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सर्कस में पशुओं के इस्तेमाल पर रोक की मांग
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:27 PM IST
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सर्कस में पशुओं के इस्तेमाल पर रोक की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स(पेटा) और फेडरेशन ऑफ इंडिया एनिमल प्रोटेक्शन फोरम के स्वयं सेवक, सहयोगी, बच्चे और उनके अभिभावकों ने हाथी, घोड़ा और कुत्ते सहित अन्य जानवरों का मुखौटा पहनकर, सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की। जंतर मंतर पर मांगों के समर्थन में पहुंचे इन लोगों ने सरकार से इस संबंध में मसौदे को मंजूर करने की भी मांग की ताकि पशुओं के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोका जा सके।
संस्थाओं की मांग सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। पेटा की कैंपेन कोर्डिनेटर आयुषी शर्मा के मुताबिक, सस्ती लोकप्रियता और मनोरंजन के नाम पर जानवरों की मूलभूत सुविधाओं और उनकी स्वतंत्रता के साथ छेड़छाड़ किया जाता है। कई बार जंजीरों में बांधकर रखा जाता है तो कभी मारपीट की जाती है। वर्ष 2015 से पेटा और फेडरेशन ने संयुक्त रूप से पुलिस एवं वन विभाग की मदद से 100 से अधिक जानवरों का बचाव किया, जिनमें हाथी, घोड़े, ऊंट, चिड़िया भी शामिल हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स(पेटा) और फेडरेशन ऑफ इंडिया एनिमल प्रोटेक्शन फोरम के स्वयं सेवक, सहयोगी, बच्चे और उनके अभिभावकों ने हाथी, घोड़ा और कुत्ते सहित अन्य जानवरों का मुखौटा पहनकर, सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की। जंतर मंतर पर मांगों के समर्थन में पहुंचे इन लोगों ने सरकार से इस संबंध में मसौदे को मंजूर करने की भी मांग की ताकि पशुओं के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोका जा सके।
संस्थाओं की मांग सर्कस में जानवरों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है। पेटा की कैंपेन कोर्डिनेटर आयुषी शर्मा के मुताबिक, सस्ती लोकप्रियता और मनोरंजन के नाम पर जानवरों की मूलभूत सुविधाओं और उनकी स्वतंत्रता के साथ छेड़छाड़ किया जाता है। कई बार जंजीरों में बांधकर रखा जाता है तो कभी मारपीट की जाती है। वर्ष 2015 से पेटा और फेडरेशन ने संयुक्त रूप से पुलिस एवं वन विभाग की मदद से 100 से अधिक जानवरों का बचाव किया, जिनमें हाथी, घोड़े, ऊंट, चिड़िया भी शामिल हैं।
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