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Noida News: पीएचसी स्तर पर मिलेंगी एम्स की सुविधाएं
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कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, मधुमेह व उच्च रक्तचाप का होगा इलाज
स्टाफ को दी ट्रेनिंग, सामान्य स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर सकेगा पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर सुधारने के लिए एम्स अब प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। यहां भी एम्स जैसी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, बीमारी के स्तर के आधार पर मरीज का वर्गीकरण कर बड़े अस्पतालों से बोझ कम किया जाएगा। ऐसा करने से बड़े व मध्यम स्तर के अस्पतालों में सुविधाएं सुधरेंगी। इसे लेकर देशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। अभी तक यह मातृ एवं बाल चिकित्सा सहित सामान्य रोगों का इलाज उपलब्ध करवा रहे हैं। आने वाले दिनों में पीएचसी में ही मरीजों को कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोगों का प्राथमिक इलाज मिल जाएगा। जरूरत के आधार पर मरीज को अस्पताल में रेफर भी किया जाएगा।
एम्स के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र (सीसीएम) के प्रोफेसर डॉ. संजय के राय ने बताया कि कि पीएचसी की गुणवत्ता में सुधार आने के बाद बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव आएगा। विभाग ने पहले भी पोलियो सहित दूसरी बीमारियों पर काम कर उन्हें खत्म किया है। एम्स पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। मरीजों की कई समस्या पीएचसी स्तर पर ही दूर हो सकती है, जबकि मरीज मध्यम व बड़े स्तर के अस्पतालों के चक्कर काटते हैं। इसे रोकने के लिए एम्स का सीसीएम उच्च गुणवत्ता वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों और सामुदायिक चिकित्सकों को तैयार कर रहा है।
एआई का इस्तेमाल, स्वास्थ्यकर्मी होंगे सक्षम
सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन बिरवा ने बताया कि पीएचसी में जिन बीमारियों की जांच उपलब्ध होगी उनका इलाज हो सकेगा। आने वाले दिनों में यहां सेवाएं दे रहे स्वास्थ्यकर्मी को सक्षम बनाया जाएगा। साथ ही, कैंसर जैसे रोगों की जांच के लिए सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बड़ी भूमिका निभा सकेगा। मौजूदा समय में सर्वाइकल कैंसर को लेकर काम किया जा रहा है। इसमें एक ऐसा उपकरण बनाया जा रहा है जिसमें फोटो अपलोड करते ही रोग का स्तर पता चलेगा। आने वाले दिनों में और भी बीमारियों पर एआई को लेकर काम होगा। इसके अलावा स्तन व दूसरे कैंसर को यदि जल्द पकड़ सकें तो इलाज संभव हो सकेगा। देशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जरूरी मशीन उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं, एआई को लेकर काम चल रहा है।
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तेजी से बढ़ रहे हैं जीवनशैली से जुड़े रोग
एम्स के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने बताया कि मौजूदा समय में जीवनशैली से जुड़े रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। पीएसची इन रोगों की पहचान कर प्राथमिक स्तर पर ही इलाज उपलब्ध करवाने में सक्षम होंगे। ऐसा होने पर न केवल बड़े अस्पतालों का बोझ कम होगा, बल्कि मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा। इससे चिकित्सा सुविधा भी बेहतर होगी। देश में पीएचसी स्तर पर सुविधाएं विकसित हैं। एम्स इन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
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स्टाफ को दी ट्रेनिंग, सामान्य स्वास्थ्य कर्मचारी भी कर सकेगा पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर सुधारने के लिए एम्स अब प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) की गुणवत्ता में सुधार लाएगा। यहां भी एम्स जैसी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, बीमारी के स्तर के आधार पर मरीज का वर्गीकरण कर बड़े अस्पतालों से बोझ कम किया जाएगा। ऐसा करने से बड़े व मध्यम स्तर के अस्पतालों में सुविधाएं सुधरेंगी। इसे लेकर देशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्टाफ को विशेष ट्रेनिंग दी गई है। अभी तक यह मातृ एवं बाल चिकित्सा सहित सामान्य रोगों का इलाज उपलब्ध करवा रहे हैं। आने वाले दिनों में पीएचसी में ही मरीजों को कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसे गंभीर रोगों का प्राथमिक इलाज मिल जाएगा। जरूरत के आधार पर मरीज को अस्पताल में रेफर भी किया जाएगा।
एम्स के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र (सीसीएम) के प्रोफेसर डॉ. संजय के राय ने बताया कि कि पीएचसी की गुणवत्ता में सुधार आने के बाद बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव आएगा। विभाग ने पहले भी पोलियो सहित दूसरी बीमारियों पर काम कर उन्हें खत्म किया है। एम्स पीएचसी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। मरीजों की कई समस्या पीएचसी स्तर पर ही दूर हो सकती है, जबकि मरीज मध्यम व बड़े स्तर के अस्पतालों के चक्कर काटते हैं। इसे रोकने के लिए एम्स का सीसीएम उच्च गुणवत्ता वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों और सामुदायिक चिकित्सकों को तैयार कर रहा है।
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एआई का इस्तेमाल, स्वास्थ्यकर्मी होंगे सक्षम
सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन बिरवा ने बताया कि पीएचसी में जिन बीमारियों की जांच उपलब्ध होगी उनका इलाज हो सकेगा। आने वाले दिनों में यहां सेवाएं दे रहे स्वास्थ्यकर्मी को सक्षम बनाया जाएगा। साथ ही, कैंसर जैसे रोगों की जांच के लिए सुविधाएं दी जाएंगी। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) बड़ी भूमिका निभा सकेगा। मौजूदा समय में सर्वाइकल कैंसर को लेकर काम किया जा रहा है। इसमें एक ऐसा उपकरण बनाया जा रहा है जिसमें फोटो अपलोड करते ही रोग का स्तर पता चलेगा। आने वाले दिनों में और भी बीमारियों पर एआई को लेकर काम होगा। इसके अलावा स्तन व दूसरे कैंसर को यदि जल्द पकड़ सकें तो इलाज संभव हो सकेगा। देशभर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में जरूरी मशीन उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं, एआई को लेकर काम चल रहा है।
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तेजी से बढ़ रहे हैं जीवनशैली से जुड़े रोग
एम्स के एनाटॉमी विभाग की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा ने बताया कि मौजूदा समय में जीवनशैली से जुड़े रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। पीएसची इन रोगों की पहचान कर प्राथमिक स्तर पर ही इलाज उपलब्ध करवाने में सक्षम होंगे। ऐसा होने पर न केवल बड़े अस्पतालों का बोझ कम होगा, बल्कि मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा। इससे चिकित्सा सुविधा भी बेहतर होगी। देश में पीएचसी स्तर पर सुविधाएं विकसित हैं। एम्स इन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।