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एड्स व एचआईवी पीड़ित
Updated Mon, 13 Aug 2018 10:20 PM IST
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‘आप कानून बनाते है पर उसे लागू नहीं करते’
- एचआईवी मरीजों से भेदभाव रोकने वाले कानून को लागू नहीं करने पर कोर्ट नाराज
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। एड्स व एचआईवी पीड़ितों से भेदभाव की रोकथाम के लिए बनाए गए कानून को लागू नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। इस कानून को अप्रैल 2017 में राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गई थी। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) को नोटिस किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि आप कानून बनाते है लेकिन उसे लागू नहीं करते ऐसा क्यों? कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 26 नवंबर मुकर्रर की है। याचिका दायर करने वाले डीयू के छात्र का दावा है कि एचआईवी व एड्स (रोकथाम व नियंत्रण) अधिनियम 2017 को लागू करने में देरी से इस कानून में मिले अधिकारों से यह मरीज वंचित हैं। याचिकाकर्ता शिबानी रोज वर्मा ने अधिवक्ता सीजा नायर पाल ने कहा कि देश में 21 लाख से ज्यादा एचआईवी व एड्स के मरीज हैं। इस मामले में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा देश है। राष्ट्रपति ने इस कानून को 20 अप्रैल 17 को स्वीकृति दे दी थी लेकिन सरकार ने इसे लागू नहीं किया। यह कानून स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार प्राप्ति, मकान किराये पर लेने और सरकारी तथा निजी शिक्षा संस्थानों में दाखिला लेने में होने वाले भेदभाव को रोकता है।
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- एचआईवी मरीजों से भेदभाव रोकने वाले कानून को लागू नहीं करने पर कोर्ट नाराज
अमर उजाला ब्यूरो,
नई दिल्ली। एड्स व एचआईवी पीड़ितों से भेदभाव की रोकथाम के लिए बनाए गए कानून को लागू नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। इस कानून को अप्रैल 2017 में राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल गई थी। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) को नोटिस किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा है कि आप कानून बनाते है लेकिन उसे लागू नहीं करते ऐसा क्यों? कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 26 नवंबर मुकर्रर की है। याचिका दायर करने वाले डीयू के छात्र का दावा है कि एचआईवी व एड्स (रोकथाम व नियंत्रण) अधिनियम 2017 को लागू करने में देरी से इस कानून में मिले अधिकारों से यह मरीज वंचित हैं। याचिकाकर्ता शिबानी रोज वर्मा ने अधिवक्ता सीजा नायर पाल ने कहा कि देश में 21 लाख से ज्यादा एचआईवी व एड्स के मरीज हैं। इस मामले में भारत दुनिया का तीसरा बड़ा देश है। राष्ट्रपति ने इस कानून को 20 अप्रैल 17 को स्वीकृति दे दी थी लेकिन सरकार ने इसे लागू नहीं किया। यह कानून स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार प्राप्ति, मकान किराये पर लेने और सरकारी तथा निजी शिक्षा संस्थानों में दाखिला लेने में होने वाले भेदभाव को रोकता है।
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