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Noida News: अमिताभकांत कमेटी का लाभ न लेने वाले बिल्डरों के आवंटन होंगे निरस्त
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अमिताभकांत कमेटी का लाभ न लेने वाले बिल्डरों के आवंटन होंगे निरस्त
बिल्डरों को कुल बकाया की 25 फीसदी राशि करनी है जमा
योजना लागू होने के 60 दिन के अंदर बिल्डरों का लेना था लाभ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। खरीदारों और बिल्डरों की समस्या को दूर करने के लिए बनाई गई अमिताभ कांत समिति का लाभ न लेने वाले बिल्डरों पर सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। कुल बकाया की 25 फीसदी राशि जमा न करने वाले बिल्डरों का अब भू-आवंटन निरस्त करने की तैयारी है। यूपी के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) मनोज कुमार सिंह ने तीनों प्राधिकरणों को ऐसे बिल्डरों को अंतिम चेतावनी देकर एक मौका और देने को कहा है। यदि इसके बाद भी अमिताभकांत कमेटी का लाभ नहीं लेते हैं तो तेजी से उनका आवंटन निरस्त कर कब्जा लेने का निर्देश दिया है।
प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या लाखों खरीदारों को घर और मालिकाना हक न मिलने पर दिसंबर-2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अमिताभ कांत कमिटी की सिफारिशों को लागू कराया था। इससे बिल्डर-बायर्स की समस्या को दूर करने के लिए कुल बकाया राशि का 25 फीसदी जमा कराकर इसका लाभ लेना था। बड़ी बात यह थी कि सिफारिश लागू होने के 60 दिन के अंदर इसका लाभ लेना है। मगर अब तक काफी बिल्डरों ने इसका लाभ नहीं लिया है। मगर अब शासन ने ऐसे बिल्डरों पर संख्ती करनी शुरू कर दी है। आईआईडीसी की ओर से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण को पत्र लिखकर अंतिम चेतावनी देते हुए बिल्डरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने तीनों प्राधिकरण ने समीक्षा रिपोर्ट भी मांगी है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में 52 बिल्डर पैसा जमा कराने को तैयार
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के क्षेत्र में वैसे तो 96 बिल्डर परियोजनाएं हैं और इनमें से करीब 76 को इसमें शामिल करना है। अब तक प्राधिकरण ने 52 बिल्डरों को 25 फीसदी राशि देने के लिए तैयार कर लिया है। जबकि 38 बिल्डरों ने इस राशि को जमा करा दिया है। अभी तक ग्रेनो प्राधिकरण में 17 हजार खरीदारों की रजिस्ट्री का रास्ता खुल चुका है और 2300 से अधिक को मालिकाना हक प्राधिकरण दिला चुका है। बाकी बिल्डरों ने अभी पैसा जमा नहीं किया है, जिससे खरीदारों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई हैं। सबसे ज्यादा चार बिल्डरों पर बकाया है और वह अदालत में हैं और उनको छोड़ दिया जाए तो 3600 करोड़ रुपये प्राधिकरण को मिलेंगे। इनमें से प्राधिकरण को पहले चरण में 900 करोड़ रुपये फंसा हुआ मिलेगा।
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नोएडा प्राधिकरण के 45 बिल्डर तैयार
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 57 बिल्डर परियोजनाएं हैं और इनमें से 45 ने प्राधिकरण के समक्ष अमिताभकांत कमेटी का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। 19 बिल्डरों ने पैसा जमा करा दिया है। कुल 35 हजार खरीदारों को लाभ मिलेगा और इनमें से 1300 खरीदारों की रजिस्ट्री हो सकेगी, जबकि 450 खरीदारों को ही अभी तक मालिकाना हक मिल सकेगा। इनमें आम्रपाली आदि समेत ऐसे बिल्डर शामिल नहीं हैं जिनके मामले अदालत में लंबित हैं।
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यमुना प्राधिकरण की 14 परियोजनाओं में करीब 5000 खरीदार फंसे हुए हैं। इनमें यमुना प्राधिकरण ने खरीदारों को छूट दे दी है कि वह प्राधिकरण का लीज रेंट और किसानों को दिया जाने वाला अतिरिक्त मुआवजा जमा करा दें। इसके बाद सीधी रजिस्ट्री कराकर अपने फ्लैट पर मालिकाना हक ले सकते हैं। प्राधिकरण का दावा है कि वह अगले तीन माह में ज्यादातर खरीदारों की रजिस्ट्री कराकर उनको मालिकाना हक दिला देगा। बिल्डरों को उनकी राशि का विवरण दे दिया है और पत्र भेजकर 25 फीसदी राशि जमा कराने के लिए निर्देश दिए हैं।
