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Noida News: फिर जीवंत होंगी सदियों पुरानी परंपरा, रागनी, दंगल से गुलजार होगा बराही मेला
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- मेले में दिखेगा ग्रामीण जीवन का रंग, खाट, हुक्का और चक्की का संग
-1 से 13 अप्रैल तक होगा आयोजन, हवन-पूजन के साथ होगा शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सदियों पुरानी आस्था, लोकसंस्कृति की रंगीन छटा और ग्रामीण जीवन की सोंधी खुशबू, इन सबका अद्भुत संगम एक बार फिर सूरजपुर में देखने को मिलने वाला है। 1 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने जा रहा प्रसिद्ध बाराही मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव भी है। जैसे ही मेले की तैयारियां तेज होती हैं, पूरे इलाके में उत्साह की लहर दौड़ जाती है, मानो इतिहास फिर से जीवंत होने जा रहा हो।
इस मेले की खासियत इसकी विविधता में छिपी है। यहां पारंपरिक रागनी गायन की मधुर गूंज लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है, तो वहीं दंगल के अखाड़ों में पहलवानों का जोश और दम-खम दर्शकों में रोमांच भर देता है। नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां और कुश्ती प्रतियोगिताएं मेले को खास आकर्षण प्रदान करती हैं, जिससे यह आयोजन हर वर्ग के लोगों के लिए मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
बाराही मेले की पहचान केवल इसके सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहरी धार्मिक मान्यताएं भी इसे विशेष बनाती हैं। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं और प्राचीन तालाब में स्नान कर रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र जल में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं, जो इस मेले की आस्था को और भी गहरा बनाता है। बता दें यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है। जो पीढ़ियों से लोगों को जोड़ती आ रही है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देती है।
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लोक गायन, राजस्थानी लोक कला, गीत संगीत की रहेगी धूम : शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने बताया कि मेले में देशभर की सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुति होगी। खासतौर पर रागनी गायकों के कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके अलावा मेले में कुश्ती प्रतियोगिता और लोक नृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि मेले का शुभारंभ 1 अप्रैल को सुबह 10 बजे हवन-पूजन के साथ किया जाएगा। मेले में इस वर्ष भी लोगों को ग्रामीण जन जीवन पर आधारित दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे सबसे बड़ी खाट यानी चारपाई, हुक्का, पीढा, रई, आटा चक्की हाथ वाली, बैलगाड़ी के अलावा यहां की चौपाल पर खासा आकर्षण का केंद्र होंगी। वहीं, लोक गायन के कला रूप में रागनी और राजस्थानी लोक कला, गीत संगीत और नृत्य भी प्रस्तुति होगी। साथ ही मौत का कुआ, सर्कस, झूले, जादूगर शो, कठपुतली, नटकला आदि खेल तमाशे लोगो का मनोरंजन करेंगे।
दूर होते है चर्म रोग:
मीडिया प्रभारी ने बताया कि इस बार लगने वाले बाराही मेला-2026 की तैयारियां पूरे जोर शोर से शुरू कर दी गई है। यहां पर बने प्राचीनकालीन तालाब में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। दूर-दूर से यहां लोग स्नान करने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से मेले में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।
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-1 से 13 अप्रैल तक होगा आयोजन, हवन-पूजन के साथ होगा शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। सदियों पुरानी आस्था, लोकसंस्कृति की रंगीन छटा और ग्रामीण जीवन की सोंधी खुशबू, इन सबका अद्भुत संगम एक बार फिर सूरजपुर में देखने को मिलने वाला है। 1 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने जा रहा प्रसिद्ध बाराही मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव भी है। जैसे ही मेले की तैयारियां तेज होती हैं, पूरे इलाके में उत्साह की लहर दौड़ जाती है, मानो इतिहास फिर से जीवंत होने जा रहा हो।
इस मेले की खासियत इसकी विविधता में छिपी है। यहां पारंपरिक रागनी गायन की मधुर गूंज लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है, तो वहीं दंगल के अखाड़ों में पहलवानों का जोश और दम-खम दर्शकों में रोमांच भर देता है। नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां और कुश्ती प्रतियोगिताएं मेले को खास आकर्षण प्रदान करती हैं, जिससे यह आयोजन हर वर्ग के लोगों के लिए मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बन जाता है।
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बाराही मेले की पहचान केवल इसके सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी गहरी धार्मिक मान्यताएं भी इसे विशेष बनाती हैं। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु मंदिर में दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं और प्राचीन तालाब में स्नान कर रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र जल में स्नान करने से चर्म रोग दूर होते हैं, जो इस मेले की आस्था को और भी गहरा बनाता है। बता दें यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है। जो पीढ़ियों से लोगों को जोड़ती आ रही है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर देती है।
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लोक गायन, राजस्थानी लोक कला, गीत संगीत की रहेगी धूम : शिव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष धर्मपाल भाटी ने बताया कि मेले में देशभर की सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रस्तुति होगी। खासतौर पर रागनी गायकों के कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके अलावा मेले में कुश्ती प्रतियोगिता और लोक नृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि मेले का शुभारंभ 1 अप्रैल को सुबह 10 बजे हवन-पूजन के साथ किया जाएगा। मेले में इस वर्ष भी लोगों को ग्रामीण जन जीवन पर आधारित दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे सबसे बड़ी खाट यानी चारपाई, हुक्का, पीढा, रई, आटा चक्की हाथ वाली, बैलगाड़ी के अलावा यहां की चौपाल पर खासा आकर्षण का केंद्र होंगी। वहीं, लोक गायन के कला रूप में रागनी और राजस्थानी लोक कला, गीत संगीत और नृत्य भी प्रस्तुति होगी। साथ ही मौत का कुआ, सर्कस, झूले, जादूगर शो, कठपुतली, नटकला आदि खेल तमाशे लोगो का मनोरंजन करेंगे।
दूर होते है चर्म रोग:
मीडिया प्रभारी ने बताया कि इस बार लगने वाले बाराही मेला-2026 की तैयारियां पूरे जोर शोर से शुरू कर दी गई है। यहां पर बने प्राचीनकालीन तालाब में स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। दूर-दूर से यहां लोग स्नान करने के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से मेले में भारी पुलिस बल तैनात रहेगा।