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हरियाणा की तरफ आरआरटीएस ने बढ़ाया कदम
Updated Fri, 07 Dec 2018 11:59 PM IST
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दिल्ली-अलवर आरआरटीएस के
पहले चरण की डीपीआर मंजूर
एनसीआरटीसी बोर्ड ने दी मंजूरी, दिल्ली से वाया गुरुग्राम, शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोर अर्बन कांप्लेक्स पहुंचेगी रैपिड रेल
- 106 किमी की दूरी 70 मिनट में होगी तय, हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एनसीआर में आवाजाही आसान करने की दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है। दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के बाद अब दिल्ली-अलवर कॉरिडोर के पहले हिस्से की डीपीआर को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत आरआरटीएस की लाइन वाया गुरुग्राम दिल्ली से शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोर अर्बन कांप्लेक्स (एसएनबी) तक पहुंचेगी। केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अब निविदा आदि से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। टेंडर आवंटित होने के बाद कॉरिडोर पांच साल में तैयार कर लिया जाएगा।
दिल्ली-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर को तीन चरणों में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली-एसएनबी के बीच करीब 106 किमी लंबा कॉरिडोर तैयार होगा। दूसरे चरण में एसएनबी से आरआरटीएस की एक सबलाइन सोतानाला तक तैयार होगी। तीसरा चरण अलवर तक जाएगा। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सचिव की अध्यक्षता में एनसीआरटीसी बोर्ड ने पहले चरण को मंजूरी दे दी है। इनमें दिल्ली के सराय काले खां से गुरुग्राम होते हुए एसएनबी तक करीब 106 किमी लंबा कॉरिडोर तैयार होगा। इसका पांच स्टेशन वाला 35 किमी का हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। 71 किमी लंबे एलिवेटेड हिस्से में 11 स्टेशन होंगे। अधिकारियों की मानें तो बाकी दो कारीडोर की डीपीआर करीबन तैयार है। जल्द ही इसे भी मंजूरी दे दी जाएगी।
करीब 24,975 करोड़ आएगा खर्च
अधिकारियों का कहना है कि निविदा आवंटित होने के बाद पहला चरण पांच साल में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी लागत करीब 24,975 करोड़ रुपये आएगी। इसका बीस फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार व बीस फीसदी संबंधित राज्य सरकारें देंगी। बचा 60 फीसदी वित्तीय मदद करने वाली एजेंसियों से जुटाया जाएगा।
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180 किमी प्रतिघंटा तक दौड़ेगी ट्रेन
कॉरिडोर का डिजाइन ऐसा होगा कि ट्रैक पर ट्रेन 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सके। हालांकि, ऑपरेशनल स्पीड 160 व औसत 100 किमी प्रतिघंटा रखी जाएगी। एक ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीक से तैयार अधिकतम 9 कोच लगेंगे। सभी कोच वातानुकूलित होंगे। इनमें शताब्दी व हवाई जहाज जैसी बैठने की सीट व सामान रखने की जगह होगी। दिलचस्प यह है कि इसमें बिजनेस कोच भी लगेंगे। महिलाओं के लिए विशेष कोच लगेगा।
106 किमी की दूरी 70 मिनट में
106 किमी लंबे कॉरिडोर पर हर 5 से 10 मिनट में एक ट्रेन मिलेगी। मुसाफिरों को यह दूरी तय करने में 70 मिनट लगेंगे। एनसीआरटीसी का अंदाजा है कि 2025 तक कॉरिडोर पर 8.5 लाख यात्री सफर करेंगे।
हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों की राह होगी आसान
आरआरटीएस कॉरिडोर हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरेगा। आईजीआई एयरपोर्ट से जुड़े कॉरिडोर से गुरुग्राम, रेवाड़ी, मानेसर, धारूहेड़ा व बावल के बीच की आवाजाही आसान होगी। भरोसेमंद परिवहन सुविधा के विकास से अंदाजा लगाया जा रहा है कि हरियाणा के औद्योगिक विकास में भी रफ्तार आएगी। वहीं, दिल्ली से जुड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
सराय काले खां पर जुड़ेंगे तीनों कॉरिडोर
एनसीआरटीसी का कहना है कि सराय काले खां पर तीनों आरआरटीएस कॉरिडोर आपस में जुड़ जाएंगे। दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर व दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के एक जगह मिलने से सराय काले खां बड़े ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित होगा। आरआरटीएस के साथ यहां के मेट्रो, बस अड्डे व रेलवे स्टेशन को भी एक दायरे में बांधा जाएगा।
प्रमुख स्टेशन और उनकी खूबियां
सराय काले खां : मेट्रो की लाइन सात के साथ आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन तक पहुंचने की सुविधा।
जोर बाग : आरआटीएस का स्टेशन मेट्रो की लाइन दो से जुड़ेगा।
मुनिरका : मुनिरका स्टेशन पर आरआरटीएस जुड़ेगा मेट्रो की लाइन आठ से।
एयरोसिटी : एयरपोर्ट के साथ इस स्टेशन पर एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से भी जुड़ेगा आरआरटीएस।
उद्योग विहार : गुरुग्राम रैपिड रेल के साथ गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से प्रस्तावित मेट्रो।
खेड़कीदौला : प्रस्तावित मेट्रो और बस टर्मिनल से जुड़ेगा आरआरटीएस।
