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पांच माह में एक हजार प्रसव का रिकार्ड, फिर भी दिया इस्तीफा
Updated Wed, 05 Dec 2018 11:35 PM IST
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पांच माह में 1000 प्रसव कराने का रिकार्ड, फिर भी दिया इस्तीफा
जिला अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की मांग पर अड़े प्रसूति रोग विशेषज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
नगीना। जिला अस्पताल अल-आफिया मांड़ीखेड़ा में कार्यरत प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने दूसरी बार इस्तीफा देने की पेशकश सिविल सर्जन से की है। पता चला है कि उन्होंने जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती करनेे की बात रखी थी जिसेे लेकर कुछ चिकित्सक उनके विरोध में खड़ेे हो गए। इससे आहत उन्होंने दो दिन पहले अपना इस्तीफा (नोटिस) भेज भी दिया है। जून 2018 से जिला अस्पताल में प्रसूति रोग विशेषज्ञ का पदभार संभाल रहे डॉ अनिल कुमार के नाम सबसे ज्यादा प्रसव कराने का रिकॉर्ड है।
जिला अस्पताल में प्रसूति रोग विशेषज्ञ के 4 पद हैं जिसमें डॉ अनिल कुमार के पदभार संभालने के बाद 3 पद खाली ही हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे से प्रसूताओं को खासी परेशानी झेलनी होगी। हालांकि उनके इस्तीफे को पिछली बार की तरह रोककर रखा हुआ है ताकि उनका मन बदल जाए। बुधवार को डॉ. अनिल कुमार ने चलते-चलते अमर उजाला से कहा कि ‘फैसला कर चुका हूं, इस्तीफा दे चुका हूं बाकी काम जिला प्रशासन का है।’
डॉ. अनिल कुमार ने रेगुलर नौकरी छोड़कर ढाई लाख रुपये मासिक वेतन पर जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में पदभार संभाला था। तब जून में केवल 129 डिलीवरी होती थी। कमान संभालने के बाद जुलाई में आंकड़ा 227, अगस्त तथा सितंबर में 228-228, अक्तूबर और नवंबर में 250-250 के करीब प्रसव हुए हैं। ये आंकड़े इस बात की तसदीक करते है कि जो फैसला जिला उपायुक्त नूंह ने लिया था उससे जिले की महिलाओं को बड़ा फायदा हुआ। डॉ अनिल के आने के बाद अकेले जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में 5 महीने में लगभग एक हजार डिलीवरी हुई, उनमें 30 से बच्चे सर्जरी से हुए। पहली बार जिले में बच्चों की डिलीवरी ऑपरेशन से कराई गई। जबकि निजी अस्पतालों में ऐसी एक सर्जरी पर करीब 10 से 20 हजार रुपये का खर्चा होता है। आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल जिले में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 70 फीसदी से अधिक पहुंच चुका है।
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सीएम सहयोगी ने की बात
नूंह जिले के सीएम सहयोगी मोहित सोनी ने सोमवार को डॉ अनिल कुमार से घंटेभर बातचीत की लेकिन बात यहां आकर अटक गई थी कि रोस्टर बनाया जाए और 24 घंटे सर्जरी व डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में डॉक्टरों की तैनाती की जाए।
नौकरी छोड़ने का नोटिस गायनो-कोलॉजिस्ट डॉक्टर अनिल कुमार की तरफ से मिला है। उनसे बात चल रही है शायद मान जाएंगे। - डॉ राजीव बातिश, सिविल सर्जन, नूंह
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जिला अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती की मांग पर अड़े प्रसूति रोग विशेषज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
नगीना। जिला अस्पताल अल-आफिया मांड़ीखेड़ा में कार्यरत प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार ने दूसरी बार इस्तीफा देने की पेशकश सिविल सर्जन से की है। पता चला है कि उन्होंने जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती करनेे की बात रखी थी जिसेे लेकर कुछ चिकित्सक उनके विरोध में खड़ेे हो गए। इससे आहत उन्होंने दो दिन पहले अपना इस्तीफा (नोटिस) भेज भी दिया है। जून 2018 से जिला अस्पताल में प्रसूति रोग विशेषज्ञ का पदभार संभाल रहे डॉ अनिल कुमार के नाम सबसे ज्यादा प्रसव कराने का रिकॉर्ड है।
जिला अस्पताल में प्रसूति रोग विशेषज्ञ के 4 पद हैं जिसमें डॉ अनिल कुमार के पदभार संभालने के बाद 3 पद खाली ही हैं। ऐसे में उनके इस्तीफे से प्रसूताओं को खासी परेशानी झेलनी होगी। हालांकि उनके इस्तीफे को पिछली बार की तरह रोककर रखा हुआ है ताकि उनका मन बदल जाए। बुधवार को डॉ. अनिल कुमार ने चलते-चलते अमर उजाला से कहा कि ‘फैसला कर चुका हूं, इस्तीफा दे चुका हूं बाकी काम जिला प्रशासन का है।’
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डॉ. अनिल कुमार ने रेगुलर नौकरी छोड़कर ढाई लाख रुपये मासिक वेतन पर जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में पदभार संभाला था। तब जून में केवल 129 डिलीवरी होती थी। कमान संभालने के बाद जुलाई में आंकड़ा 227, अगस्त तथा सितंबर में 228-228, अक्तूबर और नवंबर में 250-250 के करीब प्रसव हुए हैं। ये आंकड़े इस बात की तसदीक करते है कि जो फैसला जिला उपायुक्त नूंह ने लिया था उससे जिले की महिलाओं को बड़ा फायदा हुआ। डॉ अनिल के आने के बाद अकेले जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में 5 महीने में लगभग एक हजार डिलीवरी हुई, उनमें 30 से बच्चे सर्जरी से हुए। पहली बार जिले में बच्चों की डिलीवरी ऑपरेशन से कराई गई। जबकि निजी अस्पतालों में ऐसी एक सर्जरी पर करीब 10 से 20 हजार रुपये का खर्चा होता है। आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल जिले में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 70 फीसदी से अधिक पहुंच चुका है।
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सीएम सहयोगी ने की बात
नूंह जिले के सीएम सहयोगी मोहित सोनी ने सोमवार को डॉ अनिल कुमार से घंटेभर बातचीत की लेकिन बात यहां आकर अटक गई थी कि रोस्टर बनाया जाए और 24 घंटे सर्जरी व डिलीवरी के लिए जिला अस्पताल मांड़ीखेड़ा में डॉक्टरों की तैनाती की जाए।
नौकरी छोड़ने का नोटिस गायनो-कोलॉजिस्ट डॉक्टर अनिल कुमार की तरफ से मिला है। उनसे बात चल रही है शायद मान जाएंगे। - डॉ राजीव बातिश, सिविल सर्जन, नूंह