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Noida News: सोलर ईकोसिस्टम विकसित करने में खर्च होंगे 3000 करोड़
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- आरपी-संजीव गोयनका समूह की परियोजना के लिए 100 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा यीडा
- मिंडा कॉरपोरेशन को भी इलेक्टि्रक वायर और सेंसर उत्पादन के लिए मिलेगी जमीन
फोटो--
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में एक ही जगह पर सौर पैनल से जुड़े उपकरणों के अलावा ऊर्जा को स्टोर करने प्लांट भी बनाया जाएगा। इसके लिए यमुना प्राधिकरण के सहयोग से निजी कंपनी एक इंटीग्रेटेड सोलर ईकोसिस्टम विकसित करेगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 3000 करोड़ रुपये का निवेश संभावित है। इसके लिए 100 एकड़ जमीन यमुना प्राधिकरण सेक्टर-8डी में देगा।
बुधवार को यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए आशय पत्र आरपी-संजीव गोयनका समूह के प्रतिनिधियों को सौंपा। सीईओ ने बताया कि 60 मेगावाट क्षमता का ऊर्जा स्टोर करने के लिए ईएसएस प्लांट के साथ कंपनी तीन गीगावाट क्षमता की सोलर सेल उत्पादन यूनिट लगाएगी। यह काम कंपनी इंटीग्रेटेड सोलर इकोसिस्टम हब स्थापित करके करेगी। कंपनी का प्रस्ताव इस प्रोजेक्ट में करीब 3,000 करोड़ से अधिक के निवेश का है। यह प्रोजेक्ट नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह प्रोजेक्ट टॉपकॉन और पेरोव्स्काइट-टेंडेम सेल जैसी उन्नत सौर तकनीकों पर काम करेगी।
यह तकनीक सोलर पैनल की दक्षता 28-30 प्रतिशत तक बढ़ा देती है। बिजली की लागत में भी 10-15 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है। सीईओ को कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रोजेक्ट में 1,200 से अधिक प्रत्यक्ष और 4,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होंगे। कंपनी यहां नवीकरणीय ऊर्जा के अलावा सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी तकनीक और कौशल विकास पर भी काम करने की योजना पर काम कर रही है। इस दौरान प्राधिकरण के ओएसडी शैलेंद्र भाटिया भी मौजूद रहे।
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इनसेट-
500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी मिंडा
यमुना सिटी में मिंडा कॉर्पोरेशन सेंसर और कनेक्टर के साथ इलैक्टि्रक वायर बनाने के प्रोजेक्ट पर काम करेगा। बुधवार को सीईओ राकेश कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट को जमीन उपलब्ध कराने के लिए आशय पत्र सौंपा। कंपनी को करीब 22 एकड़ जमीन सेक्टर-10 में उपलब्ध कराई जानी है। कंपनी का कहना है कि वाहनों की बढ़ती जटिलता और उन्नत ऑटोमोटिव तकनीकों के आने से पूरी दुनिया में ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस मार्केट बढ़ा है। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), ऑटोमेटिक ड्राइविंग तकनीक जैसे वाहनों ने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। इस प्रोजेक्ट से 2200 प्रत्यक्ष और 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। कंपनी 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। इसमें से प्लांट और मशीनरी पर करीब 250 करोड़ रुपये निवेश होना है।
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- मिंडा कॉरपोरेशन को भी इलेक्टि्रक वायर और सेंसर उत्पादन के लिए मिलेगी जमीन
फोटो
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में एक ही जगह पर सौर पैनल से जुड़े उपकरणों के अलावा ऊर्जा को स्टोर करने प्लांट भी बनाया जाएगा। इसके लिए यमुना प्राधिकरण के सहयोग से निजी कंपनी एक इंटीग्रेटेड सोलर ईकोसिस्टम विकसित करेगी। इस प्रोजेक्ट पर करीब 3000 करोड़ रुपये का निवेश संभावित है। इसके लिए 100 एकड़ जमीन यमुना प्राधिकरण सेक्टर-8डी में देगा।
बुधवार को यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए आशय पत्र आरपी-संजीव गोयनका समूह के प्रतिनिधियों को सौंपा। सीईओ ने बताया कि 60 मेगावाट क्षमता का ऊर्जा स्टोर करने के लिए ईएसएस प्लांट के साथ कंपनी तीन गीगावाट क्षमता की सोलर सेल उत्पादन यूनिट लगाएगी। यह काम कंपनी इंटीग्रेटेड सोलर इकोसिस्टम हब स्थापित करके करेगी। कंपनी का प्रस्ताव इस प्रोजेक्ट में करीब 3,000 करोड़ से अधिक के निवेश का है। यह प्रोजेक्ट नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह प्रोजेक्ट टॉपकॉन और पेरोव्स्काइट-टेंडेम सेल जैसी उन्नत सौर तकनीकों पर काम करेगी।
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यह तकनीक सोलर पैनल की दक्षता 28-30 प्रतिशत तक बढ़ा देती है। बिजली की लागत में भी 10-15 प्रतिशत की कमी आने की उम्मीद है। सीईओ को कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रोजेक्ट में 1,200 से अधिक प्रत्यक्ष और 4,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होंगे। कंपनी यहां नवीकरणीय ऊर्जा के अलावा सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी तकनीक और कौशल विकास पर भी काम करने की योजना पर काम कर रही है। इस दौरान प्राधिकरण के ओएसडी शैलेंद्र भाटिया भी मौजूद रहे।
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इनसेट-
500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी मिंडा
यमुना सिटी में मिंडा कॉर्पोरेशन सेंसर और कनेक्टर के साथ इलैक्टि्रक वायर बनाने के प्रोजेक्ट पर काम करेगा। बुधवार को सीईओ राकेश कुमार सिंह ने प्रोजेक्ट को जमीन उपलब्ध कराने के लिए आशय पत्र सौंपा। कंपनी को करीब 22 एकड़ जमीन सेक्टर-10 में उपलब्ध कराई जानी है। कंपनी का कहना है कि वाहनों की बढ़ती जटिलता और उन्नत ऑटोमोटिव तकनीकों के आने से पूरी दुनिया में ऑटोमोटिव वायरिंग हार्नेस मार्केट बढ़ा है। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), ऑटोमेटिक ड्राइविंग तकनीक जैसे वाहनों ने इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है। इस प्रोजेक्ट से 2200 प्रत्यक्ष और 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। कंपनी 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। इसमें से प्लांट और मशीनरी पर करीब 250 करोड़ रुपये निवेश होना है।