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बिल्डरों को कुल बकाया की 25 फीसदी राशि करनी है जमा
योजना लागू होने के 60 दिन के अंदर बिल्डरों का लेना था लाभ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। खरीदारों और बिल्डरों की समस्या को दूर करने के लिए बनाई गई अमिताभ कांत समिति का लाभ न लेने वाले बिल्डरों पर सरकार ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। कुल बकाया की 25 फीसदी राशि जमा न करने वाले बिल्डरों का अब भू-आवंटन निरस्त करने की तैयारी है। यूपी के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त (आईआईडीसी) मनोज कुमार सिंह ने तीनों प्राधिकरणों को ऐसे बिल्डरों को अंतिम चेतावनी देकर एक मौका और देने को कहा है। यदि इसके बाद भी अमिताभकांत कमेटी का लाभ नहीं लेते हैं तो तेजी से उनका आवंटन निरस्त कर कब्जा लेने का निर्देश दिया है।
प्रदेश की सबसे बड़ी समस्या लाखों खरीदारों को घर और मालिकाना हक न मिलने पर दिसंबर-2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अमिताभ कांत कमिटी की सिफारिशों को लागू कराया था। इससे बिल्डर-बायर्स की समस्या को दूर करने के लिए कुल बकाया राशि का 25 फीसदी जमा कराकर इसका लाभ लेना था। बड़ी बात यह थी कि सिफारिश लागू होने के 60 दिन के अंदर इसका लाभ लेना है। मगर अब तक काफी बिल्डरों ने इसका लाभ नहीं लिया है। मगर अब शासन ने ऐसे बिल्डरों पर संख्ती करनी शुरू कर दी है। आईआईडीसी की ओर से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण को पत्र लिखकर अंतिम चेतावनी देते हुए बिल्डरों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने तीनों प्राधिकरण ने समीक्षा रिपोर्ट भी मांगी है।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में 52 बिल्डर पैसा जमा कराने को तैयार
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के क्षेत्र में वैसे तो 96 बिल्डर परियोजनाएं हैं और इनमें से करीब 76 को इसमें शामिल करना है। अब तक प्राधिकरण ने 52 बिल्डरों को 25 फीसदी राशि देने के लिए तैयार कर लिया है। जबकि 38 बिल्डरों ने इस राशि को जमा करा दिया है। अभी तक ग्रेनो प्राधिकरण में 17 हजार खरीदारों की रजिस्ट्री का रास्ता खुल चुका है और 2300 से अधिक को मालिकाना हक प्राधिकरण दिला चुका है। बाकी बिल्डरों ने अभी पैसा जमा नहीं किया है, जिससे खरीदारों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई हैं। सबसे ज्यादा चार बिल्डरों पर बकाया है और वह अदालत में हैं और उनको छोड़ दिया जाए तो 3600 करोड़ रुपये प्राधिकरण को मिलेंगे। इनमें से प्राधिकरण को पहले चरण में 900 करोड़ रुपये फंसा हुआ मिलेगा।
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नोएडा प्राधिकरण के 45 बिल्डर तैयार
नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 57 बिल्डर परियोजनाएं हैं और इनमें से 45 ने प्राधिकरण के समक्ष अमिताभकांत कमेटी का लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। 19 बिल्डरों ने पैसा जमा करा दिया है। कुल 35 हजार खरीदारों को लाभ मिलेगा और इनमें से 1300 खरीदारों की रजिस्ट्री हो सकेगी, जबकि 450 खरीदारों को ही अभी तक मालिकाना हक मिल सकेगा। इनमें आम्रपाली आदि समेत ऐसे बिल्डर शामिल नहीं हैं जिनके मामले अदालत में लंबित हैं।
यमुना प्राधिकरण की 14 परियोजनाओं में करीब 5000 खरीदार फंसे हुए हैं। इनमें यमुना प्राधिकरण ने खरीदारों को छूट दे दी है कि वह प्राधिकरण का लीज रेंट और किसानों को दिया जाने वाला अतिरिक्त मुआवजा जमा करा दें। इसके बाद सीधी रजिस्ट्री कराकर अपने फ्लैट पर मालिकाना हक ले सकते हैं। प्राधिकरण का दावा है कि वह अगले तीन माह में ज्यादातर खरीदारों की रजिस्ट्री कराकर उनको मालिकाना हक दिला देगा। बिल्डरों को उनकी राशि का विवरण दे दिया है और पत्र भेजकर 25 फीसदी राशि जमा कराने के लिए निर्देश दिए हैं।