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दाखिले रद कराने पर नहीं लग रहा ब्रेक, कॉलेज परेशान
Updated Thu, 19 Jul 2018 09:16 PM IST
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दाखिले रद्द कराने पर नहीं लग रहा ब्रेक, कॉलेज परेशान
- सातवीं कट ऑफ आने की भी संभावना, सामान्य के लिए मौके न के बराबर
- शुक्रवार छठी कट ऑफ के दाखिलों का आखिरी दिन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉलेजों से दाखिले रद्द कराने पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। पहली कट ऑफ के बाद से शुरू हुआ यह सिलसिला छठी कट ऑफ के दाखिलों तक जारी है। लगातार रद्द हो रहे दाखिलों से कॉलेज भी परेशान हैं। प्रिंसिपल मान कर चल रहे हैं कि जिस तरह से दाखिले रद्द हो रहे हैं उससे सातवीं कट ऑफ आने की भी संभावना है। हालांकि उसमें सामान्य श्रेणी के दाखिले के अवसर न के बराबर ही होंगे।
डीयू में छठी कट ऑफ के दाखिले के दूसरे दिन भी कुछ कॉलेजों में 10 से 41 तक दाखिले रद्द हुए। इससे कॉलेजों में असंतुलन बना हुआ है। प्रिंसिपल दबी जुबान से यह स्वीकार कर रहे हैं कि जब तक छात्रों को दाखिले रद्द कराने के मौके मिलते रहेंगे वह ऐसा करते रहेंगे। डीयू ने कॉलेजों को पांचवीं कट ऑफ तक दाखिले पूरे करने को कहा था लेकिन वे ऐसा कर नहीं पा रहे।
अरबिंदो कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ विपिन अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां सामान्य श्रेणी के दाखिले तो बंद हो गए हैं, लेकिन अब भी एससी, एसटी व ओबीसी श्रेणी की कुछ सीटें बची हुई हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि छात्र हर कट ऑफ के बाद दाखिला रद्द करा लेते हैं। छठी कट ऑफ में ही उनके यहां 41 दाखिले रद्द हो गए हैं। शुक्रवार को इस कट ऑफ के दाखिलों का अंतिम दिन है। ऐसे में छात्र इसे रद्द कराने के बजाए दाखिला लेंगे, लेकिन उन्हें यदि अगली कट ऑफ आने की उम्मीद होगी तो वह दाखिला रद्द करा लेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि रिजर्व श्रेणी के लिए तो कम से कम सातवीं कट ऑफ निकालनी पड़ेगी। लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ प्रत्युष वत्सला ने बताया कि यहां सामान्य व आरक्षित श्रेणी के लिए गिनी-चुनी सीटें हैं। फिर भी छात्र दाखिले रद्द कराते जा रहे हैं।
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- सातवीं कट ऑफ आने की भी संभावना, सामान्य के लिए मौके न के बराबर
- शुक्रवार छठी कट ऑफ के दाखिलों का आखिरी दिन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉलेजों से दाखिले रद्द कराने पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है। पहली कट ऑफ के बाद से शुरू हुआ यह सिलसिला छठी कट ऑफ के दाखिलों तक जारी है। लगातार रद्द हो रहे दाखिलों से कॉलेज भी परेशान हैं। प्रिंसिपल मान कर चल रहे हैं कि जिस तरह से दाखिले रद्द हो रहे हैं उससे सातवीं कट ऑफ आने की भी संभावना है। हालांकि उसमें सामान्य श्रेणी के दाखिले के अवसर न के बराबर ही होंगे।
डीयू में छठी कट ऑफ के दाखिले के दूसरे दिन भी कुछ कॉलेजों में 10 से 41 तक दाखिले रद्द हुए। इससे कॉलेजों में असंतुलन बना हुआ है। प्रिंसिपल दबी जुबान से यह स्वीकार कर रहे हैं कि जब तक छात्रों को दाखिले रद्द कराने के मौके मिलते रहेंगे वह ऐसा करते रहेंगे। डीयू ने कॉलेजों को पांचवीं कट ऑफ तक दाखिले पूरे करने को कहा था लेकिन वे ऐसा कर नहीं पा रहे।
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अरबिंदो कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ विपिन अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां सामान्य श्रेणी के दाखिले तो बंद हो गए हैं, लेकिन अब भी एससी, एसटी व ओबीसी श्रेणी की कुछ सीटें बची हुई हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि छात्र हर कट ऑफ के बाद दाखिला रद्द करा लेते हैं। छठी कट ऑफ में ही उनके यहां 41 दाखिले रद्द हो गए हैं। शुक्रवार को इस कट ऑफ के दाखिलों का अंतिम दिन है। ऐसे में छात्र इसे रद्द कराने के बजाए दाखिला लेंगे, लेकिन उन्हें यदि अगली कट ऑफ आने की उम्मीद होगी तो वह दाखिला रद्द करा लेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि रिजर्व श्रेणी के लिए तो कम से कम सातवीं कट ऑफ निकालनी पड़ेगी। लक्ष्मीबाई कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ प्रत्युष वत्सला ने बताया कि यहां सामान्य व आरक्षित श्रेणी के लिए गिनी-चुनी सीटें हैं। फिर भी छात्र दाखिले रद्द कराते जा रहे हैं।
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