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Noida News: आप विधायक अखिलेशपति को कार्यवाही खत्म होने तक कोर्ट में रहने की सजा
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छात्र को चोट पहुंचाने के मामले में अदालत ने लगाया तीस हजार रुपये जुर्माना
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को आप विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी को वर्ष 2020 में एक छात्र को चोट पहुंचाने के आरोप में कार्यवाही खत्म होने तक अदालत में रहने की सजा सुनाई। साथ ही, 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 6,500 रुपये अभियोजन पक्ष की ओर से खर्च की गई राशि के रूप में जमा किए जाएंगे और शेष राशि पीड़ित संजीव कुमार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि त्रिपाठी समाज के लिए खतरा हैं। अदालत ने कहा कि दोषी की समाज में गहरी जड़ें हैं और वह समाज के लिए खतरा नहीं है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोषी होने पर यह सजा उचित है। अदालत ने 25 मार्च को त्रिपाठी को आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया था। इस धारा में अपराध के लिए अधिकतम सजा एक वर्ष कारावास की सजा है। अदालत ने कहा कि यह घटना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न हुई। इस तथ्य को देखते हुए कि चुनाव अगले दिन होने वाले थे। ऐसे में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्राथमिकी फरवरी 2020 में एक छात्र की शिकायत पर दर्ज की गई थी। दावा किया था गया कि 7 फरवरी, 2020 को जब छात्र घर जा रहा था, तो आरोपी ने झंडेवालान चौक, लाल बाग में उसकी पिटाई कर दी थी।
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अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को आप विधायक अखिलेशपति त्रिपाठी को वर्ष 2020 में एक छात्र को चोट पहुंचाने के आरोप में कार्यवाही खत्म होने तक अदालत में रहने की सजा सुनाई। साथ ही, 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसमें से 6,500 रुपये अभियोजन पक्ष की ओर से खर्च की गई राशि के रूप में जमा किए जाएंगे और शेष राशि पीड़ित संजीव कुमार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
विशेष न्यायाधीश गीतांजलि गोयल ने अभियोजन पक्ष के इस तर्क को खारिज कर दिया कि त्रिपाठी समाज के लिए खतरा हैं। अदालत ने कहा कि दोषी की समाज में गहरी जड़ें हैं और वह समाज के लिए खतरा नहीं है। मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दोषी होने पर यह सजा उचित है। अदालत ने 25 मार्च को त्रिपाठी को आईपीसी की धारा 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत दोषी ठहराया था। इस धारा में अपराध के लिए अधिकतम सजा एक वर्ष कारावास की सजा है। अदालत ने कहा कि यह घटना राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से उत्पन्न हुई। इस तथ्य को देखते हुए कि चुनाव अगले दिन होने वाले थे। ऐसे में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्राथमिकी फरवरी 2020 में एक छात्र की शिकायत पर दर्ज की गई थी। दावा किया था गया कि 7 फरवरी, 2020 को जब छात्र घर जा रहा था, तो आरोपी ने झंडेवालान चौक, लाल बाग में उसकी पिटाई कर दी थी।
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