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नाबालिगों के हाथों में ऑटो की कमान, आफत में सवारियों की जान
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ऑटो में सवारियां लेकर जाता नाबालिग चालक।
नोएडा (मनोज कुमार)। जिले में ज्यादातर ऑटो और ई-रिक्शा की कमान नाबालिगों के हाथों में है। तेज रफ्तार में ऑटो दौड़ाने और नियमों की अनदेखी से सवारियों की जान आफत में है। वहीं, ट्रैफिक पुलिस की अनदेखी से इनके हौसले बुलंद हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है और ट्रैफिक पुलिस मौन है। जिले में 18 हजार ऑटो पंजीकृत हैं। वहीं, करीब 4000 ई-रिक्शा सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें अधिकतर ऑटो और ई-रिक्शा को नाबालिग चला रहे हैं। एक ओर परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी और यातायात पुलिस लोगों को नियमों का पाठ पढ़ा रही है। वहीं, दूसरी ओर ऑटो और ई-रिक्शा चला रहे नाबालिग नियमों की अनदेखी करते हुए सवारियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। बिना डीएल के ही ये नाबालिग चालक कोतवाली और चौकियों के सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है। शहर के सेक्टर-37 से सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन, सिटी सेंटर से सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन, सेक्टर-71 से सेक्टर-62 मॉडल टाउन चौक, सेक्टर-1 गोलचक्कर से सेक्टर-16 और बॉटेनिक गार्डन से सिटी सेंटर आदि रूटों पर नाबालिगों को ऑटो को चलाते देखा जा सकता है।
परिजनों पर की जा सकती है कार्रवाई
अधिवक्ता संजय सिंह भाटी का कहना है कि यदि नाबालिग ऑटो चलाते पाया जाता है तो उसका डीएल बालिग होने पर यानी 18 साल की उम्र में भी नहीं बन पाएगा। 25 साल की उम्र के बाद ही वह डीएल बनवा सकता है। यदि 25 साल की आयु से पहले वह दोबारा से ऑटो चलाते पकड़ा जाता है तो गिरफ्तारी की जा सकती है। इसके अलावा नाबालिग द्वारा वाहन चलाते समय किसी दुर्घटना या अपराध को अंजाम देने पर परिजनों को 3 साल तक सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
ऑटो मालिक को बना सकते हैं दोषी
अधिवक्ता हृदेश रावल ने बताया कि ऑटो या ई-रिक्शा को किराए पर देने का प्रचलन है। 500 से 800 रुपये प्रतिदिन का किराया लिया जाता है। किराये के लालच में ही ऑटो मालिक वाहन नाबालिगों के हाथों में देने से गुरेज नहीं करते। ऐसे ऑटो मालिकों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। नाबालिग ऑटो चलाता हुआ पकड़ा जाता है तो मालिक पर जुर्माना और सजा के साथ एक साल तक के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।
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...तो नहीं मिल पाएगी रोटी
बच्चे से ऑटो चलवाना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन मैं बीमार हूं। 15 साल का बेटा ही ऑटो को चला रहा है। यदि वह ऑटो नहीं चलाएगा तो घर के लोगों को रोटी भी मयस्सर नहीं हो पाएगी। - रगवीर (बदला हुआ नाम), ऑटो चालक
समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों 50 से अधिक ऑटो का चालान किया गया था। ऑटो चालकों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। किसी ऑटो पर चालक के रूप में नाबालिग मिलता है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशांत तिवारी, एआरटीओ प्रवर्तन
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परिजनों पर की जा सकती है कार्रवाई
अधिवक्ता संजय सिंह भाटी का कहना है कि यदि नाबालिग ऑटो चलाते पाया जाता है तो उसका डीएल बालिग होने पर यानी 18 साल की उम्र में भी नहीं बन पाएगा। 25 साल की उम्र के बाद ही वह डीएल बनवा सकता है। यदि 25 साल की आयु से पहले वह दोबारा से ऑटो चलाते पकड़ा जाता है तो गिरफ्तारी की जा सकती है। इसके अलावा नाबालिग द्वारा वाहन चलाते समय किसी दुर्घटना या अपराध को अंजाम देने पर परिजनों को 3 साल तक सजा और 25 हजार रुपये जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
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ऑटो मालिक को बना सकते हैं दोषी
अधिवक्ता हृदेश रावल ने बताया कि ऑटो या ई-रिक्शा को किराए पर देने का प्रचलन है। 500 से 800 रुपये प्रतिदिन का किराया लिया जाता है। किराये के लालच में ही ऑटो मालिक वाहन नाबालिगों के हाथों में देने से गुरेज नहीं करते। ऐसे ऑटो मालिकों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। नाबालिग ऑटो चलाता हुआ पकड़ा जाता है तो मालिक पर जुर्माना और सजा के साथ एक साल तक के लिए वाहन का रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।
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...तो नहीं मिल पाएगी रोटी
बच्चे से ऑटो चलवाना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन मैं बीमार हूं। 15 साल का बेटा ही ऑटो को चला रहा है। यदि वह ऑटो नहीं चलाएगा तो घर के लोगों को रोटी भी मयस्सर नहीं हो पाएगी। - रगवीर (बदला हुआ नाम), ऑटो चालक
समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों 50 से अधिक ऑटो का चालान किया गया था। ऑटो चालकों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। किसी ऑटो पर चालक के रूप में नाबालिग मिलता है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशांत तिवारी, एआरटीओ प्रवर्तन