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पुरानी दवाओं की बिक्री पर रोक संबंधी याचिका पर जवाब तलब
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:31 AM IST
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पुरानी दवाओं की बिक्री पर रोक
संबंधी याचिका पर जवाब तलब
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ड्रग कंट्रोलर को नोटिस किया जारी
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। राजधानी में पुरानी दवाओं की बाजार में बिक्री रोकने की व्यवस्था करने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में कहा गया है कि जिन दवाओं की मियाद खत्म हो चुकी है उन्हें भी दोबारा स्टांप लगाकर बाजार में बेचा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर चार सप्ताह के भीतर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिका पर आगे सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई है।
जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अमित साहनी का आरोप है कि पुरानी दवाओं को पैकिंग पर कीमत और मियाद की फर्जी स्टांप लगाकर बेचा जा रहा है। इस गोरखधंधे में लगे लोग दवा के लिफाफे से उसके निर्माण की तिथि और मूल्य को स्प्रिट से मिटा देते हैं और उस पर नए तारीख डालकर काफी कीमत पर बाजार में बेच देते हैं।
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याचिका में कहा गया है कि ऐसी दवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और साथ ही लोगों के धन की लूट है। इसके लिए पुरानी दवा दुकानों से खरीदी जाती है। इसके बाद पैकिंग में बदलाव कर दोबारा बेच दी जाती है। इस धंधे में माफिया के साथ दुकानदार और दवाओं की जांच करने वाले लिप्त होते हैं। यह गोरखधंधा बड़े स्तर पर चल रहा है और इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल और बिहार पुलिस के साथ अन्य राज्यों की पुलिस ने छापा मारकर इस तरह की दवा काफी मात्रा में जब्त की है।
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संबंधी याचिका पर जवाब तलब
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ड्रग कंट्रोलर को नोटिस किया जारी
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। राजधानी में पुरानी दवाओं की बाजार में बिक्री रोकने की व्यवस्था करने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में कहा गया है कि जिन दवाओं की मियाद खत्म हो चुकी है उन्हें भी दोबारा स्टांप लगाकर बाजार में बेचा जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर चार सप्ताह के भीतर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिका पर आगे सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की गई है।
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जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अमित साहनी का आरोप है कि पुरानी दवाओं को पैकिंग पर कीमत और मियाद की फर्जी स्टांप लगाकर बेचा जा रहा है। इस गोरखधंधे में लगे लोग दवा के लिफाफे से उसके निर्माण की तिथि और मूल्य को स्प्रिट से मिटा देते हैं और उस पर नए तारीख डालकर काफी कीमत पर बाजार में बेच देते हैं।
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याचिका में कहा गया है कि ऐसी दवा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और साथ ही लोगों के धन की लूट है। इसके लिए पुरानी दवा दुकानों से खरीदी जाती है। इसके बाद पैकिंग में बदलाव कर दोबारा बेच दी जाती है। इस धंधे में माफिया के साथ दुकानदार और दवाओं की जांच करने वाले लिप्त होते हैं। यह गोरखधंधा बड़े स्तर पर चल रहा है और इस पर रोक लगाई जानी चाहिए। पश्चिम बंगाल और बिहार पुलिस के साथ अन्य राज्यों की पुलिस ने छापा मारकर इस तरह की दवा काफी मात्रा में जब्त की है।