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साहिब हत्या कांड मामला
Updated Fri, 24 Aug 2018 08:12 PM IST
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साहिब को इंसाफ के लिए निकाला रोष मार्च
-नूंह के गांधी पार्क से मिनि सचिवालय तक प्रदर्शन
-एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नूंह/पुन्हाना। गत 7 अगस्त को पुन्हाना के गांव पटाकपुर में कथित तौर से पुलिस की गोली से मारे गए साहिब के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने और पटाकपुर के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मंाग को लेकर इनेलो, कांग्रेस, बसपा, साहिब हत्या कांड इंसाफ कमेटी सहित विभिन्न सगंठनों से जुडे़ लोगों ने शुक्रवार को नूंह मिनि सचिवालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार, सीएम मनोहर लाल, एसपी मेवात के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोग साहिब के हत्यारों को गिफ्तार करो, हम लेकर रहेंगे इंसाफ आदि नारे लिखी तख्तियां हाथों में लिए चल रहे थे। प्रदर्शनकारी अनाज मंडी से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित मिनि सचिवालय तक पैदल मार्च कर और नारेबाजी करते हुए पहुंचे। एहतियात के तौर पर सचिवालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने अनाज मंडी में पंचायत कर सरकार और मेवात पुलिस के खिलाफ जमकर नारेजाबी की और वहां गांधी पार्क पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन किया।
इस मौके पर पूर्व मंत्री आफताब अहमद, विधायक जाकिर हुसैन और साहिब इंसाफ कमेटी के सदस्य रमजान चौधरी ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने सरेआम साहिब को मार डाला और 200 ग्रामीणों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया।
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प्रदर्शन के बाद लिया फैसला
पूर्व मंत्री आफताब अहमद और विधायक जाकिर हुसैन ने बताया कि भाजपा सरकार गूंगी बहरी सरकार है। 14 दिन तक मृतक को बिना दफनाए धरना देने, करीब 200 लोगों द्वारा गिरफ्तारी देने और प्रदर्शन करने से भी कोई असर नहीं पड़ा है। इसलिए कमेटी ने फैसला लिया है कि जिले के विधायक इनेलो और कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। इस मौके पर पूर्व मंत्री मोहम्मद इलयास, विधायक नसीम अहमद, पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान, आजाद पूर्व मंत्री, मामन खां इंजीनियर, बसपा नेता जावेद सोहना, किसान नेता आजाद, एजाज काटपुरी, सहाब खां पटवारी, सुभान खां, आसिफ चंदेगनी, रमजान चौधरी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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सीएम चाहत थे साहिब के परिवार को नौकरी और सीबीआई जांच: रहीश
नगीना। नूंह के शिष्टमंडल से मिलने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल चाहते थे कि साहिब के परिवार को जल्द इंसाफ मिले और पूरे मामले की सीबीआई जांच हो, लेकिन इलाके कुछ नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में पीड़ित परिवार का दर्द भूल गए। वक्फ बोर्ड विभाग के राज्य मंत्री रहीश खान ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि यह मौका सियासत करने का नहीं बल्कि पीड़ित परिवार की संवेदना को समझकर न्याय दिलाने का है। राजनीति करने के लिए तो बहुत समय है। उन्होंने पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस वक्त ऐसे नेता भी है जिन्होंने मंत्री रहते हुए तो कुछ नहीं किया। अब साहिब की लाश के बहाने झूठी हमदर्दी जता रहे हैं। अभी भी सीएम मनोहर लाल ने साहिब के परिवार के लिए दरवाजे खोल रखें हैं।
उन्होंने बताया कि मैंने मुख्यमंत्री के संदेश को जनता के सामने रखा है अब साहिब के परिवार व उसके रिश्तेदारों को तय करना है कि उन्हें क्या चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने राजनीति चमकाने के लिए 15 दिन तक शव को नहीं दफनाने दिया। साहिब हत्याकांड की पैरवी कर रही संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमजान चौधरी ने कहा कि इस मसले पर फिर से कमेटी के सदस्यों के साथ विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 7 सितंबर तक की रणनीति बनाई जा चुकी है और शीघ्र राज्यपाल से मिलने के बाद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो फिर उच्चतम न्यायालय में पीआईएल लगाई जाएगी।
