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बिहार चुनाव : प्रतिनिधियों का रिपोर्ट कार्ड और जाति बनेगी मतदान का आधार
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- चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं का भी दिखेगा असर
-पलायन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य होंगे प्रमुख मुद्दे
-दिल्ली में रह रहे बिहार के लोगों ने जाहिर की अपनी मंशा
फिरदौस आलम
नई दिल्ली। बिहार चुनाव में इस बार प्रतिनिधियों का रिपोर्ट कार्ड और उनकी जाति मतदान का मुख्य आधार रहेगा। वर्तमान सरकार की ओर से चुनाव से पहले घोषित की गई फ्री की योजनाएं मतदाताओं पर असर डालेंगी। दिल्ली में रह रहे बिहार के मतदाताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने रुझान जाहिर किए हैं। उनका कहना है कि इस बार का चुनाव महज पार्टी के लहर पर आधारित नहीं होगा, बल्कि मतदाता पलायन, रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवार चुनेंगे।
वह इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि उनके स्थानीय प्रतिनिधियों ने पिछले कार्यकाल में सड़क, बिजली, स्कूल और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कितना कार्य किया है। मतदाताओं के लिए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड और उसकी छवि निर्णायक भूमिका निभाएंगी। हालांकि, कुछ मतदाताओं का कहना है कि अब भी वह पार्टी की विचारधारा और उनके शीर्ष नेतृत्व को ध्यान में रखेंगे। उनका कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के बजाय सिर्फ पार्टी के नाम पर ही वोट करेंगे।
जानकारों का कहना है कि इस बार के चुनाव में कांटे की टक्कर होगी। इनमें बीजेपी, कांग्रेस, राजद, जदयू, जनसुराज और वामपंथी दल समेत अन्य प्रमुख दल ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। उनका कहना है कि किसी भी एक पार्टी या गठबंधन के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, कुछ वोटर ऐसे भी हैं कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि पार्टी और उनके प्रतिनिधियों ने विकास कार्य किया है या नहीं। वह सिर्फ इस बात पर मतदान करेंगे कि उनके प्रतिनिधि उनकी पसंदीदा पार्टी और उनकी जाति के हैं।
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लोगों से बातचीत:
इस बार चुनाव में पलायन और नौकरी सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए मतदान किया जाएगा। बिहार में पलायन और बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्याएं हैं। -
- गौतम यादव, पटना निवासी।
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चुनाव में जाति की जगह विकास का मुद्दा अहम होना चाहिए, लेकिन मतदाता अपने जाति के लोगों को वोट देने पर विश्वास रखते हैं। इस बार मैं शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखूंगा। -
- गोविंद राज, जहानाबाद।
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इस बार चुनाव में जाति-धर्म से हटकर मतदान करना चाहिए। जाति-धर्म से बिहार का विकास नहीं होने वाला। बिहार को विकसित करने के लिए विकास के मुद्दे पर मतदान करना चाहिए। -
- आमिर हमजा, दरभंगा।
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इस बार चुनाव में सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, सड़क, बिजली और योजनाएं सबसे बड़ा मुद्दा है। यही मतदाताओं को लुभाएगा। इसी को ध्यान में रखकर मतदान किया जाएगा। -
- अभय सिंहा, दरौली।
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-पलायन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य होंगे प्रमुख मुद्दे
-दिल्ली में रह रहे बिहार के लोगों ने जाहिर की अपनी मंशा
फिरदौस आलम
नई दिल्ली। बिहार चुनाव में इस बार प्रतिनिधियों का रिपोर्ट कार्ड और उनकी जाति मतदान का मुख्य आधार रहेगा। वर्तमान सरकार की ओर से चुनाव से पहले घोषित की गई फ्री की योजनाएं मतदाताओं पर असर डालेंगी। दिल्ली में रह रहे बिहार के मतदाताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपने रुझान जाहिर किए हैं। उनका कहना है कि इस बार का चुनाव महज पार्टी के लहर पर आधारित नहीं होगा, बल्कि मतदाता पलायन, रोजगार, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवार चुनेंगे।
वह इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि उनके स्थानीय प्रतिनिधियों ने पिछले कार्यकाल में सड़क, बिजली, स्कूल और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कितना कार्य किया है। मतदाताओं के लिए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड और उसकी छवि निर्णायक भूमिका निभाएंगी। हालांकि, कुछ मतदाताओं का कहना है कि अब भी वह पार्टी की विचारधारा और उनके शीर्ष नेतृत्व को ध्यान में रखेंगे। उनका कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष के बजाय सिर्फ पार्टी के नाम पर ही वोट करेंगे।
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जानकारों का कहना है कि इस बार के चुनाव में कांटे की टक्कर होगी। इनमें बीजेपी, कांग्रेस, राजद, जदयू, जनसुराज और वामपंथी दल समेत अन्य प्रमुख दल ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। उनका कहना है कि किसी भी एक पार्टी या गठबंधन के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, कुछ वोटर ऐसे भी हैं कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि पार्टी और उनके प्रतिनिधियों ने विकास कार्य किया है या नहीं। वह सिर्फ इस बात पर मतदान करेंगे कि उनके प्रतिनिधि उनकी पसंदीदा पार्टी और उनकी जाति के हैं।
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लोगों से बातचीत:
इस बार चुनाव में पलायन और नौकरी सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए मतदान किया जाएगा। बिहार में पलायन और बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्याएं हैं। -
- गौतम यादव, पटना निवासी।
चुनाव में जाति की जगह विकास का मुद्दा अहम होना चाहिए, लेकिन मतदाता अपने जाति के लोगों को वोट देने पर विश्वास रखते हैं। इस बार मैं शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखूंगा। -
- गोविंद राज, जहानाबाद।
इस बार चुनाव में जाति-धर्म से हटकर मतदान करना चाहिए। जाति-धर्म से बिहार का विकास नहीं होने वाला। बिहार को विकसित करने के लिए विकास के मुद्दे पर मतदान करना चाहिए। -
- आमिर हमजा, दरभंगा।
इस बार चुनाव में सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, सड़क, बिजली और योजनाएं सबसे बड़ा मुद्दा है। यही मतदाताओं को लुभाएगा। इसी को ध्यान में रखकर मतदान किया जाएगा। -
- अभय सिंहा, दरौली।