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झूठी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:19 PM IST
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झूठी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई
गुरुग्राम। गांव चौमा में गोशाला की जमीन पर कब्जे के मामले में झूठी रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मार्च 2018 की ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा निगम की रिपोर्ट को फर्जी करार देते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन इस मामले में 9 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो गए हैं। इसके विपरीत नगर निगम ने एक आरटीआई के दिए जवाब में रिपोर्ट झूठी होने से इंकार कर दिया है।
चौमा गांव की गोशाला के करीब 4 हजार गज पर वैध कब्जे के बाबत सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण लांबा ने मार्च में सीएम विंडो पर डाली शिकायत के साथ 10 लाख रुपये का चेक भी जमा करते हुए कहा था कि अगर उनकी शिकायत झूठी है, तो चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करा दिया जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। 31 मार्च, 2018 की ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मनोहर लाल ने निगम की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कब्जाधारियों से मिलीभगत करने वाले निगम के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की बात कही थी। बता दें कि शिकायत के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने कब्जा हटाने के बजाय लांबा की शिकायत को ही झूठा करार दे दिया था।
ग्रीवेंस कमेटी में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद इस बाबत कोई कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता रमेश कुमार ने निगम की गलत रिपोर्ट और अधिकारी का नाम आरटीआई के जरिये पूछा। इसके जवाब में निगम ने साफ कहा कि निगम अधिकारियों ने कोई भी रिपोर्ट गलत नहीं दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता रमेश कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री ने ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में साफतौर पर रिपोर्ट को झूठा करार दिया था और शिकायत के साथ जमा दस लाख रुपये वापस कर दिए गए। यदि शिकायत झूठी थी तो शिकायतकर्ता की रकम क्यों लौटाई गई। रिपोर्ट झूठी थी तो आज तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी जान बूझकर मुख्यमंत्री के आदेश को नहीं मान रहे हैं।
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गुरुग्राम। गांव चौमा में गोशाला की जमीन पर कब्जे के मामले में झूठी रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मार्च 2018 की ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा निगम की रिपोर्ट को फर्जी करार देते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई थी, लेकिन इस मामले में 9 महीने बाद भी कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो गए हैं। इसके विपरीत नगर निगम ने एक आरटीआई के दिए जवाब में रिपोर्ट झूठी होने से इंकार कर दिया है।
चौमा गांव की गोशाला के करीब 4 हजार गज पर वैध कब्जे के बाबत सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण लांबा ने मार्च में सीएम विंडो पर डाली शिकायत के साथ 10 लाख रुपये का चेक भी जमा करते हुए कहा था कि अगर उनकी शिकायत झूठी है, तो चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करा दिया जाए और उन पर कार्रवाई की जाए। 31 मार्च, 2018 की ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में मनोहर लाल ने निगम की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कब्जाधारियों से मिलीभगत करने वाले निगम के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की बात कही थी। बता दें कि शिकायत के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने कब्जा हटाने के बजाय लांबा की शिकायत को ही झूठा करार दे दिया था।
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ग्रीवेंस कमेटी में मुख्यमंत्री के आदेश के बाद इस बाबत कोई कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता रमेश कुमार ने निगम की गलत रिपोर्ट और अधिकारी का नाम आरटीआई के जरिये पूछा। इसके जवाब में निगम ने साफ कहा कि निगम अधिकारियों ने कोई भी रिपोर्ट गलत नहीं दी थी। आरटीआई कार्यकर्ता रमेश कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री ने ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में साफतौर पर रिपोर्ट को झूठा करार दिया था और शिकायत के साथ जमा दस लाख रुपये वापस कर दिए गए। यदि शिकायत झूठी थी तो शिकायतकर्ता की रकम क्यों लौटाई गई। रिपोर्ट झूठी थी तो आज तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी जान बूझकर मुख्यमंत्री के आदेश को नहीं मान रहे हैं।
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