा था। उसके बच्चे बुलंदशहर डीपीएस में पढ़ रहे थे। लेकिन, फर्जीवाड़े में फंसकर उसने अपना 24 लाख से अधिक और करीबी, रिश्तेदार समेत अन्य फौजियों का भी 35 लाख रुपया बाइक बोट कंपनी में लगा दिया। इसके बाद उस पर ऐसा संकट आया कि मकान बनाने का ख्वाब तो टूट ही गया। साथ ही उसे अपनी बेटी और बेटे को डीपीएस से निकालकर सरकारी स्कूल में भर्ती कराना पड़ा। हालत यह है कि काम और निवेश किए गए रुपयों के लिए वह भटक रहा है।
राजकुमार ने बताया कि अप्रैल 2018 में सेवानिवृत्त होने के बाद एक अन्य फौजी साथी से बाइक बोट कंपनी की जानकारी हुई थी। उस समय वह जेवर में परिवार के लिए अच्छा मकान बनवाने की सोच रहा था। कंपनी की जानकारी होने पर उसने सोचा कि अगर रुपया कुछ महीनों में अधिक हो जाएगा तो और अच्छा मकान बनाएगा। इसके कारण शुरुआत में उसने कंपनी में 3.10 लाख रुपये लगाए। उसने एक प्लॉट के लिए 10 लाख रुपये का बैंक से लोन भी ले लिया। इसके बाद सितंबर में उसे सेवानिवृत्ति का रुपया मिल गया। इसी दौरान बाइक बोट के पदाधिकारियों ने उसे बैठक में बुलाकर कहा कि कंपनी ये योजना केवल दिसंबर तक चलाएगी। ऐसे में अभी वह और रुपया लगा सकता है। आरोपियों ने अधिक रुपया लगाने पर ऑल्टो कार देने का झांसा भी दिया था। राजकुमार ने सेवानिवृत्ति से मिले 21 लाख से अधिक रुपये लगा दिए। वहीं, अपने रिश्तेदार और करीबियों से भी 35 लाख से अधिक रुपया कंपनी में निवेश करवा दिया। इसके बाद आरोपियों ने एक भी किस्त नहीं दी। पैसे फंसने के कारण रिश्तेदारों व करीबियों से उसके संबंध खराब हो गए। वह रुपया वापस दिलाने की मांग करने लगे। आर्थिक संकट के चलते उसका मकान बनाने का ख्वाब टूट गया और उसने अपनी बड़ी बेटी और छोटे बेटे को डीपीएस से निकालकर सरकारी स्कूल में भर्ती करा दिया।
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परिवार समेत पहुंचने पर आरोपियों ने की मारपीट
राजकुमार ने बताया कि आरोपियों ने कोट गांव स्थित मुख्य दफ्तर को बंद कर दिया और संजय भाटी के चीती गांव में ही कार्यालय बना लिया था। अप्रैल 2019 में वह रुपये वापसी की मांग को लेकर परिवार के साथ चीती गांव पहुंचा था। वहां आरोपियों परिवार से अभद्रता और उससे मारपीट की। इसकी शिकायत दनकौर पुलिस को देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब, पीड़ित नौकरी की तलाश और रुपये वापसी की मांग को लेकर कोट गांव में अन्य निवेशकों के साथ धरने पर बैठता है।
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