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Noida News: नोएडा में भी बनेगी यमुना सफाई और संरक्षण की योजना
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नोएडा में भी बनेगी यमुना सफाई और संरक्षण की योजना
नोट-फोटो, यमुना की।
-गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, प्राधिकरण को सूचना देकर तैयारी के लिए कहा गया
-दिल्ली में होने वाली समिति की बैठक के लिए एसीईओ को प्राधिकरण ने प्रभारी नामित किया, आगे बैठक से होगी शुरुआत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली के बाद नोएडा क्षेत्र में भी यमुना को प्रदूषण मुक्त करने और इसके अस्तित्व को बचाने के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार होगी। गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन करते हुए प्राधिकरण को आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने यमुना संरक्षण, प्रबंधन, पुनर्जीवीकरण, व प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कई विंदु पर तैयारी के क्रम में सूचना भी मांगी है।
प्राधिकरण स्तर से समिति की बैठकों में प्रतिभाग करने के लिए एसीईओ सतीश पाल को नामित किया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लेख भी समिति गठन में किया गया है। अब आगे दिल्ली में समिति की जो पहली बैठक होगी उसये कार्ययोजना की औपचारिक शुरुआत होगी। अधिकारियों ने बताया प्राधिकरण बैठक में अपने क्षेत्र में यमुना का दायरा, प्रदूषण के संभावित कारणों पर रिपोर्ट, अतिक्रमण व अन्य विंदुओं पर बुनियादी जानकारी रखेगा।
नोएडा में 13 किलोमीटर है यमुना की लंबाई, जलभराव क्षेत्र में बढ़ता जा रहा अतिक्रमण
यमुना कालिंदीकुंज सेक्टर-94 से शुरू होकर सेक्टर-135 के आगे तक है। इसकी लंबाई 13 किलोमीटर से ज्यादा है। डूब क्षेत्र को प्राधिकरण के मास्टर प्लान में 3 हजार हेक्टेयर अनुमानित है। उसे पुश्ता रोड के बाद हरित क्षेत्र के रूप में अलग कर दिया गया है। डूब क्षेत्र में तेजी से फार्म हाउस बन रहे हैं। अब तक 2 हजार से ज्यादा फार्म हाउस बन चुके हैं। कई जगहों पर अवैध कॉलोनी भी काटी जा रही हैं।
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रिवर फ्रंट विकसित करने के लिए पहले बन चुके हैं प्रस्ताव-
यमुना को अतिक्रमण से बचाने, सफाई और संवारने के लिए नोएडा में पहले कई बार रिवर फ्रंट परियोजना विकसित करने के प्रस्ताव बन चुके हैं। 1984 में रिवर फ्रंट प्रॉजेक्ट बनाने पर चर्चा शुरू हुई थी। यमुना और हिंडन किनारे 200 एकड़ जमीन पर इसे धरातल पर उतारा जाना था। सेक्टर-122 के सामने की जगह सेंट्रल प्वाइंट थी। पुणे स्थित सेंट्रल वाटर पावर रिसर्च स्टेशन से भी स्टडी करवाई गई थी। 6 कंपनियों ने रिवर फ्रंट बनाने के लिए इच्छा भी जाहिर की थी। कागजी काम पूरा होने के बाद निविदा प्रक्रिया होनी थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई। इसके बाद भी 2012 में रिवर फ्रंट और यमुना की सफाई को लेकर योजना बनी थी।
कोट-
यमुना प्रदूषण मुक्त बनाने संरक्षण व अन्य दिशा में व्यापक कार्य योजना तैयार करने के लिए गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की आगे बैठक होनी है।- सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण।
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नोट-फोटो, यमुना की।
-गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, प्राधिकरण को सूचना देकर तैयारी के लिए कहा गया
-दिल्ली में होने वाली समिति की बैठक के लिए एसीईओ को प्राधिकरण ने प्रभारी नामित किया, आगे बैठक से होगी शुरुआत
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली के बाद नोएडा क्षेत्र में भी यमुना को प्रदूषण मुक्त करने और इसके अस्तित्व को बचाने के लिए बड़े स्तर पर योजना तैयार होगी। गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन करते हुए प्राधिकरण को आवश्यक तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने यमुना संरक्षण, प्रबंधन, पुनर्जीवीकरण, व प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कई विंदु पर तैयारी के क्रम में सूचना भी मांगी है।
प्राधिकरण स्तर से समिति की बैठकों में प्रतिभाग करने के लिए एसीईओ सतीश पाल को नामित किया गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का उल्लेख भी समिति गठन में किया गया है। अब आगे दिल्ली में समिति की जो पहली बैठक होगी उसये कार्ययोजना की औपचारिक शुरुआत होगी। अधिकारियों ने बताया प्राधिकरण बैठक में अपने क्षेत्र में यमुना का दायरा, प्रदूषण के संभावित कारणों पर रिपोर्ट, अतिक्रमण व अन्य विंदुओं पर बुनियादी जानकारी रखेगा।
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नोएडा में 13 किलोमीटर है यमुना की लंबाई, जलभराव क्षेत्र में बढ़ता जा रहा अतिक्रमण
यमुना कालिंदीकुंज सेक्टर-94 से शुरू होकर सेक्टर-135 के आगे तक है। इसकी लंबाई 13 किलोमीटर से ज्यादा है। डूब क्षेत्र को प्राधिकरण के मास्टर प्लान में 3 हजार हेक्टेयर अनुमानित है। उसे पुश्ता रोड के बाद हरित क्षेत्र के रूप में अलग कर दिया गया है। डूब क्षेत्र में तेजी से फार्म हाउस बन रहे हैं। अब तक 2 हजार से ज्यादा फार्म हाउस बन चुके हैं। कई जगहों पर अवैध कॉलोनी भी काटी जा रही हैं।
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रिवर फ्रंट विकसित करने के लिए पहले बन चुके हैं प्रस्ताव-
यमुना को अतिक्रमण से बचाने, सफाई और संवारने के लिए नोएडा में पहले कई बार रिवर फ्रंट परियोजना विकसित करने के प्रस्ताव बन चुके हैं। 1984 में रिवर फ्रंट प्रॉजेक्ट बनाने पर चर्चा शुरू हुई थी। यमुना और हिंडन किनारे 200 एकड़ जमीन पर इसे धरातल पर उतारा जाना था। सेक्टर-122 के सामने की जगह सेंट्रल प्वाइंट थी। पुणे स्थित सेंट्रल वाटर पावर रिसर्च स्टेशन से भी स्टडी करवाई गई थी। 6 कंपनियों ने रिवर फ्रंट बनाने के लिए इच्छा भी जाहिर की थी। कागजी काम पूरा होने के बाद निविदा प्रक्रिया होनी थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया नहीं शुरू हो पाई। इसके बाद भी 2012 में रिवर फ्रंट और यमुना की सफाई को लेकर योजना बनी थी।
कोट-
यमुना प्रदूषण मुक्त बनाने संरक्षण व अन्य दिशा में व्यापक कार्य योजना तैयार करने के लिए गृह मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की आगे बैठक होनी है।- सतीश पाल, एसीईओ, नोएडा प्राधिकरण।