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चीफ जस्टिस के केस आवंटन अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला
Updated Thu, 05 Jul 2018 09:08 PM IST
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चीफ जस्टिस के केस आवंटन अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट आज सुना सकता है फैसला
- पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर 27 अप्रैल को सुरक्षित किया गया था निर्णय
एजेंसी
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर अपना फैसला सुना सकता है, जिसमें पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) को शीर्ष न्यायालय में मामलों के आवंटन का रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने इस याचिका पर अपना निर्णय 27 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाए जाने की संभावना है। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मामले में फैसला सुरक्षित करने का विरोध किया था। अटार्नी जनरल का कहना है कि मामलों के आवंटन के अधिकार में अन्य जजों को शामिल करने का प्रयास अव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
इससे पहले शांति भूषण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मास्टर ऑफ रोस्टर अनियंत्रित और निरंकुश विवेकाधीन शक्ति नहीं हो सकती, जिसके जरिए सीजेआई खास जजों की पीठ गठित कर सकें या खास जजों को मामले सौंप सकें। ये याचिका 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद दाखिल की गई थी, जिसमें जस्टिस जे. चेलमेश्वर (वर्तमान में सेवानिवृत्त), जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसेफ ने आरोप लगाया था कि शीर्ष न्यायालय में स्थिति सही नहीं है।
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- पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण की याचिका पर 27 अप्रैल को सुरक्षित किया गया था निर्णय
एजेंसी
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को उस याचिका पर अपना फैसला सुना सकता है, जिसमें पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण ने भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) को शीर्ष न्यायालय में मामलों के आवंटन का रोस्टर तैयार करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण की पीठ ने इस याचिका पर अपना निर्णय 27 अप्रैल को सुरक्षित रख लिया था, जिसे शुक्रवार को सुनाए जाने की संभावना है। अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इस मामले में फैसला सुरक्षित करने का विरोध किया था। अटार्नी जनरल का कहना है कि मामलों के आवंटन के अधिकार में अन्य जजों को शामिल करने का प्रयास अव्यवस्था को बढ़ावा देगा।
इससे पहले शांति भूषण ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मास्टर ऑफ रोस्टर अनियंत्रित और निरंकुश विवेकाधीन शक्ति नहीं हो सकती, जिसके जरिए सीजेआई खास जजों की पीठ गठित कर सकें या खास जजों को मामले सौंप सकें। ये याचिका 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद दाखिल की गई थी, जिसमें जस्टिस जे. चेलमेश्वर (वर्तमान में सेवानिवृत्त), जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस कूरियन जोसेफ ने आरोप लगाया था कि शीर्ष न्यायालय में स्थिति सही नहीं है।
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