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सरकार ने स्कूलों के लिए एसएमसी फंड को दी मंजूरी
Updated Wed, 10 Oct 2018 03:40 AM IST
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अब स्कूलों को मिलेगा एसएमसी फंड, सुधरेगी व्यवस्था
सबहेड
सरकार हर स्कूल को इसके तहत देगी कम से कम 5 लाख रुपये
क्रासर
- हर स्कूल को हर पाली की एसएमसी को 5 लाख का फंड मिलेगा सालाना
- अब प्रिंसिपल छोटे-बड़े काम के लिए शिक्षा निदेशालय पर नहीं रहेंगे निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी फंड (एसएमसी) फंड को मंजूरी दे दी है। अब हर स्कूल की हर पाली की एसएमसी को कम से कम पांच लाख रुपये वार्षिक फंड दिया जाएगा। अधिकतम यह राशि सात लाख रुपये की होगी। इससे अब प्रिंसिपल को स्कूल के छोटे-बड़े काम के लिए शिक्षा निदेशालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार इसे स्कूल गर्वनेंस की दिशा में अहम कदम मान रही है।
स्कूलों की एसएमसी में प्रिंसिपल उसका प्रमुख होता है व दो टीचर, दो सामाजिक कार्यकर्ता और 12 चुने गए अभिभावक होते हैं। उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि इससे प्रिंसिपल सशक्त होंगे। अब उन्हें निदेशालय पर निर्भर नहीं रहना होगा। एक तरह से प्रिंसिपल व चुनी गई एसएमसी ही मिलकर स्कूल चलाएंगे।
एसएमसी के लिए स्कूलों को फंड बच्चों की संख्या के मुताबिक दिया जाएगा। मसलन किसी स्कूल में यदि 1500 बच्चे हैं तो उस स्कूल को पांच लाख, यदि किसी स्कूल में बच्चों की संख्या 1501 से लेकर 2500 है तो उस स्कूल को 6 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं, बच्चों की संख्या 2500 से अधिक है तो उस स्कूल को सात लाख रुपये सालाना फंड मिलेगा।
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इस फंड का पचास फीसदी पैसा मरम्मत व रख-रखाव संबंधी कार्यों पर व पचास फीसदी एसएमसी इनिशिएटिव पर खर्च होगा। पैसे को किस कार्य के लिए खर्च करना है इसका निर्णय प्रिंसिपल करेेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि आगामी 13 अक्तूबर को स्कूलों में एसएमसी की बैठक होगी, जिसमें अभिभावक भी शामिल होंगे। इस दौरान उनका परिचय एसएमसी सदस्यों से भी कराया जाएगा।
बच्चे की तैयारी के लिए विशेषज्ञ बुला सकेंगे
इस फंड के इस्तेमाल से एसएमसी इनिशिएटिव के तहत अब प्रिंसिपल व एसएमसी बच्चों को गतिविधियों की तैयारी कराने के लिए विशेषज्ञ बुला सकेंगे। मसलन किसी प्रिंसिपल को ऐसा लगता है कि 9वीं व 10वीं केबच्चों को कुछ विषयों में कुछ टॉपिक्स को समझने में परेशानी हो रही हैै तो उन्हें समझाने के लिए प्रिंसिपल फंड का इस्तेमाल कर विशेषज्ञ को बुला सकते हैं। यदि प्रिंसिपल व एसएमसी की टीम को ऐसा लगता है कि स्कूल के बच्चों को इंजीनियरिंग, लॉ, मेडिकल, सीए व आर्किटेक्ट की तैयारी करने के लिए रिसोर्स पर्सन की आवश्यकता है तो यह कार्य भी वह इस फंड से कर सकेंगे। इसके साथ ही अंग्रेजी बोलने की कक्षाएं, कैरियर विकल्प संबंधी जागरूक करने के लिए 15 दिन का लेक्चर भी इसके माध्यम से आयोजित करा सकेंगे। रिसोर्स पर्सन व विशेषज्ञ को इसकेलिए प्रति घंटा 1000 रुपये दिए जाएंगे।
