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800 कोरोगेटेड इकाइयां एक सप्ताह तक नहीं खरीदेंगी कच्चा माल
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नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा की करीब 800 कोरोगेटेड बॉक्स बनाने वाली इकाईयां एक सप्ताह तक कच्चा माल नहीं खरीदेंगी। यही नहीं इन इकाईयों की ओर से बनाया गया माल भी सप्लाई नहीं किया जाएगा। एक सप्ताह तक किसी तरह की खरीद-बिक्री नहीं होगी। यह विरोध 31 मार्च तक चलेगा।
कच्चा माल महंगा होने और पेपर मिल की ओर से माल को सीधे एक्सपोर्ट करने की वजह से उद्यमी परेशान हैं। उनकी मांग है कि उचित कीमत पर कच्चा माल मिले ताकि इंडस्ट्री को बचाया जा सके। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ऑर्डर पर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश कोरोगेटेड बॉक्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के आह्वान पर कई स्थानों पर ऐसी इकाईयों में विरोध दर्ज कराया गया। उन्होंने मामले में सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र भाटी का कहना है कि पेपर मिल की ओर से कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी की जा रही है। इससे उनको ऑर्डर लेने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि कोरोगेटेड इंडस्ट्री से करीब 10 हजार अन्य उद्योग जुड़े हैं। वहां बॉक्स की मांग होती है। ऐसी सूरत में एक सप्ताह तक माल खरीदने और बेचने से मना कर दिया है। पहले खरीदे गए माल से ही उत्पादन होगा, लेकिन उसे नहीं बेचा जाएगा।
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एसोसिएशन का कहना है कि यदि हम बॉक्स की कीमत बढ़ाएंगे तो जरूरी सामान भी महंगे हो जाएंगे। इसका असर आम आदमी पर पड़ेगा। यही नहीं तय सीमा से ज्यादा कीमत पर बिक्री नहीं होती है, क्योंकि दूसरे उद्योग अपने उत्पाद की कीमत को नहीं बढ़ा पाएंगे। इससे उन पर भी असर होगा। इस वजह से वह दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं और हमारा नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि विदेशों में माल के सीधे निर्यात की वजह से कीमत में बढ़ोतरी हुई है। इसे कम किया जाना चाहिए।
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कच्चा माल महंगा होने और पेपर मिल की ओर से माल को सीधे एक्सपोर्ट करने की वजह से उद्यमी परेशान हैं। उनकी मांग है कि उचित कीमत पर कच्चा माल मिले ताकि इंडस्ट्री को बचाया जा सके। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर ऑर्डर पर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश कोरोगेटेड बॉक्स मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के आह्वान पर कई स्थानों पर ऐसी इकाईयों में विरोध दर्ज कराया गया। उन्होंने मामले में सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है।
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एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र भाटी का कहना है कि पेपर मिल की ओर से कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी की जा रही है। इससे उनको ऑर्डर लेने में परेशानी हो रही है। उनका कहना है कि कोरोगेटेड इंडस्ट्री से करीब 10 हजार अन्य उद्योग जुड़े हैं। वहां बॉक्स की मांग होती है। ऐसी सूरत में एक सप्ताह तक माल खरीदने और बेचने से मना कर दिया है। पहले खरीदे गए माल से ही उत्पादन होगा, लेकिन उसे नहीं बेचा जाएगा।
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एसोसिएशन का कहना है कि यदि हम बॉक्स की कीमत बढ़ाएंगे तो जरूरी सामान भी महंगे हो जाएंगे। इसका असर आम आदमी पर पड़ेगा। यही नहीं तय सीमा से ज्यादा कीमत पर बिक्री नहीं होती है, क्योंकि दूसरे उद्योग अपने उत्पाद की कीमत को नहीं बढ़ा पाएंगे। इससे उन पर भी असर होगा। इस वजह से वह दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं और हमारा नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि विदेशों में माल के सीधे निर्यात की वजह से कीमत में बढ़ोतरी हुई है। इसे कम किया जाना चाहिए।