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तीन दिन में रेत पर उकेरी तीस फीट की कलाकृति
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नोएडा। इंसान में कला हो तो रेत से भी सुंदर कलाकृतियां बन जाती हैं। इसी कला के माध्यम से मूलरूप से बलिया के रहने वाले सैंड आर्टिस्ट रूपेश सिंह ने देशभर में अपनी पहचान बनाई है। चुनावों में लोगों को मतदान करने के लिए सैंड आर्टिस्ट रूपेश सिंह रेत, पानी और रंगों के माध्यम से सुंदर-सुंदर कलाकृतियां बनाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोमवार को रूपेश की कलाकृति देखने जिलाधिकारी सुहास एलवाई भी पहुंचे। उन्होंने लोगों को मतदाता जागरूकता को लेकर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी को मतदान करना चाहिए।
दलित प्रेरणा स्थल के बाहर लोगों को 30 फीट की कलाकृति काफी आकर्षित कर रही है। कलाकृति में 5 लोग ईवीएम मशीन को हाथ में लिए खड़े हैं। कलाकृति के बीच में मतदान का निशान है। उसके साथ एक वरिष्ठ नागरिक की कलाकृति और एक चश्मा पहनी महिला है। कलाकृति में तिरंगा के रंग से एक शेप भी दी गई है। कलाकृति के ऊपर ‘10 फरवरी 2022 मतदान महापर्व’ लिखा है। जबकि इसके नीचे ‘लोकतंत्र का भाग्य विधाता होता है जागरूक मतदाता अंकित किया गया है। रूपेश बताते हैं कि इस कलाकृति को बनाने में तीन दिन का समय लगा है। कलाकृति 30 फीट की है। उन्होंने ने बताया कि तीन दिन दलित प्रेरणा स्थल के बाहर टेंट लगाकर रहे हैं।
रूपेश सिंह ने पिछले वर्ष अयोध्या में हुए दीपोत्सव में भी रामायण के विभिन्न घटनाक्रमों के कलाकृतियां बनाई थी। जैसे राम का हनुमान से मिलन, राम-केवट संवाद, वन में राम और छोटे भाई भरत में संवाद आदि। उन्होंने बताया कि उन्होंने कलाकृति बनाने के पैसे नहीं मांगे हैं।
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सबसे ऊंची रेत की कलाकृति बनाने का सपना
रूपेश ने बताया कि विश्व की सबसे ऊंची रेत की कलाकृति बनाने का सपना है। वो 100 फीट की कलाकृति वाराणसी में बनाना चाहते हैं। अभी 73 फीट ऊंची कलाकृति का चीन के एक आर्टिस्ट का रिकॉर्ड है। वो इस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं और देश का मान बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक वो रिकॉर्ड नहीं बनाते तब तक बाल नहीं कटवाएंगे। उनके लंबे बाल और दाढ़ी है। लोगों के लिए यह कलाकृति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रूपेश फिलहाल वाराणसी में रह रहे हैं और यहां पढ़ाई कर रहे हैं।
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दलित प्रेरणा स्थल के बाहर लोगों को 30 फीट की कलाकृति काफी आकर्षित कर रही है। कलाकृति में 5 लोग ईवीएम मशीन को हाथ में लिए खड़े हैं। कलाकृति के बीच में मतदान का निशान है। उसके साथ एक वरिष्ठ नागरिक की कलाकृति और एक चश्मा पहनी महिला है। कलाकृति में तिरंगा के रंग से एक शेप भी दी गई है। कलाकृति के ऊपर ‘10 फरवरी 2022 मतदान महापर्व’ लिखा है। जबकि इसके नीचे ‘लोकतंत्र का भाग्य विधाता होता है जागरूक मतदाता अंकित किया गया है। रूपेश बताते हैं कि इस कलाकृति को बनाने में तीन दिन का समय लगा है। कलाकृति 30 फीट की है। उन्होंने ने बताया कि तीन दिन दलित प्रेरणा स्थल के बाहर टेंट लगाकर रहे हैं।
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रूपेश सिंह ने पिछले वर्ष अयोध्या में हुए दीपोत्सव में भी रामायण के विभिन्न घटनाक्रमों के कलाकृतियां बनाई थी। जैसे राम का हनुमान से मिलन, राम-केवट संवाद, वन में राम और छोटे भाई भरत में संवाद आदि। उन्होंने बताया कि उन्होंने कलाकृति बनाने के पैसे नहीं मांगे हैं।
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सबसे ऊंची रेत की कलाकृति बनाने का सपना
रूपेश ने बताया कि विश्व की सबसे ऊंची रेत की कलाकृति बनाने का सपना है। वो 100 फीट की कलाकृति वाराणसी में बनाना चाहते हैं। अभी 73 फीट ऊंची कलाकृति का चीन के एक आर्टिस्ट का रिकॉर्ड है। वो इस रिकॉर्ड को तोड़ना चाहते हैं और देश का मान बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि जब तक वो रिकॉर्ड नहीं बनाते तब तक बाल नहीं कटवाएंगे। उनके लंबे बाल और दाढ़ी है। लोगों के लिए यह कलाकृति आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रूपेश फिलहाल वाराणसी में रह रहे हैं और यहां पढ़ाई कर रहे हैं।