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भीड़ की हिंसा रोकने में सरकार नाकाम
Updated Mon, 13 Aug 2018 10:20 PM IST
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भीड़ की हिंसा रोकने में सरकार नाकाम
- यूनाइटेड अंगेस्ट हेट ने खौफ की आजादी के डर से आजाद होने की रखी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भीड़ द्वारा हिंसा, बोलने की आजादी से रोकने जैसे आदि मुद्दों को लेकर दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस से पूर्व सोमवार को खौफ से आजादी कार्यक्रम में इस डर से आजाद होने की मांग रखी। कार्यक्रम के माध्यम से वक्ताओं ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि आज देश में डर का माहौल है, जिसमें आजादी से बोलने पर सजा मिलती है। खास बात यह है कि कार्यक्रम में नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस भी शामिल हुईं। फातिमा ने अपने बेटे को तलाशने की मांग रखते हुए कहा कि पुलिस के बाद अब सीबीआई भी कोई जवाब नहीं दे रही है। कांस्टीट्यूशन क्लब में यूनाइटेड अंगेस्ट हेट की ओर से खौफ से आजादी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रशांत भूषण, सांसद मनोज झा, पूर्व आईजी पुलिस एसआर दारापूरी, सांसद अली अनवर, मेवात में ट्रेन के अंदर भीड़ द्वारा मारे गए जुनैद की मां फातिमा, हापुड़ में भीड़ द्वारा पीड़ित सैमुद्दीन व गोरखुपर मेडिकल कॉलेज के सस्पेंड डॉक्टर कफील खान समेत कई विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल रहे।
वक्ताओं का कहना था कि मोदी सरकार में भीड़ द्वारा जान से मारने की घटनाएं बढ़ रही है। इसके अलावा गाय के नाम पर भी भीड़ बिना सच जाने मुस्लिम समाज के लोगों पर हमले कर रही है। भीड़ की हिंसा आज सबसे बड़ी दिक्कत बनकर उभरी है। हालांकि अदालत के निर्देश के बाद भी सरकार या राज्य उसे रोकने में नाकाम रही है।
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- यूनाइटेड अंगेस्ट हेट ने खौफ की आजादी के डर से आजाद होने की रखी मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। भीड़ द्वारा हिंसा, बोलने की आजादी से रोकने जैसे आदि मुद्दों को लेकर दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस से पूर्व सोमवार को खौफ से आजादी कार्यक्रम में इस डर से आजाद होने की मांग रखी। कार्यक्रम के माध्यम से वक्ताओं ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि आज देश में डर का माहौल है, जिसमें आजादी से बोलने पर सजा मिलती है। खास बात यह है कि कार्यक्रम में नजीब अहमद की मां फातिमा नफीस भी शामिल हुईं। फातिमा ने अपने बेटे को तलाशने की मांग रखते हुए कहा कि पुलिस के बाद अब सीबीआई भी कोई जवाब नहीं दे रही है। कांस्टीट्यूशन क्लब में यूनाइटेड अंगेस्ट हेट की ओर से खौफ से आजादी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रशांत भूषण, सांसद मनोज झा, पूर्व आईजी पुलिस एसआर दारापूरी, सांसद अली अनवर, मेवात में ट्रेन के अंदर भीड़ द्वारा मारे गए जुनैद की मां फातिमा, हापुड़ में भीड़ द्वारा पीड़ित सैमुद्दीन व गोरखुपर मेडिकल कॉलेज के सस्पेंड डॉक्टर कफील खान समेत कई विश्वविद्यालयों के छात्र शामिल रहे।
वक्ताओं का कहना था कि मोदी सरकार में भीड़ द्वारा जान से मारने की घटनाएं बढ़ रही है। इसके अलावा गाय के नाम पर भी भीड़ बिना सच जाने मुस्लिम समाज के लोगों पर हमले कर रही है। भीड़ की हिंसा आज सबसे बड़ी दिक्कत बनकर उभरी है। हालांकि अदालत के निर्देश के बाद भी सरकार या राज्य उसे रोकने में नाकाम रही है।
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