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संशोधित खबर::: प्राधिकरण की लापरवाही से तोड़ी जाएंगी किसानों की 28 दुकान
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संशोधित खबर::: प्राधिकरण की लापरवाही से तोड़ी जाएंगी किसानों की 28 दुकान
- सूरजपुर में किसान लक्ष्मण सिंह की 4258 वर्गमीटर जमीन का मामला
- जमीन पर कोई भी अधिसूचना जारी न होने की दी गई थी गलत जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही से सूरजपुर में 28 दुकानों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में यहां दुकानों का निर्माण करने वाला किसान और उसका परिवार परेशान है और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि यदि जमीन पर कोई अधिसूचना जारी थी तो इसे निर्माण से पहले क्यों नहीं बताया, जबकि इसके लिए पत्राचार के अलावा सूचना के अधिकार से भी जानकारी मांगी गई थी, और गलत जानकारी दे दी गई।
प्राधिकरण ने दुकानों को तोड़ने का नोटिस जारी किया है। ऐसे में किसान ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री और सीईओ को टैग किया है कि अधिकारी उनको आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। दरअसल, मलकपुर निवासी लक्ष्मण सिंह की सूरजपुर में खाता संख्या 390 में 4258 वर्गमीटर जमीन है। इस पर किसान का दावा है कि प्राधिकरण ने गठन के बाद स्वत: ही उक्त जमीन को अधिग्रहण से छोड़ने की बात कही थी। हालांकि इस जमीन पर फैक्टरी के जर्जर होने के बाद किसान ने उसे बनाने के बारे में जानकारी के लिए प्राधिकरण से पत्राचार किया और उसमें पूछा गया कि उक्त जमीन किसी अधिसूचित क्षेत्र में तो नहीं है या फिर इस पर कोई परियोजना तो नहीं है। मगर 9 बार पत्र दिए गए और एक बार भी जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद किसान ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। इसमें प्राधिकरण अधिकारियों ने संबंधित खाता संख्या पर जवाब दिया कि यहां पर न तो कोई परियोजना है और न ही उस क्षेत्र में अधिसूचना जारी की गई है। इसके बाद किसान ने जमीन पर 28 दुकान बनाकर किराए पर उठा दीं। मगर जब प्राधिकरण अधिकारियों ने अब उन्हीं दुकानों को अधिसूचित क्षेत्र में होने का दावा करते हुए सील कर दिया और तोड़ने का नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक दुकान सील करने के बाद सीलिंग पत्र नहीं दिया गया है। किसान और उनका परिवार पिछले काफी दिन से परेशान घूम रहा है।
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क्या है प्रकरण
सूरजपुर में खाता संख्या 390 के अधिग्रहण के लिए प्राधिकरण ने साल-2004 में प्रक्रिया शुरू की थी। इसके विरोध में किसान लक्ष्मण व अन्य किसान हाईकोर्ट चले गए। अदालत ने जुलाई-2012 में उक्त जमीन का अधिग्रहण निरस्त करते हुए किसानों का वापस नाम चढ़ाने का आदेश दिया। इसके बाद जमीन से प्राधिकरण का नाम हटाकर किसानों के नाम दर्ज किए गए।
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390 खसरे के आसपास हो रहा अवैध निर्माण
प्राधिकरण के अधिकारियों ने खसरे नंबर 390 पर तो जांच करके सीलिंग की कार्रवाई कर दी। मगर उसके आसपास की तालाब की जमीन है और वहां पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। मगर शिकायत के बावजूद वहां पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं दुकानों के निर्माण की भी आसपास के लोगों ने शुरूआत में शिकायत की थी, मगर तब अधिकारियों ने इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। ऐसे में अब संंबंधित इंजीनियरों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
प्राधिकरण के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि जिस जमीन पर निर्माण कराया गया है वह अधिसूचित क्षेत्र में है। वहीं जिस जमीन का अधिग्रहण रदद है। वह अलग है। इसलिए सीलिंग की गई है। अभी जांच चल रही है।
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- सूरजपुर में किसान लक्ष्मण सिंह की 4258 वर्गमीटर जमीन का मामला
- जमीन पर कोई भी अधिसूचना जारी न होने की दी गई थी गलत जानकारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही से सूरजपुर में 28 दुकानों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में यहां दुकानों का निर्माण करने वाला किसान और उसका परिवार परेशान है और अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं कि यदि जमीन पर कोई अधिसूचना जारी थी तो इसे निर्माण से पहले क्यों नहीं बताया, जबकि इसके लिए पत्राचार के अलावा सूचना के अधिकार से भी जानकारी मांगी गई थी, और गलत जानकारी दे दी गई।
प्राधिकरण ने दुकानों को तोड़ने का नोटिस जारी किया है। ऐसे में किसान ने ट्वीट करके मुख्यमंत्री और सीईओ को टैग किया है कि अधिकारी उनको आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। दरअसल, मलकपुर निवासी लक्ष्मण सिंह की सूरजपुर में खाता संख्या 390 में 4258 वर्गमीटर जमीन है। इस पर किसान का दावा है कि प्राधिकरण ने गठन के बाद स्वत: ही उक्त जमीन को अधिग्रहण से छोड़ने की बात कही थी। हालांकि इस जमीन पर फैक्टरी के जर्जर होने के बाद किसान ने उसे बनाने के बारे में जानकारी के लिए प्राधिकरण से पत्राचार किया और उसमें पूछा गया कि उक्त जमीन किसी अधिसूचित क्षेत्र में तो नहीं है या फिर इस पर कोई परियोजना तो नहीं है। मगर 9 बार पत्र दिए गए और एक बार भी जवाब नहीं दिया गया।
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इसके बाद किसान ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी। इसमें प्राधिकरण अधिकारियों ने संबंधित खाता संख्या पर जवाब दिया कि यहां पर न तो कोई परियोजना है और न ही उस क्षेत्र में अधिसूचना जारी की गई है। इसके बाद किसान ने जमीन पर 28 दुकान बनाकर किराए पर उठा दीं। मगर जब प्राधिकरण अधिकारियों ने अब उन्हीं दुकानों को अधिसूचित क्षेत्र में होने का दावा करते हुए सील कर दिया और तोड़ने का नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक दुकान सील करने के बाद सीलिंग पत्र नहीं दिया गया है। किसान और उनका परिवार पिछले काफी दिन से परेशान घूम रहा है।
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क्या है प्रकरण
सूरजपुर में खाता संख्या 390 के अधिग्रहण के लिए प्राधिकरण ने साल-2004 में प्रक्रिया शुरू की थी। इसके विरोध में किसान लक्ष्मण व अन्य किसान हाईकोर्ट चले गए। अदालत ने जुलाई-2012 में उक्त जमीन का अधिग्रहण निरस्त करते हुए किसानों का वापस नाम चढ़ाने का आदेश दिया। इसके बाद जमीन से प्राधिकरण का नाम हटाकर किसानों के नाम दर्ज किए गए।
390 खसरे के आसपास हो रहा अवैध निर्माण
प्राधिकरण के अधिकारियों ने खसरे नंबर 390 पर तो जांच करके सीलिंग की कार्रवाई कर दी। मगर उसके आसपास की तालाब की जमीन है और वहां पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। मगर शिकायत के बावजूद वहां पर अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं दुकानों के निर्माण की भी आसपास के लोगों ने शुरूआत में शिकायत की थी, मगर तब अधिकारियों ने इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। ऐसे में अब संंबंधित इंजीनियरों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
क्या कहते हैं अधिकारी
प्राधिकरण के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि जिस जमीन पर निर्माण कराया गया है वह अधिसूचित क्षेत्र में है। वहीं जिस जमीन का अधिग्रहण रदद है। वह अलग है। इसलिए सीलिंग की गई है। अभी जांच चल रही है।