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Noida News: 82 गांवों में चूहा-छछूंदर के नियंत्रण का चलेगा अभियान
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत जनपद के तीन विकासखंडों की 82 ग्राम पंचायतों में किसानों को चूहा-छछूंदर नियंत्रण के प्रति जागरूक किया जाएगा। यह अभियान एक से 31 अक्तूबर तक चलेगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दुबे ने बताया कि चूहे और छछूंदर संचारी रोगों के प्रसार में सहायक हो सकते हैं। गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को इनसे होने वाले रोगों की रोकथाम के उपाय बताए जा रहे हैं। किसानों से घरों और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने की अपील की गई है। झाड़ियों और कूड़ा-कचरे में बने बिलों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। विभाग द्वारा अनुमोदित रसायनों और चारे का सावधानी से प्रयोग करने की जानकारी भी दी जा रही है। रसायनों के इस्तेमाल के दौरान बच्चों और पशुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
किसानों को चूहा नियंत्रण की छह दिवसीय प्रक्रिया बताई जा रही है। पहले दिन सक्रिय बिल चिह्नित किए जाते हैं। दूसरे और तीसरे दिन बिना विष वाला चारा रखा जाता है। चौथे दिन अनुमोदित विषाक्त चारे का प्रयोग होता है। पांचवें दिन मृत चूहों का सुरक्षित निस्तारण और छठे दिन बिल बंद किए जाते हैं। बिल दोबारा खुलने पर प्रक्रिया दोहराई जाती है।
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ग्रेटर नोएडा। संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने विशेष अभियान शुरू किया है। इसके तहत जनपद के तीन विकासखंडों की 82 ग्राम पंचायतों में किसानों को चूहा-छछूंदर नियंत्रण के प्रति जागरूक किया जाएगा। यह अभियान एक से 31 अक्तूबर तक चलेगा।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी विवेक दुबे ने बताया कि चूहे और छछूंदर संचारी रोगों के प्रसार में सहायक हो सकते हैं। गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को इनसे होने वाले रोगों की रोकथाम के उपाय बताए जा रहे हैं। किसानों से घरों और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने की अपील की गई है। झाड़ियों और कूड़ा-कचरे में बने बिलों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। विभाग द्वारा अनुमोदित रसायनों और चारे का सावधानी से प्रयोग करने की जानकारी भी दी जा रही है। रसायनों के इस्तेमाल के दौरान बच्चों और पशुओं की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
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किसानों को चूहा नियंत्रण की छह दिवसीय प्रक्रिया बताई जा रही है। पहले दिन सक्रिय बिल चिह्नित किए जाते हैं। दूसरे और तीसरे दिन बिना विष वाला चारा रखा जाता है। चौथे दिन अनुमोदित विषाक्त चारे का प्रयोग होता है। पांचवें दिन मृत चूहों का सुरक्षित निस्तारण और छठे दिन बिल बंद किए जाते हैं। बिल दोबारा खुलने पर प्रक्रिया दोहराई जाती है।
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