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छात्रों के आधार व वोटर आई कार्ड डाटा मंगाने वाले सर्कुलर को चुनौती
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:01 AM IST
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छात्रों के आधार व वोटर कार्ड का डाटा
मांगने वाली अधिसूचा को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों के छात्रों व उनके परिजनों के आधार व वोटर कार्ड की जानकारी मांगने वाले दिल्ली सरकार की अधिसूचना के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने 11 सितंबर को अधिसूचना जारी कर सरकारी स्कूलों के 87 लाख छात्रों का आधार व वोटर आई कार्ड का डाटा 21 सितंबर तक एकत्र करने का आदेश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी। यह याचिका राजकीय विद्यालय अध्यापक एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्रा ने दायर की है। अधिसूचना के मुताबिक सरकार डाटा बैंक बनाना चाहती है, जिससे उसका इस्तेमाल शिक्षा विभाग के विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके। इन दस्तावेजों की स्वयं सत्यापित प्रति स्कूल में देने का आदेश दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस पूरी कार्यवाही से छात्रों, अध्यापकों व शिक्षा विभाग पर गैर जरूरी बोझ बढ़ेगा। इसमें करोड़ों रुपये के कागजों का इस्तेमाल होगा, जिसका असर पर्यावरण पर पड़ेगा। इस कार्य से सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ भी बढ़ेगा।
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मांगने वाली अधिसूचा को चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों के छात्रों व उनके परिजनों के आधार व वोटर कार्ड की जानकारी मांगने वाले दिल्ली सरकार की अधिसूचना के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने 11 सितंबर को अधिसूचना जारी कर सरकारी स्कूलों के 87 लाख छात्रों का आधार व वोटर आई कार्ड का डाटा 21 सितंबर तक एकत्र करने का आदेश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ इस जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगी। यह याचिका राजकीय विद्यालय अध्यापक एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्रा ने दायर की है। अधिसूचना के मुताबिक सरकार डाटा बैंक बनाना चाहती है, जिससे उसका इस्तेमाल शिक्षा विभाग के विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जा सके। इन दस्तावेजों की स्वयं सत्यापित प्रति स्कूल में देने का आदेश दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि इस पूरी कार्यवाही से छात्रों, अध्यापकों व शिक्षा विभाग पर गैर जरूरी बोझ बढ़ेगा। इसमें करोड़ों रुपये के कागजों का इस्तेमाल होगा, जिसका असर पर्यावरण पर पड़ेगा। इस कार्य से सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ भी बढ़ेगा।
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