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नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म में आरोपी को दस वर्ष की सजा
Updated Thu, 27 Sep 2018 03:52 AM IST
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सामूहिक दुष्कर्म के मुख्य आरोपी को दस साल की कैद
दो नाबालिगों को पहले ही भेजा चुका है बाल सुधार गृह
ग्रेटर नोएडा। जिला न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मुख्य आरोपी को दस साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वारदात में शामिल दो अन्य नाबालिगों को पहले ही तीन तीन वर्ष बालगृह में बिताने की सजा जुवेनाइल कोर्ट से मिल चुकी है। अपर सत्र प्रथम न्यायाधीश डाक्टर ए के सिंह ने सुनवाई की। वहीं, जुर्माना राशि से 40 हजार रुपये पीड़ित किशोरी को दिये जाएंगे।
सरकारी अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद ने बताया कि बादलपुर निवासी 13 वर्षीय किशोरी को उसका एक नाबालिग मित्र 2014 में तीन जून की रात आठ बजे बाइक पर बैठा कर ले गया था। रास्ते में गौतम बंगाली निवासी दुर्गा कालोनी, छपरौला बादलपुर व एक अन्य नाबालिग मिले। सुनसान जंगल में तीनों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन किशोरी बदहवास अवस्था में मिली थी। आरोप है कि गौतम बंगाली ने ही योजना तैयार की थी। परिजनों ने दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट बादलपुर कोतवाली में दर्ज कराई थी। न्यायालय में चार वर्ष सुनवाई चली। इस दौरान आठ गवाह पेश हुए। मेडिकल रिपोर्ट व किशोरी की गवाही को आधार मानते हुए न्यायालय ने फैसला सुनाया।
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दो नाबालिगों को पहले ही भेजा चुका है बाल सुधार गृह
ग्रेटर नोएडा। जिला न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मुख्य आरोपी को दस साल की सजा और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वारदात में शामिल दो अन्य नाबालिगों को पहले ही तीन तीन वर्ष बालगृह में बिताने की सजा जुवेनाइल कोर्ट से मिल चुकी है। अपर सत्र प्रथम न्यायाधीश डाक्टर ए के सिंह ने सुनवाई की। वहीं, जुर्माना राशि से 40 हजार रुपये पीड़ित किशोरी को दिये जाएंगे।
सरकारी अधिवक्ता मोहम्मद इरशाद ने बताया कि बादलपुर निवासी 13 वर्षीय किशोरी को उसका एक नाबालिग मित्र 2014 में तीन जून की रात आठ बजे बाइक पर बैठा कर ले गया था। रास्ते में गौतम बंगाली निवासी दुर्गा कालोनी, छपरौला बादलपुर व एक अन्य नाबालिग मिले। सुनसान जंगल में तीनों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन किशोरी बदहवास अवस्था में मिली थी। आरोप है कि गौतम बंगाली ने ही योजना तैयार की थी। परिजनों ने दुष्कर्म व पाक्सो एक्ट के तहत रिपोर्ट बादलपुर कोतवाली में दर्ज कराई थी। न्यायालय में चार वर्ष सुनवाई चली। इस दौरान आठ गवाह पेश हुए। मेडिकल रिपोर्ट व किशोरी की गवाही को आधार मानते हुए न्यायालय ने फैसला सुनाया।
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