Amar Ujala Teacher Award: सम्मानित होकर उत्साह से बोले शिक्षक- शुक्रिया बच्चों, तुमने हमें मंच तक पहुंचाया
शिक्षक सम्मान समारोह नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के शिक्षकों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का अवसर बनकर आया। सम्मानित शिक्षकों का कहना है कि यह पुरस्कार उनके लिए केवल उपलब्धि नहीं बल्कि बच्चों के प्रति जिम्मेदारी को और बढ़ाने वाला संकल्प है।
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मंच पर नाम पुकारा गया तो तालियां बजने लगीं लेकिन कई शिक्षकों के लिए यह सिर्फ सम्मान पाने का पल नहीं था बल्कि उन छात्रों के भरोसे की जीत थी जिनके बीच रहकर उन्होंने वर्षों तक पढ़ाया है। शनिवार को शिक्षक सम्मान समारोह में कई ऐसे भावुक पल सामने आए जब शिक्षकों ने मंच से अपने छात्रों को याद किया। किसी को भरोसा नहीं था कि बच्चे उन्हें सर्वश्रेष्ठ शिक्षक चुनेंगे, तो किसी ने इस सम्मान के लिए तीन साल तक इंतजार किया था।
ग्रेटर नोएडा के ज्ञान निकेतन इंटरनेशनल स्कूल की शिक्षिका संगीता भाटी जब सम्मान लेने मंच की ओर बढ़ीं तो उन्होंने सबसे पहले अपने छात्रों को याद किया। उन्होंने बताया कि स्कूल में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के चयन के लिए वोटिंग हुई थी। जिस समय वोटिंग हुई, वह स्कूल में मौजूद भी नहीं थी। इसलिए उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बच्चे उन्हें चुनेंगे। मंच पर पहुंचकर उन्होंने कहा, 'शुक्रिया मेरे बच्चों, तुमने मुझे इस मंच तक पहुंचाया। उनके इतना कहते ही सभागार तालियों से गूंज उठा।
तीन साल से था इंतजार
कंपोजिट स्कूल तिरथली को शिक्षिका कल्पना शर्मा के लिए यह सम्मान और भी खास रहा। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन साल से इस मंच तक पहुंचने का इंतजार कर रही थीं।
आखिरकार जब नाम पुकारा गया तो वर्षों की मेहनत का वह इंतजार खुशी में बदल गया। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचाने में परिवार के साथ सबसे बड़ी भूमिका बच्चों की रही जिन्होंने उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया।
मंच पर सम्मान, नीचे अपनों की चमकतीं आंखें
समारोह में कई शिक्षक परिवार के साथ पहुंचे थे। कंपोजिट स्कूल पृथला खंजरपुर की मंजू लता अपने पोते और पोती के साथ पहुंची। सम्मान के बाद उन्होंने परिवार के साथ मंच पर सेल्फी ली। ग्रेटर नोएडा वल्र्ड स्कूल के शिक्षक आदित्य सिंह भी बेटे को साथ लेकर मंच पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने बच्चे को दुलार किया। परिवार के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया। समारोह में मिले इन पलों ने यह दिखाया कि शिक्षक का सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं है। किसी शिक्षक के लिए बच्चों का भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी है। मंच पर मिला सम्मान उस भरोसे को सार्वजनिक पहचान बन गया।
बच्चों का भरोसा बना ताकत
शिक्षकों के लिए समारोह का सबसे खास हिस्सा उनका छात्रों से जुड़ाव रहा। मंच से कई शिक्षकों ने कहा कि शिक्षक की असली पहचान उसके छात्रों की सफलता और विश्वास से बनती है। यही भरोसा उन्हें कक्षा में हर दिन कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देता है। श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज के शिक्षक संजय कुमार के बेटे तोयश ने कहा, 'मेरे पापा सबसे अच्छे हैं। बेटे की बात सुनकर संजय कुमार भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता में बच्चों का विशेष योगदान है। बच्चों का विश्वास ही उन्हें लगातार बेहतर करने की प्रेरणा देता है।
बच्चों की सफलता ही होगी असली गुरु दक्षिणा
