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Noida News: फर्जी बैनामे से जमीन हड़पने के आरोपी को नहीं मिली जमानत
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फर्जी बैनामे से जमीन हड़पने के आरोपी को नहीं मिली जमानत
ग्रेटर नोएडा। जैतवारपुर भूमि फर्जीवाड़ा मामले में सत्र अदालत ने आरोपी विजय सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला जारचा थाने में दर्ज अपराध से जुड़ा है।
आरोप है कि कई लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत शिकायतकर्ता और उसके सहयोगी प्रतीक सिंह की कीमती कृषि भूमि हड़पने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य अभिलेख बनवाए तथा उनकी जगह हमशक्ल व्यक्तियों को खड़ा कर फर्जी बैनामे करा दिए। शिकायतकर्ता और प्रतीक सिंह दादरी तहसील के गांव जैतवारपुर स्थित भूमि के वैध स्वामी हैं। यह भूमि वर्ष 2023 में विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदी गई थी। बावजूद आरोपियों ने जमीन पर कब्जा करने के लिए संगठित षड्यंत्र रचा। आरोपियों ने सबसे पहले 8 जुलाई 2024 को शिकायतकर्ता और प्रतीक सिंह के नाम पर दो फर्जी बिक्री विलेख तैयार कराए। इसके आधार पर आधी-आधी जमीन आरोपी खुशबू देवी के नाम करा दी गई। बाद में इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 11 फरवरी 2026 को कई अन्य बिक्री विलेख तैयार किए गए, जिनके जरिए जमीन का हिस्सा संदीप कुमार, पारुल गुप्ता, सुमन आहूजा और अल्का के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। 15 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता को सूचना मिली कि विवादित भूमि पर रखा करीब 2500 ईंटों का ढेर चोरी किया जा रहा है। जब वह मौके पर पहुंचा तो आरोपी संदीप कुमार ईंटें ले जाते हुए मिला। पुलिस को सूचना देने पर संदीप कुमार ने दावा किया कि उसने यह जमीन खुशबू नाम की महिला से खरीदी है। जब जांच कराई तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद से आरोपी लगातार जमीन पर कब्जा करने और जान-माल की धमकी दे रहे हैं। ब्यूरो
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ग्रेटर नोएडा। जैतवारपुर भूमि फर्जीवाड़ा मामले में सत्र अदालत ने आरोपी विजय सिंह की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला जारचा थाने में दर्ज अपराध से जुड़ा है।
आरोप है कि कई लोगों ने सुनियोजित साजिश के तहत शिकायतकर्ता और उसके सहयोगी प्रतीक सिंह की कीमती कृषि भूमि हड़पने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य अभिलेख बनवाए तथा उनकी जगह हमशक्ल व्यक्तियों को खड़ा कर फर्जी बैनामे करा दिए। शिकायतकर्ता और प्रतीक सिंह दादरी तहसील के गांव जैतवारपुर स्थित भूमि के वैध स्वामी हैं। यह भूमि वर्ष 2023 में विधिवत पंजीकृत बिक्री विलेख के माध्यम से खरीदी गई थी। बावजूद आरोपियों ने जमीन पर कब्जा करने के लिए संगठित षड्यंत्र रचा। आरोपियों ने सबसे पहले 8 जुलाई 2024 को शिकायतकर्ता और प्रतीक सिंह के नाम पर दो फर्जी बिक्री विलेख तैयार कराए। इसके आधार पर आधी-आधी जमीन आरोपी खुशबू देवी के नाम करा दी गई। बाद में इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 11 फरवरी 2026 को कई अन्य बिक्री विलेख तैयार किए गए, जिनके जरिए जमीन का हिस्सा संदीप कुमार, पारुल गुप्ता, सुमन आहूजा और अल्का के नाम स्थानांतरित कर दिया गया। 15 फरवरी 2026 को शिकायतकर्ता को सूचना मिली कि विवादित भूमि पर रखा करीब 2500 ईंटों का ढेर चोरी किया जा रहा है। जब वह मौके पर पहुंचा तो आरोपी संदीप कुमार ईंटें ले जाते हुए मिला। पुलिस को सूचना देने पर संदीप कुमार ने दावा किया कि उसने यह जमीन खुशबू नाम की महिला से खरीदी है। जब जांच कराई तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद से आरोपी लगातार जमीन पर कब्जा करने और जान-माल की धमकी दे रहे हैं। ब्यूरो
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