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एक दिन में पहुंचें 70 शव तो श्मशान घाट का गेट किया बंद
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नोएडा के सेक्टर-94 स्थित शमशान घाट पर शव लेकर पहुंचीं एंबुलेंस।
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नोएडा। कोरोना महामारी के कारण हालात बद से बदतर हो गए हैं। संक्रमण से मौत का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है। इस कारण सेक्टर-94 स्थित अंतिम निवास में शव का दाह संस्कार करने के लिए जगह कम पड़ रही है। बृहस्पतिवार को करीब 70 शव पहुंचने के बाद शाम को गेट बंद कर दिया गया। श्मशान घाट का संचालन कर रही संस्था के सदस्यों ने लोगों से आग्रह किया कि एक तो अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं बची है। वहीं, दूसरी ओर सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं हो सकता है। ऐसे में शुक्रवार सुबह ही अंतिम संस्कार हो सकेगा। वहीं, दिन में लाए गए कई शवों का भी देर शाम तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका।
हालात ये रहे कि दोपहर एक बजे तक समस्त 24 प्लेटफार्म पर शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद भी लोग शव लेकर पहुंचते रहे। ऐसे में प्लेटफार्म के पास खाली जगह में अंतिम संस्कार करना पड़ा। वहीं, शाम तक प्लेटफार्म के पास भी अंतिम संस्कार करने के लिए जगह नहीं बची। शवों का अंतिम संस्कार करने के मामले में सभी रिकॉर्ड टूट गए। दोपहर एक बजे तक एक भी प्लेटफार्म ऐसा नहीं बचा था, जिस पर चिता नहीं जल रही थी। इस दौरान 15 से अधिक शवों के साथ खड़े परिजन अंतिम संस्कार के इंतजार में थे। जबकि, श्मशान घाट के अंदर एवं बाहर कई एंबुलेंस शव लेकर खड़ी हुई थी और एंबुलेंसों का शव लेकर आने का सिलसिला जारी था।
श्मशान घाट का संचालन कर रही टीम के एक सदस्य ने बताया कि करीब 70 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। इससे पहले यहां कभी भी एक दिन में इतने शव नहीं पहुंचे। देर शाम तक 70 शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद सफाई और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें समय लगता है। ऐसे में 70 शवों के बाद लोगों से शुक्रवार को आने का आग्रह किया है।
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सीएनजी चालित भट्टी निरंतर नहीं चल रही
श्मशान घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए सीएनजी चलित दो भट्टी भी हैं, लेकिन इनमें एक दिन में पांच-पांच शवों का ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। क्षमता से अधिक चलाने का प्रयास करने पर ये बीच-बीच में बंद हो रही हैं। बुधवार देर शाम भी दोनों बंद हो गई थीं। इस कारण बृहस्पतिवार को इन भट्टियों को क्षमता से अधिक नहीं चलाया गया। भट्टी में एक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए दो घंटे समय लगता है और इसके बाद करीब 45 मिनट तक ठंडा होने के लिए खाली रखना होता है।
धार्मिक परंपरा भी टूटनी शुरू
कोरोना महामारी में मृत्यु दर बढ़ने पर श्मशान घाट में प्लेटफार्म से अस्थियां उठाने के मामले में धार्मिक परंपरा भी टूट रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलवार एवं शनिवार को अस्थियां नहीं उठाई जाती हैं, लेकिन श्मशान घाट में शवों के अंतिम संस्कार का भार बढ़ने के कारण रोजाना अस्थियां उठवाई जा रही हैं। श्मशान घाट का संचालन कर रही टीम के सदस्य ने बताया कि जो लोग मंगलवार एवं शनिवार को अस्थियां विसर्जन नहीं करते हैं, उनकी सुविधा के लिए श्मशान घाट में अस्थियां रखने के लिए लॉकर बना रखे हैं।
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हालात ये रहे कि दोपहर एक बजे तक समस्त 24 प्लेटफार्म पर शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद भी लोग शव लेकर पहुंचते रहे। ऐसे में प्लेटफार्म के पास खाली जगह में अंतिम संस्कार करना पड़ा। वहीं, शाम तक प्लेटफार्म के पास भी अंतिम संस्कार करने के लिए जगह नहीं बची। शवों का अंतिम संस्कार करने के मामले में सभी रिकॉर्ड टूट गए। दोपहर एक बजे तक एक भी प्लेटफार्म ऐसा नहीं बचा था, जिस पर चिता नहीं जल रही थी। इस दौरान 15 से अधिक शवों के साथ खड़े परिजन अंतिम संस्कार के इंतजार में थे। जबकि, श्मशान घाट के अंदर एवं बाहर कई एंबुलेंस शव लेकर खड़ी हुई थी और एंबुलेंसों का शव लेकर आने का सिलसिला जारी था।
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श्मशान घाट का संचालन कर रही टीम के एक सदस्य ने बताया कि करीब 70 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। इससे पहले यहां कभी भी एक दिन में इतने शव नहीं पहुंचे। देर शाम तक 70 शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार के बाद सफाई और सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें समय लगता है। ऐसे में 70 शवों के बाद लोगों से शुक्रवार को आने का आग्रह किया है।
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सीएनजी चालित भट्टी निरंतर नहीं चल रही
श्मशान घाट में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए सीएनजी चलित दो भट्टी भी हैं, लेकिन इनमें एक दिन में पांच-पांच शवों का ही अंतिम संस्कार किया जा सकता है। क्षमता से अधिक चलाने का प्रयास करने पर ये बीच-बीच में बंद हो रही हैं। बुधवार देर शाम भी दोनों बंद हो गई थीं। इस कारण बृहस्पतिवार को इन भट्टियों को क्षमता से अधिक नहीं चलाया गया। भट्टी में एक शव का अंतिम संस्कार करने के लिए दो घंटे समय लगता है और इसके बाद करीब 45 मिनट तक ठंडा होने के लिए खाली रखना होता है।
धार्मिक परंपरा भी टूटनी शुरू
कोरोना महामारी में मृत्यु दर बढ़ने पर श्मशान घाट में प्लेटफार्म से अस्थियां उठाने के मामले में धार्मिक परंपरा भी टूट रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मंगलवार एवं शनिवार को अस्थियां नहीं उठाई जाती हैं, लेकिन श्मशान घाट में शवों के अंतिम संस्कार का भार बढ़ने के कारण रोजाना अस्थियां उठवाई जा रही हैं। श्मशान घाट का संचालन कर रही टीम के सदस्य ने बताया कि जो लोग मंगलवार एवं शनिवार को अस्थियां विसर्जन नहीं करते हैं, उनकी सुविधा के लिए श्मशान घाट में अस्थियां रखने के लिए लॉकर बना रखे हैं।