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70 साल से रोजाना यज्ञ कर खुशहाली की दुआ मांग रहा बंबावड़ का एक परिवार
Sat, 27 Mar 2021 04:59 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
संवाद न्यूज एजेंसी, जारचा
संवाद न्यूज एजेंसी, जारचा
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Sat, 27 Mar 2021 04:59 PM IST
सार
- गांव में होने वाले हवन के लिए निशुल्क देते है पूजा की सामग्री
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हवन कुंड (प्रतीकात्मक तस्वीर)
विस्तार
भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने परिवार के लिए संसाधन जुटाने में लगे रहते हैं। लेकिन बंबावड़ गांव का एक परिवार ऐसा है, जो पिता द्वारा चलाई गई परंपरा को पिछले 70 वर्षों से निभा रहा है। हर रोज सुबह और शाम को परिवार के साथ हवन करते हैं। ताकि, लोग सुख-शांति से रह सकें। हवन के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है।
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बंबावड़ गांव निवासी प्रदीप वैध ने बताया कि उनके पिता श्याम चरण महाशय निम्न परिवार में जन्में थे। काशी विद्यापीठ में पढ़ने के लिए चले गए। इसके बाद हरिद्वार गुरुकुल से आयुर्वेदाचार्य की विद्या सीखकर 35 साल की उम्र में गांव वापस लौट आए। शादी के बाद गांव में जड़ी-बूटियां तैयार कर लोगों को दवाई देने लगे। श्याम चरण सुबह और शाम को रोजाना हवन करते थे।
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2007 में उनकी मौत के अशोक, वीरेंद्र, महेंद्र सिंह और प्रदीप ने पिताजी के कार्य को संभाल लिया। अब इन लोगों के पास उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड से लोग पैरालिसिस की दवाइयां लेने आते हैं।
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प्रदीप ने बताया कि हवन के लिए अब मंदिर स्थापित किया गया है। हवन में प्रयोग होने वाली सामग्री खुद तैयार करते हैं। सुबह और शाम को रोजाना परिवार के सभी लोग हवन करते हैं। इसका सालाना खर्च करीब बारह लाख रुपये आता है, जिसको सभी भाई मिलकर वहन करते हैं। प्रदीप का कहना है कि हवन से वायुमंडल शुद्ध होता है। हवन की खुशबू से सभी प्राणी स्वस्थ और मन शुद्ध होगा। इसी दुआ के साथ हवन यज्ञ सत्तर सालों से चल रहा है।