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Noida News: शादी का लालच देकर शोषण के आरोपी को जमानत
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शादी का लालच देकर शोषण, मारपीट और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों से घिरे आरोपी अभिषेक चौहान को जमानत दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद जमानत याचिका को स्वीकार किया।
पीड़िता ने 25 जून 2025 को थाना फेस-3 नोएडा में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि वर्ष 2022 में आरोपी से मुलाकात के बाद वह उसके प्रेमजाल में फंस गई। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ सहमति संबंध में रहकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी से इन्कार करते हुए पीड़िता से गाली-गलौज और मारपीट की।
पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने अपने मित्र के साथ मिलकर उसके साथ छेड़छाड़ भी की और दबाव बनाने पर जान से मारने की धमकी दी। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता वित्तीय लाभ के लिए आरोपी से पैसे लेती रही और लौटाना बंद कर दिया। पैसे की मांग करने पर उसने झूठे मुकदमे की धमकी दी। अदालत ने पाया कि पीड़िता ने पहले आईजीआरएस पोर्टल और न्यायालय में दी गई शिकायतों का उल्लेख नहीं किया। साथ ही एफआईआर में विलंब भी संदेह पैदा करता है। अदालत ने आदेश में कहा कि गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार बनता है।
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ग्रेटर नोएडा। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शादी का लालच देकर शोषण, मारपीट और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोपों से घिरे आरोपी अभिषेक चौहान को जमानत दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने, केस डायरी और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद जमानत याचिका को स्वीकार किया।
पीड़िता ने 25 जून 2025 को थाना फेस-3 नोएडा में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि वर्ष 2022 में आरोपी से मुलाकात के बाद वह उसके प्रेमजाल में फंस गई। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ सहमति संबंध में रहकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी से इन्कार करते हुए पीड़िता से गाली-गलौज और मारपीट की।
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पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने अपने मित्र के साथ मिलकर उसके साथ छेड़छाड़ भी की और दबाव बनाने पर जान से मारने की धमकी दी। वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता वित्तीय लाभ के लिए आरोपी से पैसे लेती रही और लौटाना बंद कर दिया। पैसे की मांग करने पर उसने झूठे मुकदमे की धमकी दी। अदालत ने पाया कि पीड़िता ने पहले आईजीआरएस पोर्टल और न्यायालय में दी गई शिकायतों का उल्लेख नहीं किया। साथ ही एफआईआर में विलंब भी संदेह पैदा करता है। अदालत ने आदेश में कहा कि गुण-दोष पर टिप्पणी किए बिना परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार बनता है।
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