फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Ajmal Khan dead

हकीम अजमल खाँ का इंतकाल

Tue, 08 Sep 2020 11:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 11:33 PM IST
विज्ञापन
Ajmal Khan dead
पुन्हाना। हकीम अजमल खां (शिकरावा) का सोमवार रात इंतकाल हो गया। उनकी मौत से पूरे नूंह जिसे में गम का माहौल है। उनकी पहचान हकीम, आलिम, लेखक, इतिहासकार, सामाजिक चिन्तक और प्रखर वक्ता के रूप में थी। वे 88 वर्ष के थे। मंगलवार को गांव शिकरावा के कब्रिस्तान में उनको दफना दिया गया।
विज्ञापन

नूंह के इतिहासकार सिद्दीक अहमद मेव ने बताया कि हकीम अजमल खां का जीवन बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा। उनके पूर्वज फिरोजपुर नमक के रहने वाले थे। सन् 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने नूंह में जिन 52 लोगों को फांसी दी, उनमें उनके दादा चौधरी उजागर खां और चचेरे दादा भी शामिल थे। चौधरी उजागर खां को फांसी स्थल के पास ही दफनाया गया था।
विज्ञापन

इसके बाद उनके पिता मौलवी अब्दुल शकूर अपने परिवार के साथ नीमका गांव चले गए और मस्जिद में इमामत करने लगे। यहीं अब्दुल शकूर ने पहले तारीख-ए-मेवात लिखी, मगर वे इससे संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने फिर तारीख-ए-मेव क्षत्रिय लिखनी शुरू की। सन् 1947 के हंगामे के समय बलवाइयों ने नीमका गांव को भी आग लगा दी। अन्य ग्रामीणों के साथ उन्हें भी नीमका छोड़ना पड़ा। हकीम अजमल खां उस समय काफी छोटे थे। वे गलती से तारीख-ए-मेव क्षत्रिय का मसौदा नमाज की कोठी में डालकर भाग आए। पिता को पता चला तो उन्होंने बहुत डांटा। इसके बाद अब्दुल शकूर ऊंट पर सवार होकर वापस गए और मसौदा निकालकर लाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद वे शिकरावा के ही होकर रह गए। यहीं उन्होंने तारीख-ए-मेव क्षत्रिय पूरी की। संपादन कर हकीम अजमल खां ने सन् 1970 में इसे छपवाया। इसके अलावा, हकीम अजमल खां ने रहबर-ए-मेवात, चौ. मुहम्मद यासीन खां, मेवात के स्वतंत्रता सेनानी, मेवाती अदब और पंडून का कड़ा किताबें लिखीं और खुद ही मौलाना आजाद मेवात एकेडमी शिकरावा के बैनर से छपवाईं।
हकीम अजमल खां ने अपने अब्बा के साथ सन् 1947 के हंगामे के दौरान और उसके बाद ‘फिर बसाओ तहरीक’ में दिन-रात काम कर मेवों को बसाने में काम किया। उन्होंने गांधी जी, विनोबा भावे, सत्यम भाई और उनकी टीम को काम करते हुए देखा और उनकी सेवा भी की।

नेताओं ने जताया दुख :
हकीम अजमल खां के इंतकाल पर नूंह से कांग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद ने कहा कि शिकरावा के इंतकाल की खबर दुखद है। वे एक बेहतरीन इंसान थे और समाज के लिए कुछ करने का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा था। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि मेरी खुशकिस्मती थी कि मुझे उनसे कई बार मिलने और मशविरा करने का मौका मिला। उनका गुजरना इतिहास के एक अध्याय का पूरा हो जाना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed