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80 फीसदी इमारतों में मानकों के अनुरूप नहीं चल रहा काम
Updated Tue, 09 Oct 2018 06:36 AM IST
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नोएडा। जब-जब कोई बड़ी घटना होती है, उसके बाद ही अधिकारियों की नींद टूटती है, जबकि समय-समय पर ऐसे मुद्दों को लगातार सामाजिक संगठन उठाते रहते हैं, मगर बिल्डरों के दबाव में या फिर अन्य कारणों के चलते अधिकारी लापरवाही देखने के बाद भी बिल्डरों पर कार्रवाई नहीं कर पाते। सेक्टर-94 में निर्माणाधीन भवन में ही नहीं, बल्कि जिले की करीब 80 फीसदी इमारतों में मानकों को धता बताते हुए काम किया जा रहा है।
जिले में मौजूदा समय में 100 से अधिक बिल्डर हैं और करीब 250 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, मगर अधिकतर प्रोजेक्ट पर सुरक्षा को धता बताते हुए श्रमिकों की जान से खिलवाड़ करते हुए काम कराया जा रहा है। एकाध भवन को छोड़ दिया जाए, तो किसी पर जाल या अन्य सुरक्षा के उपाय नहीं मिलते हैं।
इसी तरह एनजीटी के निर्देशों का पालन करने के लिए बिल्डरों को साइट पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए थे, मगर काम करते समय खूब धूल उड़ती है और प्रशासन-प्राधिकरण समेत सभी विभागों को सूचना दी जाती है। इसके बाद भी धूल उड़ती है और मानकों को पूरा किए बिना ही काम कराए जाते हैं।
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रविवार को हुई घटना के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को सख्ती से सुरक्षा संबंधित निर्देशों का पालन कराने के निर्देश दिए हैं, जबकि इससे पहले भी कई बार जिलाधिकारी की ओर से संबंधित अधिकारियों को गाइड लाइन भेजकर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। सोमवार को कई विभाग के अधिकारियों ने ऐसे निर्माणाधीन भवनों का निरीक्षण कर निर्देश दिए हैं कि वह सुरक्षा मानकों का पालन कराएं। अगर ऐसा नहीं होता है तो काम बंद करा दिया जाएगा। श्रम विभाग ने ठंडे पड़े श्रमिक पंजीकरण अभियान को मंगलवार से फिर शुरू करने की बात कही है।
बंद रहा काम, घटनास्थल को किया सील
पुलिस, श्रम विभाग, प्रशासन के अधिकारियों ने किया मौका मुआयना
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। सेक्टर-39 कोतवाली क्षेत्र स्थित सेक्टर-94 के निर्माणाधीन बीपीटीपी कैपिटल सिटी प्रोजेक्ट में रविवार को हुई घटना के बाद सोमवार को काम बंद रहा। पुलिस ने सोमवार तड़के ही घेराबंदी करके घटनास्थल को सील कर दिया। कई अधिकारियों ने भ्रमण कर आला अफसरों को सूचना भी दी।
उधर, श्रमिक संगठनों का आरोप है कि यदि पुलिस-प्रशासन और श्रम विभाग पहले से ही सचेत रहते, तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। सूत्रों का दावा है कि कुछ दिन पहले ही श्रम विभाग समेत कई अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया था और उसमें खामियां भी पाई गई थीं, लेकिन उनको दूर क्यों नहीं कराया गया और संबंधित संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह बड़ा सवाल है।
रविवार को पुलिस-प्रशासन समेत अन्य विभाग घटना को समेटने में लगे रहे और कार्रवाई के नाम पर केवल निर्माण करने वाली आहलुवालिया कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से भ्रमण किया और भवन के आसपास के क्षेत्र को सील करा दिया गया। पुलिस, श्रम विभाग, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और जो-जो खामियां थीं, उनकी रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को भेजनी शुरू कर दी। हालांकि आहलुवालिया कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी मानकों का पालन करते हुए काम कराया जा रहा था।
पुलिस के रडार पर आए 10 लोग
कार्रवाई का खाका तैयार, लापरवाही के आधार पर किया जाएगा दोष सिद्ध
मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख की आर्थिक सहायता आज से मिलेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। सेक्टर-94 स्थित निर्माणाधीन बिल्डिंग में शटरिंग गिरने से मजदूरों की मौत के मामले में बिल्डर, ठेकेदार, प्रोजेक्ट मैनेजर समेत 10 लोगों पर कार्रवाई का खाका तैयार कर लिया गया है। इन सभी को चिह्नित करके गैर-इरादतन हत्या के मुकदमे में शामिल कर लिया जाएगा। उधर, फैक्टरी एक्ट और श्रम विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंगलवार से देनी शुरू कर दी जाएगी।
दरअसल, बीपीटीपी कैपिटल सिटी में निर्माण कार्य आहलुवालिया कांट्रैक्टस इंडिया लिमिटेड कर रही थी। रविवार को काम करते हुए शटरिंग गिर गई और 4 मजदूरों की मौत हो गई थी। पुलिस ने बिल्डर, ठेकेदार, प्रोजैक्ट मैनेजर समेत 10 लोगों को चिह्नित किया है और किस-किस ने लापरवाही बरती है उसकी चेन जोड़ी जा रही है, जिससे उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के पीछे केवल लापरवाही है। अगर संबंधित लोग सतर्कता बरतते तो 4 लोगों की मौत नहीं होती। इन सभी की लापरवाही का खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा। उधर, पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए हैं।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख रुपये देने की पूरी तैयारी कर ली गई है और मंगलवार से परिजनों को सहायता राशि का भुगतान करना शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों की मानें तो 5 लाख रुपये श्रम विभाग की ओर से सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं, जबकि फैक्टरी एक्ट के तहत 8-8 लाख रुपये प्रत्येक मृतक के परिजनों को दिए जाएंगे।
20-20 लाख मुआवजा और उच्चस्तरीय जांच की मांग
चार लोगों की मौत की जिम्मेदार आहलुवालिया कांट्रैक्टस इंडिया लिमिटेड कंपनी है। उसके द्वारा श्रम कानूनों की अनदेखी करते हुए सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था, जिसके चलते श्रमिकों की मौत हो गई। यह बात सोमवार को प्रेस को जारी बयान में सीटू के जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कही। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा और संबंधित कंपनी के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही सभी घायलों का पूरा इलाज कराया जाए और श्रमिक विभाग ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए।
श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे श्रमिक
मृतक के परिजनों को 13-13 लाख रुपये की सहायता राशि मंगलवार से मुहैया करानी शुरू कर दी जाएगी। सभी श्रमिक श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे और उनको 5-5 लाख रुपये प्रदेश सरकार की श्रम विभाग में चल रही योजनाओं के तहत दिए जाएंगे, जबकि फैक्टरी एक्ट के तहत 8-8 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसमें उम्र के अनुसार भी कुछ रुपया घट या बढ़ सकता है।
-शैलेंद्र कुमार मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट, नोएडा
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जिले में मौजूदा समय में 100 से अधिक बिल्डर हैं और करीब 250 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, मगर अधिकतर प्रोजेक्ट पर सुरक्षा को धता बताते हुए श्रमिकों की जान से खिलवाड़ करते हुए काम कराया जा रहा है। एकाध भवन को छोड़ दिया जाए, तो किसी पर जाल या अन्य सुरक्षा के उपाय नहीं मिलते हैं।
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इसी तरह एनजीटी के निर्देशों का पालन करने के लिए बिल्डरों को साइट पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए थे, मगर काम करते समय खूब धूल उड़ती है और प्रशासन-प्राधिकरण समेत सभी विभागों को सूचना दी जाती है। इसके बाद भी धूल उड़ती है और मानकों को पूरा किए बिना ही काम कराए जाते हैं।
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रविवार को हुई घटना के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को सख्ती से सुरक्षा संबंधित निर्देशों का पालन कराने के निर्देश दिए हैं, जबकि इससे पहले भी कई बार जिलाधिकारी की ओर से संबंधित अधिकारियों को गाइड लाइन भेजकर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। सोमवार को कई विभाग के अधिकारियों ने ऐसे निर्माणाधीन भवनों का निरीक्षण कर निर्देश दिए हैं कि वह सुरक्षा मानकों का पालन कराएं। अगर ऐसा नहीं होता है तो काम बंद करा दिया जाएगा। श्रम विभाग ने ठंडे पड़े श्रमिक पंजीकरण अभियान को मंगलवार से फिर शुरू करने की बात कही है।
बंद रहा काम, घटनास्थल को किया सील
पुलिस, श्रम विभाग, प्रशासन के अधिकारियों ने किया मौका मुआयना
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। सेक्टर-39 कोतवाली क्षेत्र स्थित सेक्टर-94 के निर्माणाधीन बीपीटीपी कैपिटल सिटी प्रोजेक्ट में रविवार को हुई घटना के बाद सोमवार को काम बंद रहा। पुलिस ने सोमवार तड़के ही घेराबंदी करके घटनास्थल को सील कर दिया। कई अधिकारियों ने भ्रमण कर आला अफसरों को सूचना भी दी।
उधर, श्रमिक संगठनों का आरोप है कि यदि पुलिस-प्रशासन और श्रम विभाग पहले से ही सचेत रहते, तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। सूत्रों का दावा है कि कुछ दिन पहले ही श्रम विभाग समेत कई अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया था और उसमें खामियां भी पाई गई थीं, लेकिन उनको दूर क्यों नहीं कराया गया और संबंधित संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, यह बड़ा सवाल है।
रविवार को पुलिस-प्रशासन समेत अन्य विभाग घटना को समेटने में लगे रहे और कार्रवाई के नाम पर केवल निर्माण करने वाली आहलुवालिया कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। सोमवार को पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से भ्रमण किया और भवन के आसपास के क्षेत्र को सील करा दिया गया। पुलिस, श्रम विभाग, जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और जो-जो खामियां थीं, उनकी रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को भेजनी शुरू कर दी। हालांकि आहलुवालिया कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि सभी मानकों का पालन करते हुए काम कराया जा रहा था।
पुलिस के रडार पर आए 10 लोग
कार्रवाई का खाका तैयार, लापरवाही के आधार पर किया जाएगा दोष सिद्ध
मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख की आर्थिक सहायता आज से मिलेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। सेक्टर-94 स्थित निर्माणाधीन बिल्डिंग में शटरिंग गिरने से मजदूरों की मौत के मामले में बिल्डर, ठेकेदार, प्रोजेक्ट मैनेजर समेत 10 लोगों पर कार्रवाई का खाका तैयार कर लिया गया है। इन सभी को चिह्नित करके गैर-इरादतन हत्या के मुकदमे में शामिल कर लिया जाएगा। उधर, फैक्टरी एक्ट और श्रम विभाग की ओर से मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मंगलवार से देनी शुरू कर दी जाएगी।
दरअसल, बीपीटीपी कैपिटल सिटी में निर्माण कार्य आहलुवालिया कांट्रैक्टस इंडिया लिमिटेड कर रही थी। रविवार को काम करते हुए शटरिंग गिर गई और 4 मजदूरों की मौत हो गई थी। पुलिस ने बिल्डर, ठेकेदार, प्रोजैक्ट मैनेजर समेत 10 लोगों को चिह्नित किया है और किस-किस ने लापरवाही बरती है उसकी चेन जोड़ी जा रही है, जिससे उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के तहत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस घटना के पीछे केवल लापरवाही है। अगर संबंधित लोग सतर्कता बरतते तो 4 लोगों की मौत नहीं होती। इन सभी की लापरवाही का खामियाजा उनको भुगतना पड़ेगा। उधर, पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिए हैं।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 13-13 लाख रुपये देने की पूरी तैयारी कर ली गई है और मंगलवार से परिजनों को सहायता राशि का भुगतान करना शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों की मानें तो 5 लाख रुपये श्रम विभाग की ओर से सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं, जबकि फैक्टरी एक्ट के तहत 8-8 लाख रुपये प्रत्येक मृतक के परिजनों को दिए जाएंगे।
20-20 लाख मुआवजा और उच्चस्तरीय जांच की मांग
चार लोगों की मौत की जिम्मेदार आहलुवालिया कांट्रैक्टस इंडिया लिमिटेड कंपनी है। उसके द्वारा श्रम कानूनों की अनदेखी करते हुए सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया था, जिसके चलते श्रमिकों की मौत हो गई। यह बात सोमवार को प्रेस को जारी बयान में सीटू के जिलाध्यक्ष गंगेश्वर दत्त शर्मा ने कही। उन्होंने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये का मुआवजा और संबंधित कंपनी के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही सभी घायलों का पूरा इलाज कराया जाए और श्रमिक विभाग ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए।
श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे श्रमिक
मृतक के परिजनों को 13-13 लाख रुपये की सहायता राशि मंगलवार से मुहैया करानी शुरू कर दी जाएगी। सभी श्रमिक श्रम विभाग में रजिस्टर्ड थे और उनको 5-5 लाख रुपये प्रदेश सरकार की श्रम विभाग में चल रही योजनाओं के तहत दिए जाएंगे, जबकि फैक्टरी एक्ट के तहत 8-8 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसमें उम्र के अनुसार भी कुछ रुपया घट या बढ़ सकता है।
-शैलेंद्र कुमार मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट, नोएडा