शिक्षक सम्मान समारोह नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के शिक्षकों के लिए प्रेरणा और प्रोत्साहन का अवसर बनकर आया। सम्मानित शिक्षकों का कहना है कि यह पुरस्कार उनके लिए केवल उपलब्धि नहीं बल्कि बच्चों के प्रति जिम्मेदारी को और बढ़ाने वाला संकल्प है। उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि विद्यार्थी जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल कर समाज के लिए बेहतर नागरिक बनें। शिक्षकों का मानना है कि बच्चों की सफलता ही उनके लिए सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा होगी। सेक्टर- 30 स्थित डीपीएस स्कूल की शिक्षिका शालिनी पांडेय ने कहा कि शिक्षक के रूप में उनका उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में योगदान देना है। बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियां और उनका बेहतर भविष्य ही शिक्षक को सबसे बड़ी सफलता होती है। सेक्टर 128 स्थित जेपी पब्लिक स्कूल की शिक्षिका स्वाति शर्मा और आरती जोशी ने कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे और बेहतर काम करने की ऊर्जा देगा। अब उनका प्रयास रहेगा कि वे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए भी तैयार करें। नवजीवन इंटर कॉलेज को शिक्षिका डॉ. अमृत बोहरा का कहना है कि एक शिक्षक की असली पहचान उसके विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। शिक्षकों ने कहा कि अमर उजाला शिक्षक सम्मान में विद्यार्थियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और खास बना दिया।
पुरानी खबरों की प्रदर्शनी देख भावुक हुए शिक्षक, याद किया छात्र जीवन
अमर उजाला की ओर से आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शनिवार को भावुक कर देने वाला नजारा दिखा। एक और बच्चों का भविष्य गढ़ने वाले शिक्षक मौजूद थे तो दूसरी ओर अमर उजाला के सफर की ऐतिहासिक खबरों की विशेष प्रदर्शनी सजी थी।
समारोह के प्रवेश द्वार से मुख्य सभागार तक अमर उजाला की शुरुआत से अब तक के ऐतिहासिक पड़ावों और प्रमुख पहले पन्नों को प्रदर्शित किया गया था। आजादी के बाद के दशक, देश के बड़े नीतिगत फैसलों और ऐतिहासिक घटनाओं को बयां करती खबरों वाली सहेजकर रखी गई प्रतियों ने हर किसी का ध्यान खींचा। समारोह में आए वरिष्ठ शिक्षकों के लिए ये सिर्फ अखबार के पन्ने नहीं बल्कि उनकी अपनी स्मृतियों को यात्रा थी।
कई शिक्षक उन पुरानी खबरों को देखकर अपने छात्र जीवन और अध्यापन के शुरुआती दिनों की यादों में खो गए। सम्मान लेने पहुंचे कई वरिष्ठ शिक्षक वहां ठिठक कर खड़े हो गए। किसी को 1980 के दशक की किसी बड़ी घटना की खबर देखकर अपना स्कूल का दौर याद आया तो किसी ने अपनी पहली नौकरी के दिनों की खबरें पहचान लीं। एक शिक्षक ने भावुक होकर कहा, 'इन पन्नों में देश का जो इतिहास छपा है, उसे हमारी पिछली पीढ़ी ने ब्लैकबोर्ड पर पड़ना सिखाया था।'
अखबार की लीड खबरों में प्रकाशित राजीव गांधी की हत्या की खबर देखकर भी शिक्षक भावुक हो गए और पुराने दिनों को याद करने लगे। एक शिक्षक ने कहा कि उस समय रेडियो पर खबर मिला करती थी और अखबार ही खचर पाने का एकमात्र माध्यम था।
बच्चों के सितारे बोले
शिक्षक सम्मान पाकर अच्छा लगा। सम्मानित होकर गर्व महसूस हो रहा है। -कल्पना सिंह, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, रजापुर
बहुत-बहुत धन्यवाद अमर उजाला। यह समारोह प्रशंसनीय है। -वंदना त्यागी, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय
शिक्षक के रूप में यह सम्मान बेहद खास है। इसे पाकर अहसास हुआ कि सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ है। -कविता जैन, शिक्षिका, विजडम इंटरनेशनल स्कूल
इतने बड़े मंच पर सम्मान मिलना गौरव की बात है। इस शानदार उपलब्धि के लिए बधाइयों का तांता लगा हुआ है। -देवेंद्र शर्मा, राजकीय इंटर कॉलेज, नंदग्राम
इस सम्मान का श्रेय विद्यार्थियों को जाता है, जिन्होंने मुझे इतने बड़े मंच पर सम्मानित होने का अवसर दिया है। -काजल त्यागी, सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल
इस यादगार पल को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए अमर उजाला का दिल से धन्यवाद। -तन्वी गोस्वामी, इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, इंदिरापुरम