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दिल्ली में सता के सपने देख रही भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा पर

Thu, 20 Sep 2018 01:00 AM IST
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:00 AM IST
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दिल्ली में सता के सपने देख रही भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा पर
भाजपा में गुटबाजी चरम पर
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सीलिंग, दिल्ली सरकार को घेरने के मुद्दे पर भी नेताओं का अलग राग
- सांसद और मंत्री भी मंच साझा करने से कतरा रहे
विजय सिंघल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम के भरोसे दिल्ली में सत्ता के सपने देख रही प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की गुटबाजी चरम पर है। सभी नेता अपनी-अपनी डफली पर अलग राग छेड़ रहा है। सीलिंग हो या कोई और अहम मुद्दा, सभी नेता अपने स्तर पर अलग-अलग बयानबाजी और प्रदर्शन में लगे हैं।
राजधानी में महंगाई, सीलिंग का मुद्दा हो या दिल्ली सरकार को घेरने का, किसी पर भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता, केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली के अन्य सांसद मंच साझा करने से बचते रहे हैं। हालत यह है कि अधिकांश नेताओं ने प्रदेश कार्यालय से ही दूरी बना रखी है। एक ही मुद्दे पर मनोज तिवारी का बयान कुछ होता है तो विजेंद्र गुप्ता का अलग। सीलिंग का मुद्दा कांग्रेस ने उठाया तो मनोज तिवारी गोकलपुरी में सील तोड़ने पहुंच गए। उनके साथ कोई भी वरिष्ठ नेता नहीं पहुंचा। सील तोड़ने भी वे अकेले गए और एक दिन बाद भी अकेले ही नजर आए। प्रदेशाध्यक्ष होने के नाते उनके साथ पूरी पार्टी को होना चाहिए था।
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उधर, विजय गोयल गांधी नगर और त्रिनगर में अकेले ही अपने स्तर पर सीलिंग के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। पार्टी आलाकमान की नाराजगी के बाद प्रदेशाध्यक्ष से उनकी मुलाकात हुई और साथ चलने का वायदा भी हुआ, लेकिन इसका असर नहीं दिखा। डॉ. हर्षवर्धन भी चुप हैं। अन्य सांसदों में उदित राज पार्टी लाइन से अलग दिखते हैं तो रमेश विधूडी अपने इलाके में ही व्यस्त हैं। सांसद प्रवेश वर्मा, महेश गिरी भी अधिकांश समय पार्टी कार्यालय से दूर ही नजर जा रहे हैं। मीनाक्षी लेखी भी इन कार्यक्रमों में नजर नहीं आतीं। भाजपा में अंदरूनी तौर पर इस मुद्दे पर खूब चर्चा हो रही है कि आखिर आम जनता से जुड़े मुद्दे पर भी भाजपा के नेता एक नहीं है तो चुनावों में कैसे एक साथ होंगे। हालात नहीं सुधरे तो दिल्ली में सत्ता का सपना पूरा होता नजर नहीं आता।
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