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Noida News: नोएडा एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे से भी एयरफोर्स के विमान भी भर सकते हैं उड़ान
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- आपातकाल की स्थिति के लिए प्रशासन ने शुरू की तैयारी, एयरपोर्ट के रनवे को भी किया गया अलर्ट
- दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिहाज से स्ट्रैटेजिक लोकेशन के रूप में काम करेगा एयरपोर्ट
शशांक मिश्र
ग्रेटर नोएडा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनजर देशभर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। इसी क्रम में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी संभावित सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। प्रशासन ने एयरपोर्ट के रनवे को अलर्ट कर दिया है और जरूरत पड़ने पर यमुना एक्सप्रेसवे पर भी वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग की जा सकती है।
एयरफोर्स द्वारा संभावित मॉकड्रिल की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि किसी भी आपातकाल की स्थिति में तैयारी की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर में रनवे का ट्रायल पूरा हो चुका है, जिससे टेक-ऑफ और लैंडिंग की प्रक्रिया तकनीकी रूप से संभव है। दरअसल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण से पहले इंडियन एयरफोर्स से भी अनापत्ति ली गई है और आपात स्थिति में एयरपोर्ट को सैन्य गतिविधियों के लिए तैयार रखने पर सहमति भी दी गई है। यमुना एक्सप्रेसवे के पास विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिहाज से एक बेहद रणनीतिक स्थान पर स्थित है।
ऐसे में युद्ध जैसे हालात में यह एयरपोर्ट सैन्य तैनाती के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी सीमाओं से सटे राज्यों तक तेजी से पहुंच सुनिश्चित करने में यह एयरपोर्ट अहम भूमिका निभा सकता है। यहां बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माणाधीन चरण में ही इसका रनवे दिसंबर 2024 में सफलतापूर्वक ट्रायल पूरा कर चुका है। तकनीकी रूप से यह रनवे अब वायुसेना के विमानों की टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए सक्षम है। एयरपोर्ट के निर्माण से पहले भारतीय वायुसेना से आवश्यक मंजूरी ली गई थी और आपातकाल की स्थिति में इसके सैन्य उपयोग पर सहमति भी मिल चुकी है।
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एक दशक पहले एक्सप्रेसवे पर उतर चुके हैं सैन्य विमान
यमुना एक्सप्रेस वे पर भी आपात स्थिति में सैन्य विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। करीब एक दशह पहले 15 मई 2015 को एक्सप्रेस वे पर सेना के विमानों ने अपनी ताकत दिखाई थी। यमुना एक्सप्रेस वे और नोएडा एयरपोर्ट महत्वपूर्ण रणनीतिक लोकेशन की वजह से युद्ध जैसे हालात में तेज सैन्य तैनाती और संसाधनों की आपूर्ति के लिए एक अहम बेस बन सकता है। साथ ही पश्चिमी सीमाओं की ओर फौरन पहुंचने में यह एयरपोर्ट निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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नोएडा एयरपोर्ट के रनवे का ट्रायल कराया जा चुका है और यहां विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। हम अपनी ओर से सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। आपात स्थिति में शासन और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निर्णय लिए जाएंगे।
मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी
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- दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिहाज से स्ट्रैटेजिक लोकेशन के रूप में काम करेगा एयरपोर्ट
शशांक मिश्र
ग्रेटर नोएडा। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के मद्देनजर देशभर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। इसी क्रम में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी संभावित सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। प्रशासन ने एयरपोर्ट के रनवे को अलर्ट कर दिया है और जरूरत पड़ने पर यमुना एक्सप्रेसवे पर भी वायुसेना के लड़ाकू विमानों की लैंडिंग की जा सकती है।
एयरफोर्स द्वारा संभावित मॉकड्रिल की योजना भी बनाई जा रही है, ताकि किसी भी आपातकाल की स्थिति में तैयारी की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर में रनवे का ट्रायल पूरा हो चुका है, जिससे टेक-ऑफ और लैंडिंग की प्रक्रिया तकनीकी रूप से संभव है। दरअसल, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण से पहले इंडियन एयरफोर्स से भी अनापत्ति ली गई है और आपात स्थिति में एयरपोर्ट को सैन्य गतिविधियों के लिए तैयार रखने पर सहमति भी दी गई है। यमुना एक्सप्रेसवे के पास विकसित हो रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिहाज से एक बेहद रणनीतिक स्थान पर स्थित है।
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ऐसे में युद्ध जैसे हालात में यह एयरपोर्ट सैन्य तैनाती के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी सीमाओं से सटे राज्यों तक तेजी से पहुंच सुनिश्चित करने में यह एयरपोर्ट अहम भूमिका निभा सकता है। यहां बता दें कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माणाधीन चरण में ही इसका रनवे दिसंबर 2024 में सफलतापूर्वक ट्रायल पूरा कर चुका है। तकनीकी रूप से यह रनवे अब वायुसेना के विमानों की टेक-ऑफ और लैंडिंग के लिए सक्षम है। एयरपोर्ट के निर्माण से पहले भारतीय वायुसेना से आवश्यक मंजूरी ली गई थी और आपातकाल की स्थिति में इसके सैन्य उपयोग पर सहमति भी मिल चुकी है।
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एक दशक पहले एक्सप्रेसवे पर उतर चुके हैं सैन्य विमान
यमुना एक्सप्रेस वे पर भी आपात स्थिति में सैन्य विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। करीब एक दशह पहले 15 मई 2015 को एक्सप्रेस वे पर सेना के विमानों ने अपनी ताकत दिखाई थी। यमुना एक्सप्रेस वे और नोएडा एयरपोर्ट महत्वपूर्ण रणनीतिक लोकेशन की वजह से युद्ध जैसे हालात में तेज सैन्य तैनाती और संसाधनों की आपूर्ति के लिए एक अहम बेस बन सकता है। साथ ही पश्चिमी सीमाओं की ओर फौरन पहुंचने में यह एयरपोर्ट निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट के रनवे का ट्रायल कराया जा चुका है और यहां विमानों की लैंडिंग कराई जा सकती है। हम अपनी ओर से सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। आपात स्थिति में शासन और उच्चाधिकारियों के निर्देश पर निर्णय लिए जाएंगे।
मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी