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अपराधियों के केस की पैरवी करने पर डीएम ने शासकीय अधिवक्ता पर लगाया प्रतिबंध

Fri, 20 Jul 2018 09:04 PM IST
Updated Fri, 20 Jul 2018 09:04 PM IST
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अपराधियों के केस की पैरवी करने पर डीएम ने शासकीय अधिवक्ता पर लगाया प्रतिबंध

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शासकीय अधिवक्ता के अभियोजन कार्य पर लगाई रोक
- सोशल मीडिया पर वायरल विडियो पर डीएम ने लिया संज्ञान
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा।
गौतमबुद्ध नगर के शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) चौधरी प्रेम सिंह के निजी अधिवक्ता के रूप में न्यायालय में जिले के अपराधी सुंदर भाटी, सिंहराज, अंकित गुर्जर, अवनेश उर्फ अन्नी आदि के मामलों की पैरवी करने के मामले में जिलाधिकारी ने तत्काल उनके अभियोजन कार्य को रोक दिया है। डीएम ने शासन को भी सूचना भेज दी है।
जिलाधिकारी बीएन सिंह ने जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसमें उन्होंने कहा कि 18 जून 2018 को चौधरी प्रेम सिंह पैनल अधिवक्ता फौजदारी को द्वितीय अपर जिला जज के न्यायालय में पैरवी करने के लिए लगाया हुआ था। उसी न्यायालय में सुंदर भाटी व उसके गिरोह के सदस्यों के खिलाफ धारा 302 और 307 आदि से संबंधित 12 मुकदमे विचाराधीन हैं, जिनमें प्रेम सिंह अपराधियों की पैरवी खुद करते थे। इसकी जानकारी मिलने पर डीएम ने उन्हें रोका था। 10 मई 2015 को चौधरी प्रेम सिंह ने पैनल अधिवक्ता फौजदारी की तरफ से खुद ही जिला जज व सत्र न्यायाधीश को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, कि वह उक्त 12 वादों में मुल्जिमानों के अधिवक्ता हैं। इसलिए वादों को अन्य न्यायालय में स्थानांतरण कर दिया जाए।
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चौधरी प्रेमसिंह वर्तमान में न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम में राज्य सरकार के सत्र वादों की पैरवी कर रहे हैं। अन्य न्यायालयों में भी अपराधियों की पेशी के दौरान अपने न्यायालय का कार्य छोड़कर जाते हैं, जिसकी पुष्टि सोशल मीडिया पर चल रही वीडियो से भी होती है।
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अपराधियों तक कार्रवाई की सूचना पहुंचाने की आशंका : डीएम
जिलाधिकारी ने कहा कि हाल के दिनों में देखा गया है कि जघन्य अपराधों के केस में अधिकतर आरोपी बरी हो रहे हैं। बहुत कम वादों में सजा हुई है। इसके कई कारण हो सकते हैं। शासकीय अधिवक्ता का आरोपियों की पैरवी इस तरह से करना राज्य सरकार के हितों के प्रतिकूल है। ऐसे में अपराधियों के खिलाफ तैयार की जाने वाली रणनीति की योजना की सूचना अपराधियों तक पहुंचने की आशंका है। ऐसी स्थिति में चौधरी प्रेमसिंह से शासन के हित में अग्रिम निर्णय लेने तक अभियोजना कार्य लेना उचित नहीं है। अभियोजना कार्य करने से तत्काल रोका जाए और पैनल पर बने रहने के बारे में अलग से परीक्षण किया जाए।
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