{"_id":"6259cb573eeba34d9050a6f7","slug":"agent-s-bail-plea-rejected-in-ponzi-scheme-fraud-case-noida-news-noi6431497130","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोंजी स्कीम ठगी केस में एजेंट की जमानत याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोंजी स्कीम ठगी केस में एजेंट की जमानत याचिका खारिज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रेटर नोएडा । जिला अदालत ने पोंजी स्कीम से एनसीआर के 1800 से अधिक लोगों से ठगी करने वाले एजेंट सुदेश उर्फ टिल्लू की जमानत याचिका खारिज कर दी है। निफ्टेक ग्लोबल निधि लिमिटेड के नाम से कंपनी बनाकर नोएडा में दफ्तर खोलकर ठगी की गई थी। इस मामले गौतमबुद्घ नगर, हापुड़, बुलंदशहर समेत कई जिलों में आरोपियों पर केस दर्ज हैं। तीन आरोपियों को बादलपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल भेजे गए आरोपी एजेंट ने जमानत याचिका दायर की थी।
अधिवक्ता जितेंद्र नागर ने बताया कि पोंजी स्कीम चलाकर लोगों को धन दोगुना करने का झांसा देकर ठगी के मामले में नोएडा के सेक्टर-47 निवासी सुदेश उर्फ टिल्लू को बादलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ 26 फरवरी को धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया था। आरोपी सुदेश कंपनी का एजेंट था। आरोप है कि आरोपियों ने ठगी की रकम से कई संपत्तियां बनाईं हैं। सुदेश ने पीड़ितों को निदेशक धर्मपाल से मिलवाया था। धर्मपाल ने पीड़ितों को डी-मैट खाते एवं नकद धनराशि जमा करने पर मोटी कमाई का झांसा दिया गया था। मोटे ब्याज के लालच में प्रवीण कुमार ने 6.5 लाख रुपये चेक से दिए। वहीं पीड़ित माया ने 10 लाख रुपये चेक से दिए। इसी तरह कपिल चौहान ने 10 लाख रुपये चेक से देकर डी-मैट अकाउंट खुलवाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी सत्र न्यायाधीश गौतमबुद्ध नगर पुष्पेंद्र सिंह ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ब्यूरो
इलाज में नहीं हुई लापरवाही की पुष्टि, परिवाद खारिज
ग्रेटर नोएडा। इलाज में लापरवाही की पुष्टि नहीं होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मुआवजा नहीं देने के फैसले के सही ठहराया है। मरीज के इलाज में लापरवाही से मृत्यु होने का आरोप लगाकर परिजनों ने मुआवजा दिलाने के लिए आयोग के समक्ष गुहार लगाई थी।
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा के हल्दौनी मोड़ निवासी उपेंद्र त्रिवेदी की पत्नी किरण त्रिवेदी को पीठ में दर्द की शिकायत होने पर नोएडा के भारद्वाज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने जांच के बाद उसकी पित की थैली में पथरी होना बताया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 28 अगस्त 2012 को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद भी महिला ठीक नहीं हुई उनकी परेशानी बरकरार रही। दूसरी बार इलाज के लिए 5 नवंबर 2012 को अस्पताल में भर्ती किया गया। महिला को बुखार और बार-बार उल्टी होने की शिकायत हो रही थी। मरीज के इलाज के खर्च को अस्पताल ने बीमा कंपनी से लिया गया। हालत खराब होने पर दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां पर जांच-पड़ताल हुई तो मरीज को कैंसर होने की पुष्टि हुई।
कैंसर के तेजी से फैलने के कारण 25 दिसंबर 2012 को मृत्यु हो गई। पति ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिकित्सकों से पांच लाख रुपये का मुआवजा मांगा। अस्पताल और चिकित्सकों द्वारा जब मुआवजा नहीं दिया गया तो 19 जनवरी 2013 को उपेंद्र त्रिवेदी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान इलाज करने वाले चिकित्सकों ने अपना पक्ष रखते हुए साक्ष्य पेश किए। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि इलाज में कोई लापरवाही के साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके हैं। इसमें सेवा में कमी की पुष्टि नहीं हुई है और आयोग ने मुआवजा के लिए दायर किए गए परिवाद को खारिज कर दिया है।
विज्ञापन
अधिवक्ता जितेंद्र नागर ने बताया कि पोंजी स्कीम चलाकर लोगों को धन दोगुना करने का झांसा देकर ठगी के मामले में नोएडा के सेक्टर-47 निवासी सुदेश उर्फ टिल्लू को बादलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ 26 फरवरी को धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया था। आरोपी सुदेश कंपनी का एजेंट था। आरोप है कि आरोपियों ने ठगी की रकम से कई संपत्तियां बनाईं हैं। सुदेश ने पीड़ितों को निदेशक धर्मपाल से मिलवाया था। धर्मपाल ने पीड़ितों को डी-मैट खाते एवं नकद धनराशि जमा करने पर मोटी कमाई का झांसा दिया गया था। मोटे ब्याज के लालच में प्रवीण कुमार ने 6.5 लाख रुपये चेक से दिए। वहीं पीड़ित माया ने 10 लाख रुपये चेक से दिए। इसी तरह कपिल चौहान ने 10 लाख रुपये चेक से देकर डी-मैट अकाउंट खुलवाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी सत्र न्यायाधीश गौतमबुद्ध नगर पुष्पेंद्र सिंह ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। ब्यूरो
विज्ञापन
इलाज में नहीं हुई लापरवाही की पुष्टि, परिवाद खारिज
ग्रेटर नोएडा। इलाज में लापरवाही की पुष्टि नहीं होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मुआवजा नहीं देने के फैसले के सही ठहराया है। मरीज के इलाज में लापरवाही से मृत्यु होने का आरोप लगाकर परिजनों ने मुआवजा दिलाने के लिए आयोग के समक्ष गुहार लगाई थी।
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा के हल्दौनी मोड़ निवासी उपेंद्र त्रिवेदी की पत्नी किरण त्रिवेदी को पीठ में दर्द की शिकायत होने पर नोएडा के भारद्वाज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने जांच के बाद उसकी पित की थैली में पथरी होना बताया था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी। 28 अगस्त 2012 को ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद भी महिला ठीक नहीं हुई उनकी परेशानी बरकरार रही। दूसरी बार इलाज के लिए 5 नवंबर 2012 को अस्पताल में भर्ती किया गया। महिला को बुखार और बार-बार उल्टी होने की शिकायत हो रही थी। मरीज के इलाज के खर्च को अस्पताल ने बीमा कंपनी से लिया गया। हालत खराब होने पर दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां पर जांच-पड़ताल हुई तो मरीज को कैंसर होने की पुष्टि हुई।
कैंसर के तेजी से फैलने के कारण 25 दिसंबर 2012 को मृत्यु हो गई। पति ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिकित्सकों से पांच लाख रुपये का मुआवजा मांगा। अस्पताल और चिकित्सकों द्वारा जब मुआवजा नहीं दिया गया तो 19 जनवरी 2013 को उपेंद्र त्रिवेदी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान इलाज करने वाले चिकित्सकों ने अपना पक्ष रखते हुए साक्ष्य पेश किए। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि इलाज में कोई लापरवाही के साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके हैं। इसमें सेवा में कमी की पुष्टि नहीं हुई है और आयोग ने मुआवजा के लिए दायर किए गए परिवाद को खारिज कर दिया है।