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Noida News: एनसीएलएटी में भी दिवालिया प्रक्रिया रद्द
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-लॉजिक्स ब्लॉसम काउंटी सोसाइटी के बिल्डर को चुकाना होगा बकाया
-छह महीने पहले एनसीएलटी ने भी याचिका को कर दिया गया था रद्द
-निर्णय के बाद घर खरीदारों को मिल सकेगा घर का मालिकाना हक
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। लॉजिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ घर खरीदारों की बड़ी जीत हुई है। सोसाइटी के बिल्डर की ओर से नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में दायर की गई याचिका को भी खारिज कर दिया गया है। ऐसे में सोसाइटी के फ्लैट खरीदारों को अपने ही घर का मालिकाना हक मिल सकेगा और बिल्डर नोएडा प्राधिकरण का बकाया चुकाने से बच नहीं सकेगा। छह महीने पहले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की ओर से भी बिल्डर की ओर से दायर याचिका को रद्द कर दिया गया था।
लॉजिक्स ब्लॉसम काउंटी सोसाइटी के एओए अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने बताया कि एनसीएलटी से याचिका रद्द होने के बाद बिल्डर और उसके सहयोगियों की ओर से एनसीएलटी के ऑर्डर को रिव्यू करवाने के लिए एनसीएलएटी में याचिका दायर की गई थी, जिसे एनसीएलएटी की ओर से भी खारिज कर दिया गया। इससे लॉजिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के फ्लैट खरीदारों को लंबे संघर्ष के बाद बड़ी जीत मिली है। एनसीएलटी और एनसीएलएटी ने बिल्डर और उसके सहयोगियों द्वारा दायर की गई दिवाला और सीआईआरपी कार्रवाई को सिरे से खारिज कर दिया है। बिल्डर नोएडा प्राधिकरण के बकाये से बचने, फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री और कब्जे के उनके अधिकार से वंचित करने के लिए यह कर रहा था। फ्लैट खरीदारों की ओर से प्रस्तुत की गई ठोस दलीलों और प्रस्तुतियों के आधार पर न्यायाधिकरणों ने बिल्डर को जिम्मेदार और पुनः स्थापित कर दिया है।
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कोर्ट में भी चल रहा है मामला
मनोज ने बताया कि हमने हाईकोर्ट में भी एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें सोसाइटी के फ्लैट की रजिस्ट्री और टावरों के लिए आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) की मांग की है। याचिका में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि फ्लैट खरीदारों की कोई गलती नहीं है। यह बिल्डर का डिफॉल्ट है जिसने खरीदारों से पूरा पैसा और एकमुश्त लीज डीड शुल्क लिया लेकिन प्राधिकरण को भुगतान नहीं किया। नोएडा प्राधिकरण ने लीज डीड के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में अगस्त 2025 में सुनवाई हुई है जिसमें कोर्ट ने बिल्डर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
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10 साल में सिर्फ 500 फ्लैट की रजिस्ट्री
सोसाइटी में 2015 से लोगों ने रहना शुरू कर दिया है और यहां पर कुल 2381 फ्लैट हैं जिसमें अबतक महज 500 फ्लैट की रजिस्ट्री हुई है और 17 टावरों में सिर्फ 10 टावरों की ओसी आई है और सात टावरों की ओसी नहीं जारी हुई है।
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-छह महीने पहले एनसीएलटी ने भी याचिका को कर दिया गया था रद्द
-निर्णय के बाद घर खरीदारों को मिल सकेगा घर का मालिकाना हक
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। लॉजिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ घर खरीदारों की बड़ी जीत हुई है। सोसाइटी के बिल्डर की ओर से नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) में दायर की गई याचिका को भी खारिज कर दिया गया है। ऐसे में सोसाइटी के फ्लैट खरीदारों को अपने ही घर का मालिकाना हक मिल सकेगा और बिल्डर नोएडा प्राधिकरण का बकाया चुकाने से बच नहीं सकेगा। छह महीने पहले नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की ओर से भी बिल्डर की ओर से दायर याचिका को रद्द कर दिया गया था।
लॉजिक्स ब्लॉसम काउंटी सोसाइटी के एओए अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने बताया कि एनसीएलटी से याचिका रद्द होने के बाद बिल्डर और उसके सहयोगियों की ओर से एनसीएलटी के ऑर्डर को रिव्यू करवाने के लिए एनसीएलएटी में याचिका दायर की गई थी, जिसे एनसीएलएटी की ओर से भी खारिज कर दिया गया। इससे लॉजिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के फ्लैट खरीदारों को लंबे संघर्ष के बाद बड़ी जीत मिली है। एनसीएलटी और एनसीएलएटी ने बिल्डर और उसके सहयोगियों द्वारा दायर की गई दिवाला और सीआईआरपी कार्रवाई को सिरे से खारिज कर दिया है। बिल्डर नोएडा प्राधिकरण के बकाये से बचने, फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री और कब्जे के उनके अधिकार से वंचित करने के लिए यह कर रहा था। फ्लैट खरीदारों की ओर से प्रस्तुत की गई ठोस दलीलों और प्रस्तुतियों के आधार पर न्यायाधिकरणों ने बिल्डर को जिम्मेदार और पुनः स्थापित कर दिया है।
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कोर्ट में भी चल रहा है मामला
मनोज ने बताया कि हमने हाईकोर्ट में भी एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें सोसाइटी के फ्लैट की रजिस्ट्री और टावरों के लिए आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) की मांग की है। याचिका में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि फ्लैट खरीदारों की कोई गलती नहीं है। यह बिल्डर का डिफॉल्ट है जिसने खरीदारों से पूरा पैसा और एकमुश्त लीज डीड शुल्क लिया लेकिन प्राधिकरण को भुगतान नहीं किया। नोएडा प्राधिकरण ने लीज डीड के उल्लंघन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में अगस्त 2025 में सुनवाई हुई है जिसमें कोर्ट ने बिल्डर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
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10 साल में सिर्फ 500 फ्लैट की रजिस्ट्री
सोसाइटी में 2015 से लोगों ने रहना शुरू कर दिया है और यहां पर कुल 2381 फ्लैट हैं जिसमें अबतक महज 500 फ्लैट की रजिस्ट्री हुई है और 17 टावरों में सिर्फ 10 टावरों की ओसी आई है और सात टावरों की ओसी नहीं जारी हुई है।