पंचगांव : प्रस्तावित मल्टी मॉडल हब के साथ प्रस्तावित आईएसबीटी और मेट्रो से होगा संपर्क।
बावल : बस टर्मिनल।
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पहले चरण की डीपीआर मंजूर
एनसीआरटीसी बोर्ड ने दी मंजूरी, दिल्ली से वाया गुरुग्राम, शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोर अर्बन कांप्लेक्स पहुंचेगी रैपिड रेल
- 106 किमी की दूरी 70 मिनट में होगी तय, हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा कॉरिडोर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एनसीआर में आवाजाही आसान करने की दिशा में अगला कदम बढ़ा दिया है। दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) कॉरिडोर के बाद अब दिल्ली-अलवर कॉरिडोर के पहले हिस्से की डीपीआर को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत आरआरटीएस की लाइन वाया गुरुग्राम दिल्ली से शाहजहांपुर-नीमराना-बेहरोर अर्बन कांप्लेक्स (एसएनबी) तक पहुंचेगी। केंद्रीय आवास व शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अब निविदा आदि से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। टेंडर आवंटित होने के बाद कॉरिडोर पांच साल में तैयार कर लिया जाएगा।
दिल्ली-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर को तीन चरणों में पूरा करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली-एसएनबी के बीच करीब 106 किमी लंबा कॉरिडोर तैयार होगा। दूसरे चरण में एसएनबी से आरआरटीएस की एक सबलाइन सोतानाला तक तैयार होगी। तीसरा चरण अलवर तक जाएगा। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सचिव की अध्यक्षता में एनसीआरटीसी बोर्ड ने पहले चरण को मंजूरी दे दी है। इनमें दिल्ली के सराय काले खां से गुरुग्राम होते हुए एसएनबी तक करीब 106 किमी लंबा कॉरिडोर तैयार होगा। इसका पांच स्टेशन वाला 35 किमी का हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। 71 किमी लंबे एलिवेटेड हिस्से में 11 स्टेशन होंगे। अधिकारियों की मानें तो बाकी दो कारीडोर की डीपीआर करीबन तैयार है। जल्द ही इसे भी मंजूरी दे दी जाएगी।
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करीब 24,975 करोड़ आएगा खर्च
अधिकारियों का कहना है कि निविदा आवंटित होने के बाद पहला चरण पांच साल में पूरा कर लिया जाएगा। इसकी लागत करीब 24,975 करोड़ रुपये आएगी। इसका बीस फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार व बीस फीसदी संबंधित राज्य सरकारें देंगी। बचा 60 फीसदी वित्तीय मदद करने वाली एजेंसियों से जुटाया जाएगा।
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180 किमी प्रतिघंटा तक दौड़ेगी ट्रेन
कॉरिडोर का डिजाइन ऐसा होगा कि ट्रैक पर ट्रेन 180 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सके। हालांकि, ऑपरेशनल स्पीड 160 व औसत 100 किमी प्रतिघंटा रखी जाएगी। एक ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीक से तैयार अधिकतम 9 कोच लगेंगे। सभी कोच वातानुकूलित होंगे। इनमें शताब्दी व हवाई जहाज जैसी बैठने की सीट व सामान रखने की जगह होगी। दिलचस्प यह है कि इसमें बिजनेस कोच भी लगेंगे। महिलाओं के लिए विशेष कोच लगेगा।
106 किमी की दूरी 70 मिनट में
106 किमी लंबे कॉरिडोर पर हर 5 से 10 मिनट में एक ट्रेन मिलेगी। मुसाफिरों को यह दूरी तय करने में 70 मिनट लगेंगे। एनसीआरटीसी का अंदाजा है कि 2025 तक कॉरिडोर पर 8.5 लाख यात्री सफर करेंगे।
हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों की राह होगी आसान
आरआरटीएस कॉरिडोर हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों से गुजरेगा। आईजीआई एयरपोर्ट से जुड़े कॉरिडोर से गुरुग्राम, रेवाड़ी, मानेसर, धारूहेड़ा व बावल के बीच की आवाजाही आसान होगी। भरोसेमंद परिवहन सुविधा के विकास से अंदाजा लगाया जा रहा है कि हरियाणा के औद्योगिक विकास में भी रफ्तार आएगी। वहीं, दिल्ली से जुड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा।
सराय काले खां पर जुड़ेंगे तीनों कॉरिडोर
एनसीआरटीसी का कहना है कि सराय काले खां पर तीनों आरआरटीएस कॉरिडोर आपस में जुड़ जाएंगे। दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-अलवर व दिल्ली-पानीपत कॉरिडोर के एक जगह मिलने से सराय काले खां बड़े ट्रांसपोर्ट हब के तौर पर विकसित होगा। आरआरटीएस के साथ यहां के मेट्रो, बस अड्डे व रेलवे स्टेशन को भी एक दायरे में बांधा जाएगा।
प्रमुख स्टेशन और उनकी खूबियां
सराय काले खां : मेट्रो की लाइन सात के साथ आईएसबीटी और रेलवे स्टेशन तक पहुंचने की सुविधा।
जोर बाग : आरआटीएस का स्टेशन मेट्रो की लाइन दो से जुड़ेगा।
मुनिरका : मुनिरका स्टेशन पर आरआरटीएस जुड़ेगा मेट्रो की लाइन आठ से।
एयरोसिटी : एयरपोर्ट के साथ इस स्टेशन पर एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन से भी जुड़ेगा आरआरटीएस।
उद्योग विहार : गुरुग्राम रैपिड रेल के साथ गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से प्रस्तावित मेट्रो।
खेड़कीदौला : प्रस्तावित मेट्रो और बस टर्मिनल से जुड़ेगा आरआरटीएस।
पंचगांव : प्रस्तावित मल्टी मॉडल हब के साथ प्रस्तावित आईएसबीटी और मेट्रो से होगा संपर्क।
बावल : बस टर्मिनल।