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सरकार हर स्कूल को इसके तहत देगी कम से कम 5 लाख रुपये
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- हर स्कूल को हर पाली की एसएमसी को 5 लाख का फंड मिलेगा सालाना
- अब प्रिंसिपल छोटे-बड़े काम के लिए शिक्षा निदेशालय पर नहीं रहेंगे निर्भर
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नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी फंड (एसएमसी) फंड को मंजूरी दे दी है। अब हर स्कूल की हर पाली की एसएमसी को कम से कम पांच लाख रुपये वार्षिक फंड दिया जाएगा। अधिकतम यह राशि सात लाख रुपये की होगी। इससे अब प्रिंसिपल को स्कूल के छोटे-बड़े काम के लिए शिक्षा निदेशालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार इसे स्कूल गर्वनेंस की दिशा में अहम कदम मान रही है।
स्कूलों की एसएमसी में प्रिंसिपल उसका प्रमुख होता है व दो टीचर, दो सामाजिक कार्यकर्ता और 12 चुने गए अभिभावक होते हैं। उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि इससे प्रिंसिपल सशक्त होंगे। अब उन्हें निदेशालय पर निर्भर नहीं रहना होगा। एक तरह से प्रिंसिपल व चुनी गई एसएमसी ही मिलकर स्कूल चलाएंगे।
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एसएमसी के लिए स्कूलों को फंड बच्चों की संख्या के मुताबिक दिया जाएगा। मसलन किसी स्कूल में यदि 1500 बच्चे हैं तो उस स्कूल को पांच लाख, यदि किसी स्कूल में बच्चों की संख्या 1501 से लेकर 2500 है तो उस स्कूल को 6 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं, बच्चों की संख्या 2500 से अधिक है तो उस स्कूल को सात लाख रुपये सालाना फंड मिलेगा।
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इस फंड का पचास फीसदी पैसा मरम्मत व रख-रखाव संबंधी कार्यों पर व पचास फीसदी एसएमसी इनिशिएटिव पर खर्च होगा। पैसे को किस कार्य के लिए खर्च करना है इसका निर्णय प्रिंसिपल करेेंगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि आगामी 13 अक्तूबर को स्कूलों में एसएमसी की बैठक होगी, जिसमें अभिभावक भी शामिल होंगे। इस दौरान उनका परिचय एसएमसी सदस्यों से भी कराया जाएगा।
बच्चे की तैयारी के लिए विशेषज्ञ बुला सकेंगे
इस फंड के इस्तेमाल से एसएमसी इनिशिएटिव के तहत अब प्रिंसिपल व एसएमसी बच्चों को गतिविधियों की तैयारी कराने के लिए विशेषज्ञ बुला सकेंगे। मसलन किसी प्रिंसिपल को ऐसा लगता है कि 9वीं व 10वीं केबच्चों को कुछ विषयों में कुछ टॉपिक्स को समझने में परेशानी हो रही हैै तो उन्हें समझाने के लिए प्रिंसिपल फंड का इस्तेमाल कर विशेषज्ञ को बुला सकते हैं। यदि प्रिंसिपल व एसएमसी की टीम को ऐसा लगता है कि स्कूल के बच्चों को इंजीनियरिंग, लॉ, मेडिकल, सीए व आर्किटेक्ट की तैयारी करने के लिए रिसोर्स पर्सन की आवश्यकता है तो यह कार्य भी वह इस फंड से कर सकेंगे। इसके साथ ही अंग्रेजी बोलने की कक्षाएं, कैरियर विकल्प संबंधी जागरूक करने के लिए 15 दिन का लेक्चर भी इसके माध्यम से आयोजित करा सकेंगे। रिसोर्स पर्सन व विशेषज्ञ को इसकेलिए प्रति घंटा 1000 रुपये दिए जाएंगे।