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Nikki Murder Case: निक्की हत्याकांड में जेठ रोहित को हाईकोर्ट से जमानत, सुप्रीम कोर्ट जाएगा पीड़िता परिवार

Wed, 07 Jan 2026 09:02 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 07 Jan 2026 09:02 PM IST
सार

ग्रेटर नोएडा के सिरसा गांव में निक्की भाटी की जलाकर हत्या के चर्चित मामले में आरोपी जेठ को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने साक्ष्यों के अभाव और मृतका के बेटे के बयान को आधार बनाकर जमानत दी। 

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Allahabad High Court granted bail to her brother-in-law Rohit Bhati In  Nikki murder case
निक्की हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सिरसा गांव में निक्की हत्याकांड मामले में मृतका निक्की भाटी के जेठ रोहित भाटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने मामले के तथ्यों, पक्षकारों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार के पाया कि आरोपी के खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं हैं। ऐसे में उसे जमानत का लाभ दिया जाना उचित है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि जमानत के दौरान आरोपी न तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा और न ही गवाहों को प्रभावित करेगा।

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22 अगस्त 2025 को मामले में मृतका निक्की की बहन कंचन ने कासना कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 21 अगस्त की शाम निक्की के पति विपिन, सास दया, ससुर सत्यवीर और जेठ रोहित ने ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी थी। गंभीर रूप से झुलसने के कारण उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। 
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विवेचना के दौरान प्रारंभिक तौर पर अस्पताल के डॉक्टरों और नर्स के बयान आए कि निक्की ने उन्हें कहा था कि सिलेंडर फटने से वह जली है। मामले में मुख्य आरोपी विपिन को 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। उसकी निशानदेही पर थिनर की बोतल बरामद की गई थी। आरोप है कि निक्की के ऊपर यही थिनर डाला गया था और लाइटर लेकर आग लगाई गई थी। इसके बाद पुलिस ने मृतका की सास, ससुर और जेठ को गिरफ्तार कर जेल भेज था। मामले में जिला सत्र अदालत से जेठ व ससुर की जमानत खारिज हो गई थी। इसके बाद जेठ रोहित की ओर से जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया गया था।

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आरोपी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई रोहित मृतका का बहनोई है। उसका घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है। उसे केवल पारिवारिक संबंधों के कारण और सामान्य आरोपों के आधार पर मामले में फंसाया गया है। मृतका के बेटे का बयान बाद में दर्ज किया गया, जिसमें उसने साफ तौर पर कहा कि घटना के समय आरोपी मौके पर मौजूद नहीं था। 

वहीं मृतक पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने जमानत याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि मृतक के बेटे के बयान में आवेदक का नाम नहीं है। अभियोजन के साक्ष्य इस स्तर पर आवेदक की प्रत्यक्ष संलिप्तता को स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं करते। तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि बिना मामले के गुण-दोष पर कोई राय बनाए, प्रथम दृष्टया आवेदक जमानत का हकदार है। 

हालांकि हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए शर्त लगाई कि वह ट्रायल के दौरान साक्ष्यों से कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा। किसी भी प्रकार से अभियोजन पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने या प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा। वह प्रत्येक नियत तिथि पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहेगा। जमानत आदेश जारी करने से पहले जमानतदारों का विधिवत सत्यापन किया जाएगा। अगर इन शर्तों में से किसी का उल्लंघन किया गया तो जमानत निरस्त की जा सकती है।

आरोपियों के अधिवक्ता व गौतमबुद्धनगर के बार अध्यक्ष मनोज भाटी एवं अमित भाटी बोड़ाकी ने बताया कि गुरुवार को रोहित की जमानत के लिए सत्र अदालत में जमानती दाखिल करने के साथ अन्य आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शनिवार तक रोहित की जेल से रिहाई संभव है। वहीं ससुर सत्यवीर को भी जल्द हाईकोर्ट से जमानत की उम्मीद है। अन्य आरोपियों की भी जल्द जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। सभी आरोपी साक्ष्य के आधार पर बरी होंगे।

जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगा निक्की का परिवार
मृतका निक्की भाटी के परिवार के अधिवक्ता उधम सिंह तोंगड़ का कहना है कि रोहित को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को खारिज कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। मामले में आरोपी सास दया की जमानत अर्जी सत्र अदालत में 14 जनवरी को सुनवाई होगी। विपिन की ओर से अभी सत्र अदालत में जमानत अर्जी दाखिल नहीं की गई है। सास दया और विपिन की जमानत खारिज कराने के लिए अदालत में मजबूत दलील देंगे।

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