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आपसी सहमति से कराया 345 करोड़ के संपत्ति विवाद का समाधान
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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) का कंसीलिएशन फोरम अभी तक आपसी सहमति से 345 करोड़ की संपत्ति के विवाद का समाधान करा चुका है। ज्यादातर शिकायतें कब्जे में देरी, रजिस्ट्री में देरी, रखरखाव की कमी आदि समस्याओं से जुड़ी थी। फोरम का दावा है कि ज्यादातर शिकायतों को दो से तीन तारीख में निस्तारित किया गया है। अहम बात यह है कि कुल 1150 में से 539 शिकायतें गौड़ संस, सुपरटेक और उप्पल चड्ढा ग्रुप बिल्डर से थीं।
यूपी रेरा ने जनवरी, 2019 में कंसीलिएशन फोरम का गठन किया था। लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में अलग-अलग फोरम बनाए गए हैं। ग्रेटर नोएडा के फोरम में एनसीआर के प्रोजेक्ट के खरीदारों की समस्याएं सुनी जाती हैं। यहां बिल्डर और खरीदारों के बीच आपसी सहमति से शिकायत का निस्तारण कराने प्रयास किया जाता है। अपने तीन वर्ष और दो माह के कार्यालय में कंसीलिएशन फोरम अभी तक 1150 शिकायतों का आपसी सहमति से निस्तारण करा चुका है। जबकि 200 से अधिक शिकायतों का आपसी सहमति से समझौता कराने का प्रयास चल रहा है।
फोरम के कंसीलिएटर आरडी पालीवाल ने बताया कि अधिकांश विवाद कब्जे देने में देरी, रजिस्ट्री में देरी, वाहन पार्किंग स्थल निर्धारण, परियोजना के रख-रखाव में कमी, पावर बैकअप की शिकायत, विभिन्न प्रकार के शुल्कों से संबंधित विवाद, कब्जे में विलंब पर ब्याज का भुगतान आदि से संबंधित होते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक करीब 345 करोड़ की संपत्ति की शिकायतों का निस्तारण कराया गया हैै।
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कब्जा दिलाने से जुड़ी होती है 70 प्रतिशत शिकायतें
फोरम में आने वाली ज्यादातर शिकायतें कब्जा दिलाने से जुड़ी होती है। करीब 70 प्रतिशत शिकायतों में खरीदारों को कब्जा नहीं मिलने से परेशान होती है। इनमें ज्यादातर खरीदार गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर के प्रोजेक्टों के होते हैं। खरीदार वेबसाइट पर जाकर फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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यूपी रेरा ने जनवरी, 2019 में कंसीलिएशन फोरम का गठन किया था। लखनऊ और ग्रेटर नोएडा में अलग-अलग फोरम बनाए गए हैं। ग्रेटर नोएडा के फोरम में एनसीआर के प्रोजेक्ट के खरीदारों की समस्याएं सुनी जाती हैं। यहां बिल्डर और खरीदारों के बीच आपसी सहमति से शिकायत का निस्तारण कराने प्रयास किया जाता है। अपने तीन वर्ष और दो माह के कार्यालय में कंसीलिएशन फोरम अभी तक 1150 शिकायतों का आपसी सहमति से निस्तारण करा चुका है। जबकि 200 से अधिक शिकायतों का आपसी सहमति से समझौता कराने का प्रयास चल रहा है।
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फोरम के कंसीलिएटर आरडी पालीवाल ने बताया कि अधिकांश विवाद कब्जे देने में देरी, रजिस्ट्री में देरी, वाहन पार्किंग स्थल निर्धारण, परियोजना के रख-रखाव में कमी, पावर बैकअप की शिकायत, विभिन्न प्रकार के शुल्कों से संबंधित विवाद, कब्जे में विलंब पर ब्याज का भुगतान आदि से संबंधित होते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक करीब 345 करोड़ की संपत्ति की शिकायतों का निस्तारण कराया गया हैै।
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कब्जा दिलाने से जुड़ी होती है 70 प्रतिशत शिकायतें
फोरम में आने वाली ज्यादातर शिकायतें कब्जा दिलाने से जुड़ी होती है। करीब 70 प्रतिशत शिकायतों में खरीदारों को कब्जा नहीं मिलने से परेशान होती है। इनमें ज्यादातर खरीदार गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, मेरठ और बुलंदशहर के प्रोजेक्टों के होते हैं। खरीदार वेबसाइट पर जाकर फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।