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कहीं हुए मां कात्यायनी के दर्शन तो कहीं स्कंदमाता
Updated Mon, 15 Oct 2018 04:36 AM IST
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कहीं हुए मां कात्यायनी के दर्शन तो कहीं स्कंदमाता की अर्चना
-दिल्ली के मंदिरों में अलग-अलग तिथि को मान रहे अलग-अलग माता का दिन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अबकी बार नवरात्र को लेकर राजधानी के मंदिरों में एक अलग ही स्थिति देखने को मिल रही है। रविवार को झंडेवाला माता मंदिर में जहां मां दुर्गा के छठवें स्वरूप कात्यायनी के दर्शन हुए। वहीं कालका मंदिर में पंचमी मनाते हुए मां के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा हुई। सोमवार को कालका मंदिर में मां कात्यायनी के दर्शन होंगे जबकि झंडेवाला माता मंदिर में सोमवार को भी मां कात्यायनी की पूजा होगी।
बताया जा रहा है कि अबकी बार दो दिन एक ही तिथि पड़ने के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है। बहरहाल भक्तों ने मां के स्वरूप के दर्शन का लाभ लिया। बताया जाता है कि मां कात्यायनी की उपासना करने वाले को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति हो जाती है। कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा था। शास्त्रों के अनुसार महर्षि कात्यायन ने सर्वगुण संपन्न पुत्री पाने के उद्देश्य से भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या की और उन्हें पुत्री के रूप में कात्यायनी की प्राप्ति हुई। ऐसा भी कहा गया कि इनके उपासक को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता और वह सब तरह के पापों से मुक्त हो जाता है। इन्हें शोध की देवी भी कहा जाता है।
झंडेवाला माता मंदिर के सचिव कुलभूषण आहूजा ने बताया कि रविवार को मंदिर में दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। वहीं कालका मंदिर के संजय शर्मा ने बताया कि रविवार को सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों के बीच भक्तों ने मां की आराधना की। भक्तों के सहयोग से मंदिर परिसर में भंडारा भी शुरू किया।
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-दिल्ली के मंदिरों में अलग-अलग तिथि को मान रहे अलग-अलग माता का दिन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अबकी बार नवरात्र को लेकर राजधानी के मंदिरों में एक अलग ही स्थिति देखने को मिल रही है। रविवार को झंडेवाला माता मंदिर में जहां मां दुर्गा के छठवें स्वरूप कात्यायनी के दर्शन हुए। वहीं कालका मंदिर में पंचमी मनाते हुए मां के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा हुई। सोमवार को कालका मंदिर में मां कात्यायनी के दर्शन होंगे जबकि झंडेवाला माता मंदिर में सोमवार को भी मां कात्यायनी की पूजा होगी।
बताया जा रहा है कि अबकी बार दो दिन एक ही तिथि पड़ने के चलते ऐसा देखने को मिल रहा है। बहरहाल भक्तों ने मां के स्वरूप के दर्शन का लाभ लिया। बताया जाता है कि मां कात्यायनी की उपासना करने वाले को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थ चतुष्टय की प्राप्ति हो जाती है। कात्य गोत्र के महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, इसीलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा था। शास्त्रों के अनुसार महर्षि कात्यायन ने सर्वगुण संपन्न पुत्री पाने के उद्देश्य से भगवती पराम्बा की कठिन तपस्या की और उन्हें पुत्री के रूप में कात्यायनी की प्राप्ति हुई। ऐसा भी कहा गया कि इनके उपासक को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता और वह सब तरह के पापों से मुक्त हो जाता है। इन्हें शोध की देवी भी कहा जाता है।
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झंडेवाला माता मंदिर के सचिव कुलभूषण आहूजा ने बताया कि रविवार को मंदिर में दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ। वहीं कालका मंदिर के संजय शर्मा ने बताया कि रविवार को सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों के बीच भक्तों ने मां की आराधना की। भक्तों के सहयोग से मंदिर परिसर में भंडारा भी शुरू किया।
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