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-नूंह के गांधी पार्क से मिनि सचिवालय तक प्रदर्शन
-एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात रहा
अमर उजाला ब्यूरो
नूंह/पुन्हाना। गत 7 अगस्त को पुन्हाना के गांव पटाकपुर में कथित तौर से पुलिस की गोली से मारे गए साहिब के मामले में आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने और पटाकपुर के लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मंाग को लेकर इनेलो, कांग्रेस, बसपा, साहिब हत्या कांड इंसाफ कमेटी सहित विभिन्न सगंठनों से जुडे़ लोगों ने शुक्रवार को नूंह मिनि सचिवालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार, सीएम मनोहर लाल, एसपी मेवात के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोग साहिब के हत्यारों को गिफ्तार करो, हम लेकर रहेंगे इंसाफ आदि नारे लिखी तख्तियां हाथों में लिए चल रहे थे। प्रदर्शनकारी अनाज मंडी से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित मिनि सचिवालय तक पैदल मार्च कर और नारेबाजी करते हुए पहुंचे। एहतियात के तौर पर सचिवालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने अनाज मंडी में पंचायत कर सरकार और मेवात पुलिस के खिलाफ जमकर नारेजाबी की और वहां गांधी पार्क पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा को नमन किया।
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इस मौके पर पूर्व मंत्री आफताब अहमद, विधायक जाकिर हुसैन और साहिब इंसाफ कमेटी के सदस्य रमजान चौधरी ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने सरेआम साहिब को मार डाला और 200 ग्रामीणों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया।
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प्रदर्शन के बाद लिया फैसला
पूर्व मंत्री आफताब अहमद और विधायक जाकिर हुसैन ने बताया कि भाजपा सरकार गूंगी बहरी सरकार है। 14 दिन तक मृतक को बिना दफनाए धरना देने, करीब 200 लोगों द्वारा गिरफ्तारी देने और प्रदर्शन करने से भी कोई असर नहीं पड़ा है। इसलिए कमेटी ने फैसला लिया है कि जिले के विधायक इनेलो और कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएंगे। इस मौके पर पूर्व मंत्री मोहम्मद इलयास, विधायक नसीम अहमद, पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान, आजाद पूर्व मंत्री, मामन खां इंजीनियर, बसपा नेता जावेद सोहना, किसान नेता आजाद, एजाज काटपुरी, सहाब खां पटवारी, सुभान खां, आसिफ चंदेगनी, रमजान चौधरी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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सीएम चाहत थे साहिब के परिवार को नौकरी और सीबीआई जांच: रहीश
नगीना। नूंह के शिष्टमंडल से मिलने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल चाहते थे कि साहिब के परिवार को जल्द इंसाफ मिले और पूरे मामले की सीबीआई जांच हो, लेकिन इलाके कुछ नेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में पीड़ित परिवार का दर्द भूल गए। वक्फ बोर्ड विभाग के राज्य मंत्री रहीश खान ने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि यह मौका सियासत करने का नहीं बल्कि पीड़ित परिवार की संवेदना को समझकर न्याय दिलाने का है। राजनीति करने के लिए तो बहुत समय है। उन्होंने पूर्व मंत्री मोहम्मद इलियास को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस वक्त ऐसे नेता भी है जिन्होंने मंत्री रहते हुए तो कुछ नहीं किया। अब साहिब की लाश के बहाने झूठी हमदर्दी जता रहे हैं। अभी भी सीएम मनोहर लाल ने साहिब के परिवार के लिए दरवाजे खोल रखें हैं।
उन्होंने बताया कि मैंने मुख्यमंत्री के संदेश को जनता के सामने रखा है अब साहिब के परिवार व उसके रिश्तेदारों को तय करना है कि उन्हें क्या चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने राजनीति चमकाने के लिए 15 दिन तक शव को नहीं दफनाने दिया। साहिब हत्याकांड की पैरवी कर रही संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमजान चौधरी ने कहा कि इस मसले पर फिर से कमेटी के सदस्यों के साथ विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 7 सितंबर तक की रणनीति बनाई जा चुकी है और शीघ्र राज्यपाल से मिलने के बाद कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो फिर उच्चतम न्यायालय में पीआईएल लगाई जाएगी।