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ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर में पुनर्निर्माण पर पुरातत्व विभाग ने लगाई रोक
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दनकौर का द्रोण मंदिर।
- फोटो : Grnoida
दनकौर। ऐतिहासिक द्रोणाचार्य मंदिर में दो दिन से चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को पुरातत्व विभाग मेरठ ने रुकवा दिया है। साथ ही मंदिर समिति के प्रबंधक को चेतावनी दी है कि अगर ऐसी गलती दोबारा की तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं, मंदिर के 200 मीटर के दायरे में घर बनवाने वाले 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने को दनकौर कोतवाली में तहरीर दी है। ये लोग पुरातत्व विभाग से अनुमति लिए बिना निर्माण करा रहे थे। विभाग ने इससे पहले इनके खिलाफ नोटिस भी जारी किया था।
द्रोण गोशाला समिति के प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि द्रोणाचार्य मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। इसे विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार से 70 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृति हुई है। मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए जेवर विधायक ने काफी प्रयास किया था। इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी सरकारी संस्था सिडको को दी गई। संस्था की तरफ से गोशाला समिति की देखरेख में मंदिर की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा था। मंगलवार दोपहर पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर पहुंच गई और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। बिना अनुमति के निर्माण की जानकारी जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह व पर्यटन विभाग को भी दे दी गई।
पुरातत्व विभाग के अधीक्षण अधिकारी डीबी गणनायक ने बताया कि द्रोणाचार्य मंदिर और तालाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संपत्ति है। विभाग की अनुमति लिए बिना कोई भी इस संपत्ति से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। साथ ही इसके 200 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य के लिए भी अनुमति लेना जरूरी है। यह सरल प्रक्रिया है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मानकों के अनुसार अनुमति दी जाती है। मंदिर में निर्माण कार्य होने की जानकारी मिली थी। उसे रुकवा दिया गया है। विभाग से अनुमति के बाद ही फिर से निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
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काम रुकने से नाराज लोगों ने की गाली-गलौज
सूत्रों ने बताया कि जब पुरातत्व विभाग के मल्टी टास्क स्टाफ के सदस्य सवेंद्र कुमार ने मंदिर के 200 मीटर के दायरे में घर बनाने वालों को निर्माण रोकने को कहा तो इस पर वह नाराज हो गए। इस दौरान उन्होंने गाली-गलौज भी की। हालांकि, अन्य लोगों ने मामला शांत कराया। इसके बाद सर्वेंद्र कुमार ने कोतवाली जाकर 7 लोगों के खिलाफ तहरीर दी। इसमें बिना अनुमति निर्माण और अभद्रता करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में आरोप को सही माना। हालांकि, देर शाम तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
ऐतिहासिक है द्रोण मंदिर
महाभारत काल में कौरव और पांडवों को गुरु द्रोणाचार्य ने दनकौर में शिक्षा दी थी। करीब 30 दशक पहले इसी स्थान पर गुरु द्रोणाचार्य का ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर के पास एक तालाब भी है। परिसर में एकलव्य पार्क है। यह भी मान्यता है कि एकलव्य ने द्रोणाचार्य को गुरु मानकर शिक्षा का अभ्यास किया था। यहीं गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य से दीक्षा भी ली थी। तालाब की विशेषता है कि तेज बारिश के बाद भी इसमें पानी नहीं भरता है। करीब 10 दशक से द्रोण गोशाला समिति यहां विशाल दंगल और मेले का आयोजन भी कराती है।
मुझे समिति व मीडिया के माध्यम से पुरातत्व विभाग द्वारा निर्माण कार्य रोकने की जानकारी मिली है। मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी है। जल्दी इसमें रास्ता निकाला जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह, विधायक, जेवर
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द्रोण गोशाला समिति के प्रबंधक रजनीकांत अग्रवाल ने बताया कि द्रोणाचार्य मंदिर को पर्यटन स्थल घोषित किया गया है। इसे विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार से 70 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृति हुई है। मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए जेवर विधायक ने काफी प्रयास किया था। इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी सरकारी संस्था सिडको को दी गई। संस्था की तरफ से गोशाला समिति की देखरेख में मंदिर की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा था। मंगलवार दोपहर पुरातत्व विभाग की टीम मंदिर पहुंच गई और निर्माण कार्य को रुकवा दिया। बिना अनुमति के निर्माण की जानकारी जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह व पर्यटन विभाग को भी दे दी गई।
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पुरातत्व विभाग के अधीक्षण अधिकारी डीबी गणनायक ने बताया कि द्रोणाचार्य मंदिर और तालाब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संपत्ति है। विभाग की अनुमति लिए बिना कोई भी इस संपत्ति से छेड़छाड़ नहीं कर सकता। साथ ही इसके 200 मीटर के दायरे में निर्माण कार्य के लिए भी अनुमति लेना जरूरी है। यह सरल प्रक्रिया है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद मानकों के अनुसार अनुमति दी जाती है। मंदिर में निर्माण कार्य होने की जानकारी मिली थी। उसे रुकवा दिया गया है। विभाग से अनुमति के बाद ही फिर से निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
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काम रुकने से नाराज लोगों ने की गाली-गलौज
सूत्रों ने बताया कि जब पुरातत्व विभाग के मल्टी टास्क स्टाफ के सदस्य सवेंद्र कुमार ने मंदिर के 200 मीटर के दायरे में घर बनाने वालों को निर्माण रोकने को कहा तो इस पर वह नाराज हो गए। इस दौरान उन्होंने गाली-गलौज भी की। हालांकि, अन्य लोगों ने मामला शांत कराया। इसके बाद सर्वेंद्र कुमार ने कोतवाली जाकर 7 लोगों के खिलाफ तहरीर दी। इसमें बिना अनुमति निर्माण और अभद्रता करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में आरोप को सही माना। हालांकि, देर शाम तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
ऐतिहासिक है द्रोण मंदिर
महाभारत काल में कौरव और पांडवों को गुरु द्रोणाचार्य ने दनकौर में शिक्षा दी थी। करीब 30 दशक पहले इसी स्थान पर गुरु द्रोणाचार्य का ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर के पास एक तालाब भी है। परिसर में एकलव्य पार्क है। यह भी मान्यता है कि एकलव्य ने द्रोणाचार्य को गुरु मानकर शिक्षा का अभ्यास किया था। यहीं गुरु द्रोणाचार्य ने एकलव्य से दीक्षा भी ली थी। तालाब की विशेषता है कि तेज बारिश के बाद भी इसमें पानी नहीं भरता है। करीब 10 दशक से द्रोण गोशाला समिति यहां विशाल दंगल और मेले का आयोजन भी कराती है।
मुझे समिति व मीडिया के माध्यम से पुरातत्व विभाग द्वारा निर्माण कार्य रोकने की जानकारी मिली है। मंदिर से लोगों की आस्था जुड़ी है। जल्दी इसमें रास्ता निकाला जाएगा।
- धीरेंद्र सिंह, विधायक, जेवर