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दिल्ली में सीलिंग पर छिड़ा सियासी संग्राम, कूदे तीनों दल
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:41 AM IST
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सीलिंग पर सियासी संग्राम में कूदे प्रमुख दल
चुनावी सियासत के लिए मान रहे अहम मुद्दा, कांग्रेस चला रही न्याय युद्ध तो भाजपा नेता तोड़ रहे ताला
- आप सीलिंग के लिएए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए मनोज तिवारी से मांग रही इस्तीफा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । लोक सभा चुनाव बेशक अभी दूर है, लेकिन दिल्ली की सियासी जंग का आगाज हो गया है। सीलिंग के मैदान में तीनों दलों ने अपनी-अपनी तलवारें खींच रखी हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने न्याय युद्ध छेड़ रखा है, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ताला तोड़कर केस दर्ज करवा चुके हैं। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी (आप) भी सीलिंग के लिए भाजपा को दोषी करार देते हुए मनोज तिवारी से इस्तीफा मांग रही है।
दरअसल, दिल्ली की सीलिंग से करीब सात लाख कारोबारी प्रभावित हुए हैं। तीनों पार्टियां दिल्ली की चुनावी सियासत में इसे अहम मसला मान रही हैं। पार्टी रणनीतिकारों का अंदाजा है कि 1998 की तरह इस बार भी सीलिंग का मुद्द जोर-शोर से उठेगा। लिहाजा, तीनों दल एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश में लग गए हैं। यह अलग बात है कि सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग कमेटी की निगरानी में चल रही सीलिंग पर सियासी हंगामे का खास असर पड़ने वाला नहीं है। उधर, सीलिंग की मौजूदा सियासत में एमसीडी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। कांग्रेस व आप के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता भी भाजपा शासित एमसीडी के भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। तीनों दलों के नेताओं की मांग है कि मॉनीटरिंग कमेटी खुद एमसीडी के भ्रष्टाचार की जांच करे।
सड़क पर कांग्रेस-भाजपा, आप की अध्यादेश की मांग
एक-दूसरे पर सियासी बढ़त कायम करने के लिये कांग्रेस व भाजपा के प्रदेश के वरिष्ठ नेता सड़क पर हैं। प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन की गैर-मौजूदगी में भी कांग्रेस पूरी दिल्ली में न्याय युद्ध चला रही है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने भी मोर्चा खोल रखा है। दूसरी तरफ भाजपा के विरोध प्रदर्शन को बचकानी हरकत बताते हुए आप का कहना है कि सीलिंग से बचाने का तरीका सिर्फ भाजपा के पास है। सड़क पर हंगामा करने की जगह दिल्ली के भाजपा नेताओं को केंद्र सरकार से अध्यादेश पास करवाना चाहिए।
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चुनावी सियासत के लिए मान रहे अहम मुद्दा, कांग्रेस चला रही न्याय युद्ध तो भाजपा नेता तोड़ रहे ताला
- आप सीलिंग के लिएए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए मनोज तिवारी से मांग रही इस्तीफा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । लोक सभा चुनाव बेशक अभी दूर है, लेकिन दिल्ली की सियासी जंग का आगाज हो गया है। सीलिंग के मैदान में तीनों दलों ने अपनी-अपनी तलवारें खींच रखी हैं। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने न्याय युद्ध छेड़ रखा है, जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ताला तोड़कर केस दर्ज करवा चुके हैं। दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी (आप) भी सीलिंग के लिए भाजपा को दोषी करार देते हुए मनोज तिवारी से इस्तीफा मांग रही है।
दरअसल, दिल्ली की सीलिंग से करीब सात लाख कारोबारी प्रभावित हुए हैं। तीनों पार्टियां दिल्ली की चुनावी सियासत में इसे अहम मसला मान रही हैं। पार्टी रणनीतिकारों का अंदाजा है कि 1998 की तरह इस बार भी सीलिंग का मुद्द जोर-शोर से उठेगा। लिहाजा, तीनों दल एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश में लग गए हैं। यह अलग बात है कि सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग कमेटी की निगरानी में चल रही सीलिंग पर सियासी हंगामे का खास असर पड़ने वाला नहीं है। उधर, सीलिंग की मौजूदा सियासत में एमसीडी पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं। कांग्रेस व आप के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता भी भाजपा शासित एमसीडी के भ्रष्टाचार की बात कर रहे हैं। तीनों दलों के नेताओं की मांग है कि मॉनीटरिंग कमेटी खुद एमसीडी के भ्रष्टाचार की जांच करे।
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सड़क पर कांग्रेस-भाजपा, आप की अध्यादेश की मांग
एक-दूसरे पर सियासी बढ़त कायम करने के लिये कांग्रेस व भाजपा के प्रदेश के वरिष्ठ नेता सड़क पर हैं। प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन की गैर-मौजूदगी में भी कांग्रेस पूरी दिल्ली में न्याय युद्ध चला रही है। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने भी मोर्चा खोल रखा है। दूसरी तरफ भाजपा के विरोध प्रदर्शन को बचकानी हरकत बताते हुए आप का कहना है कि सीलिंग से बचाने का तरीका सिर्फ भाजपा के पास है। सड़क पर हंगामा करने की जगह दिल्ली के भाजपा नेताओं को केंद्र सरकार से अध्यादेश पास करवाना चाहिए।
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