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Noida News: साढ़े तीन लाख से अधिक बच्चों की नहीं बनी अपार आईडी
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गाजियाबाद। काफी प्रयास के बाद भी अभी तक जिले में 3.84 लाख से अधिक बच्चों की अपार आईडी नहीं बन सकी है। यूडायस पोर्टल पर डाटा अपडेट न होने और माता-पिता के आधार, पैन और बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र आदि में विवरण मैच न होने के कारण दिक्कत आ रही है। कई मामलों में माता-पिता की अनुमति मिलने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए केंद्र की ओर से सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए बच्चे का आधार, पैन, माता-पिता के आधार और पैन सभी में नाम और अन्य विवरण बिल्कुल एक जैसे होने चाहिए। इसके बाद ही अपार आईडी बन सकेगी, लेकिन अधिकतर मामलों में माता-पिता के नाम सभी कागजात में एक जैसे नहीं हैं। इससे परेशानी हो रही है। पहले सरकार ने यह सबके लिए अनिवार्य की थी लेकिन बाद में इसमें माता-पिता की सहमति होने की बात जोड़ दी गई। कई स्कूलों में माता-पिता की असहमति भी अवरोधक बन रही है। इस बारे में जिला समन्यवक रुचि त्यागी कहती हैं कि यूपी, सीबीएसई, ऐडिड, परिषदीय सहित अन्य सभी बोर्डों के जिले में कुल सात लाख 87 हजार 93 विद्यार्थी हैं। इनमें से चार लाख दो हजार 834 बच्चों की अपार आईडी बन चुकी है। तीन लाख 84 हजार 259 की लंबित है। इसके लिए बच्चे की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट यूडायस पर अपडेट होनी आवश्यक है। अभी 631 बच्चों की एप्लीकेशन आई है लेकिन तीन लाख 80, 403 विद्यार्थियों के लिए स्कूलों ने आवेदन ही नहीं किया है। इसके लिए सभी स्कूलों को रिमांइडर भेजे गए हैं। अभिभावक इसे डीजी लॉकर में जाकर बनवा सकते हैं। बीएसए ओपी यादव का कहना है कि सभी स्कूलों को नोटिस भेजे गए हैं और जल्द से जल्द अपार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
माता-पिता का पूरा विवरण एक जैसा न होने से काम प्रभावित
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन राठी का कहना है कि जिन माता-पिता की पहले के कागज बने हुए हैं। उनके नाम सभी कागजात में अलग-अलग हैं। जैसे किसी कि राजेश कुमार सिंह, किसी में राजेश कुमार आदि। ऐसे में बच्चों से पहले मां-बाप को अपने कागजात दुरुस्त करने की सलाह दी जा रही है। जब पूरा मिलान सही होगा, तभी अपार आईडी जनरेट होगी। साथ ही इससे पहले यूडायस में बच्चे का पूरा डाटा, उसका आधार और पैन नंबर भी अपडेट होना चाहिए। सभी में नाम का पूरा मिलान होने पर ही यह बन सकती है। बहुत सी बाधाओं के कारण इसमें दिक्कत आ रही है।
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प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए केंद्र की ओर से सभी बच्चों की अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए बच्चे का आधार, पैन, माता-पिता के आधार और पैन सभी में नाम और अन्य विवरण बिल्कुल एक जैसे होने चाहिए। इसके बाद ही अपार आईडी बन सकेगी, लेकिन अधिकतर मामलों में माता-पिता के नाम सभी कागजात में एक जैसे नहीं हैं। इससे परेशानी हो रही है। पहले सरकार ने यह सबके लिए अनिवार्य की थी लेकिन बाद में इसमें माता-पिता की सहमति होने की बात जोड़ दी गई। कई स्कूलों में माता-पिता की असहमति भी अवरोधक बन रही है। इस बारे में जिला समन्यवक रुचि त्यागी कहती हैं कि यूपी, सीबीएसई, ऐडिड, परिषदीय सहित अन्य सभी बोर्डों के जिले में कुल सात लाख 87 हजार 93 विद्यार्थी हैं। इनमें से चार लाख दो हजार 834 बच्चों की अपार आईडी बन चुकी है। तीन लाख 84 हजार 259 की लंबित है। इसके लिए बच्चे की पूरी प्रोग्रेस रिपोर्ट यूडायस पर अपडेट होनी आवश्यक है। अभी 631 बच्चों की एप्लीकेशन आई है लेकिन तीन लाख 80, 403 विद्यार्थियों के लिए स्कूलों ने आवेदन ही नहीं किया है। इसके लिए सभी स्कूलों को रिमांइडर भेजे गए हैं। अभिभावक इसे डीजी लॉकर में जाकर बनवा सकते हैं। बीएसए ओपी यादव का कहना है कि सभी स्कूलों को नोटिस भेजे गए हैं और जल्द से जल्द अपार बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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माता-पिता का पूरा विवरण एक जैसा न होने से काम प्रभावित
सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य विपिन राठी का कहना है कि जिन माता-पिता की पहले के कागज बने हुए हैं। उनके नाम सभी कागजात में अलग-अलग हैं। जैसे किसी कि राजेश कुमार सिंह, किसी में राजेश कुमार आदि। ऐसे में बच्चों से पहले मां-बाप को अपने कागजात दुरुस्त करने की सलाह दी जा रही है। जब पूरा मिलान सही होगा, तभी अपार आईडी जनरेट होगी। साथ ही इससे पहले यूडायस में बच्चे का पूरा डाटा, उसका आधार और पैन नंबर भी अपडेट होना चाहिए। सभी में नाम का पूरा मिलान होने पर ही यह बन सकती है। बहुत सी बाधाओं के कारण इसमें दिक्कत आ रही है।
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